मेयर बोलीं; चाय बनाओ, सबको पिलाओ जवाब आया...नै बनतै मैडम, आज पानी नै छै
Updated at : 30 Mar 2019 7:22 AM (IST)
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भागलपुर : नगर निगम मेें शुक्रवार को मेयर सीमा साहा से मिलने अचानक ही कुछ लोग पहुंचे. मेयर ने उनके लिए चतुर्थवर्गीय कर्मी से चाय बनाने को कहा. मेयर बोलीं; चाय बनाओ और सबको पिलाओ. इसपर कर्मी का जवाब आया ; चाय नै बनतै मैडम, आय पानी नै छै…कप धुअै लेली भी पानी नै छै. […]
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भागलपुर : नगर निगम मेें शुक्रवार को मेयर सीमा साहा से मिलने अचानक ही कुछ लोग पहुंचे. मेयर ने उनके लिए चतुर्थवर्गीय कर्मी से चाय बनाने को कहा. मेयर बोलीं; चाय बनाओ और सबको पिलाओ.
इसपर कर्मी का जवाब आया ; चाय नै बनतै मैडम, आय पानी नै छै…कप धुअै लेली भी पानी नै छै. यह बात सुनते ही मेयर भड़क गयीं और तुरंत जलकल शाखा के पाइपलाइन इंस्पेक्टर को बुलाया. इंस्पेक्टर ने बताया कि बोरिंग का मोटर खराब है.
टैंकर से पानी की बात सुन हंसेे पार्षद : मेयर ने कहा कि वैकल्पिक व्यवस्था क्या है. इसपर पाइपलाइन इंस्पेक्टर ने टैंकर से पानी व्यवस्था कराने की बात कही, तो कक्ष में उपस्थित पार्षद संजय सिन्हा, अशोक पटेल व गोविंद बनर्जी हंसने लगे.
मेयर भड़क उठीं, बोलीं यहां सब गड़बड़झाला है. कहीं मोटर भी तो बिना पानी दिये ही चल रहा हो. कोई माई-बाप नहीं है.
शहर को पानी मुहैया करवाने वाले निगम में ही शुक्रवार को पानी की किल्लत से जूझते रहे सब मेयर बोलीं; आखिर क्या नाटक है, जब निगम में ही पानी की व्यवस्था नहीं है, तो पूरे शहर को क्या खाक पानी पिला सकेंगे
भड़कीं मेयर
जलकल शाखा के पदाधिकारियों को लगायी फटकार : मेयर ने फिर जलकल शाखा के अधीक्षक हरेराम चौधरी और प्रभारी उमाशंकर सिंह को बुलाकर फटकार लगायी. मेयर बोलीं; आखिर क्या नाटक है, जब नगर निगम में ही पानी की व्यवस्था नहीं है तो पूरे शहर को क्या खाक पानी पिला सकेंगे.
जलकल अधीक्षक हरेराम चौधरी और जलकल शाखा प्रभारी ने तकनीकी गड़बड़ी का हवाला देते हुए अपना बचाव किया. फिर भी शीघ्र मोटर दुरुस्त करवाकर जलापूर्ति बहाल कराने की बात कही
चार दिन पहले पेयजल संकट से जूझे थे नगर आयुक्त भी : इसी क्रम में एक कर्मचारी ने मेयर को बताया कि चार दिन पहले नगर आयुक्त श्याम बिहारी मीणा खुद पेयजल को लेकर परेशान दिखे थे और अपने चेंबर से उठकर बाहर आये और बाहर से पानी मंगवाकर पिया.
नगर निगम में इकलौता है बोरिंग : नगर निगम कार्यालय परिसर में इकलौता बोरिंग है, जो 2002 में कराया गया था. इसके बाद से अब तक इसमें कोई बदलाव नहीं किया गया.
इस बीच बार-बार जलस्तर घटता गया. फिर भी कभी पेयजल व्यवस्था को बेहतर नहीं किया गया. केवल एक ही बोरिंग से जलापूर्ति का विस्तार कर दिया गया.
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