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17 विषयों में पीजी और 21 विषयों में ऑनर्स तक की पढ़ाई वाले आरएलएसवाई कॉलेज में मात्र 20 ही स्थायी प्राध्यापक

Updated at : 09 May 2024 9:27 PM (IST)
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17 विषयों में पीजी और 21 विषयों में ऑनर्स तक की पढ़ाई वाले आरएलएसवाई कॉलेज में मात्र 20 ही स्थायी प्राध्यापक

वर्षों से बदहाल स्कूली शिक्षा व्यवस्था में बुनियादी स्तर पर बड़े सुधार से लोग आह्लादित हैं. बावजूद इसके उच्च शिक्षा व्यवस्था के स्तर पर बदहाली देखने के लायक है.

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बेतिया. वर्षों से बदहाल स्कूली शिक्षा व्यवस्था में बुनियादी स्तर पर बड़े सुधार से लोग आह्लादित हैं. बावजूद इसके उच्च शिक्षा व्यवस्था के स्तर पर बदहाली देखने के लायक है. हालांकि बीआरए बिहार विश्वविद्यालय में कुलपति के तौर पर प्रो.(डॉ) दिनेश चंद्र राय के पद स्थापन के बाद से विश्वविद्यालय सहित पाश्चिक चंपारण के कॉलेजों में भी सुधार की बयार बहने लगी है. अब आम लोगों के साथ विद्यार्थियों में भी उच्च शिक्षा में सुधार की उम्मीद बढ़ने लगी है. इस बीच चुनौतियां काफी बढ़ी हैं. उदाहरण के लिए 17 विषयों में पीजी और कुल 21 विषयों में बीए, बीएस-सी और बी-कॉम ऑनर्स तक की पढ़ाई वाले आरएलएसवाई कॉलेज में मात्र 20 ही स्थायी प्राध्यापक हैं. विश्वविद्यालय स्तर से बहाल विभिन्न विषयों के 17 अस्थाई अतिथि प्राध्यापकगण के माध्यम से पठन पाठन की व्यवस्था कॉलेज में जारी है. व्यवस्था बनाने में दिन रात एक कर के जूझ रहे कॉलेज के नवनियुक्त प्राचार्य प्रो. (डॉ) अभय कुमार बताते हैं कि हमारे कॉलेज में पीजी की पढ़ाई शुरू होने से पूर्व की स्थिति में प्राध्यापकों के कुल 101 पद स्वीकृत हैं. आज गेस्ट फैकल्टी के 17 प्राध्यापकगण को जोड़ भी लें तो मात्र 37 ही प्राध्यापक हैं. प्राचार्य ने बताया कि कॉलेज प्रशासन के लिए बड़ी राहत की बात है कि शिक्षा विभाग ने नए सत्र से हमारे जैसे डिग्री और पीजी कॉलेज में सरकार ने इंटर की पढ़ाई रोक दी है. इसके प्रभाव से कॉलेज में विद्यार्थियों की संख्या 15 हजार से भी अधिक से घटकर कुल करीब दस हजार हो गई है. तीन शिफ्ट में रोज ली जाने लगी है प्राध्यापक से लेकर आदेशपाल तक की हाजिरी आरएलएसवाई कॉलेज के प्राचार्य प्रो.(डॉ) अभय कुमार बताते हैं कि हमारे कॉलेज में प्रतिदिन तीन-तीन शिफ्ट में हाजिरी ली जाने लगी है. उन्होंने बताया कि शिक्षा विभाग और विश्वविद्यालय प्रशासन के निर्देश के आलोक में प्रतिदिन पूर्वाह्न 10 बजे और शाम पांच बजे बायोमैट्रिक मशीन के माध्यम से रोज हाजिरी लगती है. वही प्राध्यापक से लेकर आदेशपाल तक की तीसरी हाजिरी मध्यान्ह 12 से अपराह्न दो बजे के बीच उनके आदेश पर सभी के कार्यस्थल पर ही प्रतिदिन रेंडमली जाती है. इस व्यवस्था की निगरानी उनके अतिरिक्त कॉलेज बर्सर प्रो.(डॉ) विनोद कुमार के द्वारा विशेष रूप से की जाती है. वही प्राचार्य ने यह भी बताया कि कॉलेज के किसी भी काउंटर पर या किसी कर्मी के द्वारा एक रुपया भी रसीद से अधिक नहीं लिया जाता है. इसकी पड़ताल आप या कोई सामान्य व्यक्ति भी कर सकता है. इसके साथ ही प्राध्यापक से लेकर प्रत्येक श्रेणी के कर्मी को अपने विभाग, क्लास, काउंटर या निर्धारित कार्य स्थल पर ही पूरे कार्य दिवस में मौजूद रहना कॉलेज प्रशासन स्तर से पूरी सख्ती के साथ अनिवार्य किया गया है.

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