‘रोजी-रोटी के लिए छोड़ना पड़ता है घर-परिवार’, परदेश जाने वाले मजदूरों की दर्द भरी कहानी

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तमिलनाडु जाने के लिए निकले युवा मजदूर | Prabhat Khabar Network

स्थानीय स्तर पर रोजगार के पर्याप्त अवसर नहीं मिलने के कारण बलुआ भवानीपुर के मजदूर हर साल तमिलनाडु का रुख करते हैं. मजदूरों का कहना है कि गांव में नियमित काम मिल जाए तो परिवार छोड़कर परदेश जाने की मजबूरी खत्म हो जाएगी.

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बेतिया न्यूज: सुबह का वक्त था. घर-आंगन में सामान बांधने की हलचल थी, लेकिन चेहरों पर अपनों से दूर जाने की उदासी साफ दिख रही थी. बलुआ भवानीपुर पंचायत के वार्ड संख्या पांच से बुधवार को दर्जनों मजदूर तमिलनाडु के लिए रवाना हुए. किसी के हाथ में कपड़ों से भरा बैग था तो कोई जरूरी सामान सिर पर उठाए था. मंजिल हजारों किलोमीटर दूर थी, लेकिन सफर की वजह सिर्फ एक थी- रोजी-रोटी.

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10-15 हजार की आमदनी

गांव में नियमित रोजगार नहीं मिलने के कारण इन मजदूरों को हर साल काम की तलाश में दूसरे राज्यों का रुख करना पड़ता है. तमिलनाडु में उन्हें धान की मंडी में पैकिंग और लोडिंग का काम मिलता है. इससे उन्हें महीने में करीब 10 से 15 हजार रुपये तक की आमदनी हो जाती है. गांव में रोजगार के सीमित अवसरों के बीच यही कमाई उनके परिवार का सहारा बनती है.

बेतिया से ट्रेन पकड़कर जाएंगे तमिलनाडु

बलुआ वार्ड संख्या पांच निवासी संजय नट, मनोहर राम, सुग्रीव कुमार, राधाकिसुन राम, युगेश राम और बीरबल नट समेत अन्य मजदूर बुधवार को सामान लेकर बेतिया के लिए रवाना हुए. बेतिया से ट्रेन पकड़कर सभी तमिलनाडु जाएंगे.

इन मजदूरों के लिए यह पहली बार नहीं है, जब उन्हें काम की तलाश में घर से इतनी दूर जाना पड़ रहा है. हर साल स्थानीय स्तर पर रोजगार की कमी के कारण उन्हें दूसरे राज्य में जाना पड़ता है. परिवार चलाने के लिए मिलने वाली मजदूरी ही उन्हें यह दूरी तय करने के लिए मजबूर करती है.

कमाई के साथ घर की चिंता भी

मजदूरों का कहना है कि परदेश जाना उनकी पसंद नहीं, बल्कि मजबूरी है. परिवार को छोड़कर महीनों तक दूर रहना आसान नहीं होता. बच्चों की पढ़ाई, पत्नी की जिम्मेदारी और बुजुर्ग माता-पिता की चिंता लगातार बनी रहती है.

इसके बावजूद घर का चूल्हा जलाने और बच्चों की जरूरतें पूरी करने के लिए उन्हें दूसरे राज्य का रुख करना पड़ता है. मजदूरों का कहना है कि अगर गांव में पर्याप्त काम मिल जाए तो वे अपने परिवार के साथ रहकर ही कमाई करना पसंद करेंगे.

गांव में रोजगार मिले तो रुक जाएगा पलायन

मजदूरों की सबसे बड़ी मांग गांव में नियमित रोजगार उपलब्ध कराने की है. उनका कहना है कि पंचायत और आसपास के इलाके में सालभर काम मिलने लगे तो तमिलनाडु जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी.

ग्रामीणों का कहना है कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के स्थायी साधन विकसित किए जाएं तो मजदूरों का पलायन काफी हद तक रोका जा सकता है. इससे परिवार एक साथ रह सकेंगे और गांव की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी.

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