बगहा कोर्ट का फैसला क्यों बना चर्चा का विषय? साक्ष्य के अभाव में अशोक सिंह समेत चार अभियुक्त रिहा

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बगहा व्यवहार न्यायालय का प्रवेश द्वार

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बगहा कोर्ट ने एसटीआर 129/18 मामले में चार अभियुक्तों को रिहा कर दिया है. अदालत ने साक्ष्य के अभाव को फैसले का आधार बनाया. इस फैसले से अभियुक्त पक्ष को बड़ी राहत मिली है.

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Bagaha News: बगहा.  जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश चतुर्थ मानवेंद्र मिश्र की अदालत ने एसटीआर संख्या 129/18 मामले में अधिवक्ता अमित शंकर सिंह के पिता अशोक सिंह, चाचा राकेश सिंह समेत चार अभियुक्तों को साक्ष्य के अभाव में रिहा कर दिया. अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद उपलब्ध साक्ष्यों और तथ्यों का अवलोकन करते हुए यह फैसला सुनाया. मामले में अशोक सिंह और राकेश सिंह के अलावा छोटेलाल यादव तथा संतोष राम अभियुक्त बनाए गए थे.

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एसटीआर 129/18 मामले में चार अभियुक्तों को राहत

मामले की सुनवाई जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश चतुर्थ मानवेंद्र मिश्र की अदालत में हुई. सुनवाई के दौरान अभियोजन की ओर से आरोपों को साबित करने के लिए न्यायालय के समक्ष साक्ष्य प्रस्तुत किए गए. वहीं बचाव पक्ष की ओर से भी अभियुक्तों का पक्ष रखा गया.

पर्याप्त और ठोस साक्ष्य नहीं जुटा सका अभियोजन

सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से मामले में प्रस्तुत साक्ष्यों और तथ्यों के आधार पर आरोपों को साबित करने का प्रयास किया गया. हालांकि, अदालत के समक्ष उपलब्ध साक्ष्य आरोपों को पर्याप्त एवं ठोस आधार पर साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं पाए गए. इसके बाद अदालत ने साक्ष्य के अभाव में चारों अभियुक्तों को मामले से रिहा करने का आदेश दिया.

अशोक सिंह और राकेश सिंह समेत चार नामजद थे

मामले में अशोक सिंह और राकेश सिंह के साथ छोटेलाल यादव तथा संतोष राम को अभियुक्त बनाया गया था. सुनवाई के दौरान अभियोजन और बचाव पक्ष दोनों ने अपनी-अपनी दलीलें न्यायालय के समक्ष रखीं. अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलों और उपलब्ध साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद फैसला सुनाया.

अपर लोक अभियोजक ने फैसले की दी जानकारी

अपर लोक अभियोजक जितेंद्र भारती ने बताया कि मामले में दोनों पक्षों को सुनने के बाद न्यायालय ने उपलब्ध साक्ष्यों एवं तथ्यों का अवलोकन किया. इसके बाद अदालत ने चारों अभियुक्तों को साक्ष्य के अभाव में रिहा करने का आदेश दिया. उन्होंने बताया कि अभियोजन की ओर से मामले को साबित करने के लिए न्यायालय के समक्ष साक्ष्य प्रस्तुत किए गए थे.

फैसले के बाद अभियुक्त पक्ष ने ली राहत की सांस

अदालत के फैसले के बाद चारों अभियुक्तों को राहत मिली. बचाव पक्ष की ओर से सुनवाई के दौरान अभियुक्तों का पक्ष न्यायालय के समक्ष रखा गया था. अदालत के साक्ष्य के अभाव में रिहाई के आदेश के बाद अभियुक्त पक्ष ने राहत की सांस ली.

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