बेतिया के सरकारी स्कूलों की बदलेगी तस्वीर, 30 नवंबर तक मरम्मत और सफाई का लक्ष्य
सरकारी स्कूल की सांकेतिक तस्वीर
बेतिया के सरकारी विद्यालयों में मरम्मत और आधारभूत सुविधाओं से जुड़े काम तेज होंगे. 30 नवंबर तक पहले चरण के कार्य पूरे करने का लक्ष्य है, जबकि भवनविहीन स्कूलों में भवन, अतिरिक्त कक्ष, शौचालय और चहारदीवारी का निर्माण मार्च 2027 तक होगा.
बेतिया सरकारी स्कूल: जिले के सरकारी विद्यालयों में आधारभूत सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए जिला प्रशासन ने अभियान तेज कर दिया है. सेवा संकल्प एवं कायाकल्प अभियान के तहत पुराने स्कूल भवनों और वर्ग कक्षों की मरम्मत, रंग-रोगन, रसोईघर के रखरखाव और शौचालयों की सफाई समेत कई काम कराए जाएंगे. जिलाधिकारी तरनजोत सिंह ने अधिकारियों को निर्धारित समय सीमा के भीतर कार्य पूरा कराने का निर्देश दिया है.
30 नवंबर तक स्कूलों में होंगे कई काम
अभियान के पहले चरण में विद्यालय भवन और वर्ग कक्षों की मरम्मत के साथ रंग-रोगन कराया जाएगा. रसोईघर की मरम्मत और रखरखाव के अलावा शौचालयों की मिशन मोड में सफाई कराने का निर्देश दिया गया है.
इसके साथ ही विद्यालयों में पेयजल, बिजली और अन्य जरूरी सुविधाओं को भी क्रियाशील कराया जाएगा. इन सभी कार्यों को 30 नवंबर तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है.
भवनविहीन स्कूलों में बनेंगे भवन
अभियान के दूसरे चरण में भवनविहीन विद्यालयों को प्राथमिकता दी जाएगी. ऐसे स्कूलों में नए भवन के निर्माण के साथ जरूरत के अनुसार अतिरिक्त वर्ग कक्ष, शौचालय और चहारदीवारी भी बनाई जाएगी.
इन निर्माण कार्यों को 31 मार्च 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है. विद्यालयों की आधारभूत संरचनाओं की मरम्मत समग्र शिक्षा के तहत मिलने वाले विद्यालय अनुदान से कराई जाएगी. आवश्यकता के अनुसार माध्यमिक और उच्च माध्यमिक विद्यालयों के विकास कोष का भी उपयोग किया जाएगा.
हर पंचायत में करीब 10 योजनाओं का चयन
अभियान के तहत प्रत्येक ग्राम पंचायत में प्राथमिकता के आधार पर करीब 10 योजनाओं का चयन किया जाएगा. इसमें स्कूलों के सुदृढ़ीकरण, उन्नयन और नव निर्माण से जुड़े कार्य शामिल होंगे.
चयनित योजनाओं को 17 सितंबर 2026 को होने वाली विशेष ग्रामसभा में अनुमोदित कराया जाएगा. इसके बाद 24 सितंबर तक निर्धारित पोर्टल पर योजनाओं की प्रविष्टि करनी होगी.
जमीन की जांच के बाद ही निर्माण योजना
नई भवन या अन्य निर्माण से जुड़ी योजना का चयन करने से पहले जमीन की उपलब्धता और उसके विवादमुक्त होने की जांच करना अनिवार्य होगा. इसके लिए संबंधित अंचल अधिकारी से भूमि उपलब्धता का प्रमाण पत्र लिया जाएगा.
इस प्रक्रिया का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि स्वीकृत निर्माण योजनाओं के क्रियान्वयन के दौरान जमीन को लेकर किसी तरह की समस्या सामने नहीं आए.
डीईओ करेंगे योजनाओं की लगातार निगरानी
अभियान की निगरानी के लिए जिला स्तर पर गठित अनुश्रवण समिति में जिला शिक्षा पदाधिकारी को भी सदस्य बनाया गया है. डीईओ विद्यालयों से जुड़ी योजनाओं के क्रियान्वयन और प्रगति की लगातार समीक्षा करेंगे.
प्रशासन का जोर केवल योजनाओं को समय पर पूरा कराने पर ही नहीं, बल्कि निर्माण और मरम्मत कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने पर भी रहेगा. अभियान के जरिए सरकारी विद्यालयों में विद्यार्थियों के लिए बेहतर और जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने की कोशिश की जा रही है.
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