बैग सिर पर, साइकिल कंधे पर और सामने घुटनेभर पानी, ऐसे स्कूल पहुंचते हैं वाल्मीकिनगर के बच्चे

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कीचड़ पार करते बच्चे

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वाल्मीकिनगर में बाढ़ के बाद ग्रामीण क्षेत्रों में बच्चों की शिक्षा बुरी तरह प्रभावित हो रही है. कीचड़ और जलभराव के कारण तीन किलोमीटर दूर स्कूल जाना बच्चों के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है. कई बच्चे जोखिम उठाकर स्कूल पहुंचने को मजबूर हैं.

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Valmikinagar News: वाल्मीकिनगर. गंडक नदी के किनारे बसे लक्ष्मीपुर-रमपुरवा पंचायत के झंडू टोला, बीन टोली, कान्ही टोला और चकदहवा में बाढ़ का पानी उतरने के बाद भी ग्रामीणों की मुश्किलें खत्म नहीं होतीं. सबसे अधिक असर बच्चों की पढ़ाई पर पड़ता है. रास्ते में जमा पानी, कीचड़ और दलदल के कारण करीब तीन किलोमीटर दूर रोहुआ टोला स्थित प्राथमिक विद्यालय पहुंचना बच्चों के लिए चुनौती बन जाता है. कई बच्चे बैग सिर पर रखकर और साइकिल कंधे पर टांगकर रास्ता पार करते हैं.

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बाढ़ के बाद बच्चों की पढ़ाई पर पड़ता है असर

ग्रामीणों के अनुसार बाढ़ प्रभावित इलाकों में अगस्त से अक्टूबर तक रास्ता बाधित रहने के कारण पठन-पाठन प्रभावित रहता है. इस दौरान शिक्षकों को दूसरे विद्यालयों में शिफ्ट कर दिया जाता है. विद्यालय के मर्ज होने के बाद बच्चों को भी रोहुआ टोला स्थित विद्यालय जाना पड़ता है. दुर्गम रास्ते के कारण बड़ी संख्या में बच्चे नियमित स्कूल नहीं पहुंच पाते.

110 बच्चों में सिर्फ 15-20 ही पहुंचते हैं स्कूल

बाढ़ प्रभावित क्षेत्र के विद्यालय में करीब 110 बच्चे नामांकित हैं और चार शिक्षक कार्यरत हैं. ग्रामीणों का कहना है कि रास्ते की खराब स्थिति के कारण इनमें महज 15 से 20 बच्चे ही नियमित रूप से रोहुआ टोला स्थित विद्यालय पहुंच पाते हैं. शेष बच्चों की पढ़ाई करीब तीन माह तक प्रभावित होती है. इससे बच्चों की शिक्षा पर सीधा असर पड़ रहा है.

घुटनेभर पानी और दलदल से होकर गुजरते हैं बच्चे

स्कूल जाने वाले बच्चों को रास्ते में जमा पानी और कीचड़ से होकर गुजरना पड़ता है. कई जगह पानी घुटनेभर तक रहता है. दलदली रास्ते पर साइकिल लेकर चलना मुश्किल होता है. ऐसे में बच्चे कई बार साइकिल कंधे पर टांगकर और स्कूल बैग सिर पर रखकर रास्ता पार करते हैं. बरसात के दिनों में यह समस्या और गंभीर हो जाती है.

छह दशक से सड़क और बिजली का इंतजार

झंडू टोला, बीन टोली, कान्ही टोला और चकदहवा के ग्रामीणों का कहना है कि वे करीब 50-60 वर्षों से सड़क, बिजली और पक्के आवास जैसी बुनियादी सुविधाओं की प्रतीक्षा कर रहे हैं. झंडू टोला निवासी राजू राम, लालजी राम, बुधन बीन और बसंत बीन तथा चकदहवा के संजय खटीक, शिवजी कुमार और पूर्व बीडीसी गुलाब अंसारी ने कहा कि सड़क के अभाव में बच्चों की शिक्षा सबसे ज्यादा प्रभावित हो रही है.

प्रशासन से स्थायी समाधान की मांग

मुखिया मालती देवी ने कहा कि वर्षों से जिला प्रशासन, सांसद और विधायक के समक्ष ग्रामीणों की समस्याएं रखी जाती रही हैं. इसके बावजूद चारों गांवों की स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ है. ग्रामीणों ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में सड़क समेत अन्य बुनियादी सुविधाओं की स्थायी व्यवस्था कराने की मांग की है, ताकि बच्चों की पढ़ाई बाधित न हो और लोगों का आवागमन सुगम हो सके.


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