बेतिया: खेत में ज्यादा यूरिया डालने से पहले सोचिए! वैज्ञानिक ने बताया कैसे घटेगी लागत और बढ़ेगा उत्पादन
कृषि विज्ञान केंद्र ने किसानों को समेकित पोषक तत्व प्रबंधन का महत्व समझाया. जानें कैसे मिट्टी की सेहत सुधारकर, संतुलित खाद का प्रयोग करके खेती की लागत कम की जा सकती है और उत्पादन बढ़ाया जा सकता है.
Bettiah News: कृषि विज्ञान केंद्र माधोपुर में समेकित पोषक तत्व प्रबंधन पर आयोजित 15 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का गुरुवार को समापन हुआ. समारोह में कृषि विज्ञान केंद्र नरकटियागंज के वरीय वैज्ञानिक एवं प्रधान डॉ. आरपी सिंह, नाबार्ड के जिला विकास प्रबंधक कामेश्वर सिंह और अग्रणी जिला प्रबंधक राजेंद्र कुमार पांडेय मौजूद रहे. प्रशिक्षण के दौरान किसानों को मिट्टी की सेहत बनाए रखने, संतुलित खाद के इस्तेमाल और खेती की लागत कम करने के तरीके बताए गये. वैज्ञानिकों ने कहा कि केवल अधिक यूरिया और डीएपी डालने से उत्पादन बढ़ने की गारंटी नहीं है, बल्कि फसल के लिए मिट्टी में पोषक तत्वों का संतुलन जरूरी है.
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Majhaulia News: ज्यादा यूरिया-डीएपी से नहीं बढ़ेगा उत्पादन
मुख्य अतिथि डॉ. आरपी सिंह ने कहा कि अधिक मात्रा में यूरिया और डीएपी का इस्तेमाल अधिक उत्पादन की गारंटी नहीं है. मिट्टी को भी संतुलित पोषण की आवश्यकता होती है.
उन्होंने किसानों से जैविक खाद, रासायनिक उर्वरक और जैव उर्वरकों का संतुलित इस्तेमाल करने की अपील की, ताकि मिट्टी की उर्वरता लंबे समय तक बनी रहे.
मिट्टी जांच के बाद ही खाद डालने की सलाह
कृषि वैज्ञानिक ने किसानों को मृदा परीक्षण के आधार पर खाद का इस्तेमाल करने की सलाह दी. उन्होंने नीम लेपित यूरिया अपनाने और खेतों में पराली नहीं जलाने की अपील की.
वैज्ञानिकों के अनुसार मिट्टी की जरूरत को समझकर खाद का इस्तेमाल करने से अनावश्यक खर्च को कम किया जा सकता है और फसल उत्पादन को बेहतर बनाया जा सकता है.
आईएनएम से लागत घटाने पर जोर
केंद्र के वरीय वैज्ञानिक एवं प्रधान डॉ. अभिषेक प्रताप सिंह ने कहा कि समेकित पोषक तत्व प्रबंधन यानी आईएनएम किसानों की सोच और खेती के तौर-तरीकों में बदलाव की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है.
उन्होंने कहा कि संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन अपनाने से खेती की लागत कम करने के साथ उत्पादन में वृद्धि की संभावना है. इसके लिए किसानों को आधुनिक और वैज्ञानिक तरीके अपनाने की जरूरत है.
हर प्रशिक्षणार्थी 10 किसानों को करेगा जागरूक
फसल उत्पादन वैज्ञानिक डॉ. हर्षा बीआर ने प्रशिक्षणार्थियों से कहा कि वे केवल खुद तक जानकारी सीमित न रखें. प्रत्येक प्रशिक्षणार्थी कम से कम 10 किसानों को मिट्टी जांच, गोबर के उपयोग और वर्मी कंपोस्ट के फायदे के बारे में जागरूक करे.
उन्होंने कहा कि किसानों तक वैज्ञानिक जानकारी पहुंचने से खेती में अनावश्यक रासायनिक उर्वरकों के इस्तेमाल को कम किया जा सकता है.
प्रशिक्षणार्थियों को मिला प्रमाण-पत्र
15 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान किसानों को समेकित पोषक तत्व प्रबंधन से जुड़ी विभिन्न जानकारियां दी गयीं. कार्यक्रम के समापन पर सभी प्रशिक्षणार्थियों को प्रमाण-पत्र वितरित किये गये.
प्रशिक्षण के दौरान किसानों को मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने के साथ कम लागत में बेहतर उत्पादन हासिल करने के लिए वैज्ञानिक तरीकों को अपनाने पर जोर दिया गया.
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