बीहट के मल्हीपुर गोलंबर पर श्रीबाबू की आदमकद प्रतिमा लगाने की मांग तेज
डीएम से मिलते प्रतिनिधिमंडल | Prabhat Khabar Network
Begusarai News : बेगूसराय के मल्हीपुर सिक्स-लेन गोलंबर पर बिहार केसरी डॉ. श्रीकृष्ण सिन्हा की आदमकद कांस्य प्रतिमा स्थापित करने की मांग तेज, जिलाधिकारी को सौंपा ज्ञापन.
Begusarai News : बिहार की औद्योगिक राजधानी बेगूसराय के बीहट नगर परिषद स्थित मल्हीपुर सिक्स-लेन गोलंबर पर अखंड बिहार के प्रथम मुख्यमंत्री, महान स्वतंत्रता सेनानी और संविधान सभा के सदस्य ‘बिहार केसरी’ डॉ. श्रीकृष्ण सिन्हा (श्रीबाबू) की भव्य आदमकद कांस्य प्रतिमा स्थापित करने की मांग जोर पकड़ने लगी है. इस संबंध में ‘बिहार केसरी श्रीबाबू प्रतिमा निर्माण समिति’ के प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा है. समिति ने मांग की है कि इस ऐतिहासिक स्थल को केवल प्रतिमा स्थापना तक सीमित न रखकर ‘स्टैच्यू ऑफ डेवलपमेंट’ और ‘प्रेरणा स्थल’ के रूप में विकसित किया जाए.
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बेगूसराय के प्रवेश द्वार पर प्रतिमा लगाने की मांग
प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी से मुलाकात के दौरान बताया कि मल्हीपुर गोलंबर सिक्स-लेन पुल और ऐतिहासिक राजेंद्र सेतु के मुहाने पर स्थित होने के कारण बेगूसराय का प्रमुख प्रवेश द्वार है. ऐसे महत्वपूर्ण स्थल पर श्रीबाबू की आदमकद प्रतिमा स्थापित करना उनके प्रति सम्मान के साथ-साथ बेगूसराय की औद्योगिक चेतना और विकास यात्रा का प्रतीक भी बनेगा. जिलाधिकारी ने मांग को गंभीरता से सुनते हुए संबंधित विभाग से पत्राचार कर सकारात्मक पहल का आश्वासन दिया.
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विकास और सामाजिक न्याय के शिल्पी थे श्रीबाबू
समिति के संयोजक और पूर्व डिप्टी मेयर राजीव रंजन ने कहा कि श्रीबाबू ने स्वतंत्रता आंदोलन की राजनीतिक चेतना को शिक्षा, उद्योग, कृषि और आधारभूत संरचना से जोड़ा. बेगूसराय की औद्योगिक पहचान के पीछे उनकी दूरगामी सोच रही है. उन्होंने कहा कि श्रीबाबू की प्रतिमा स्थापित करना किसी जाति या दल का विषय नहीं, बल्कि बिहार के राष्ट्रनिर्माण की विरासत को सम्मान देने का विषय है.
65 वर्षों बाद भी प्रतिमा नहीं होना आत्ममंथन का विषय
पूर्व उप-मुख्य पार्षद जवाहर भारद्वाज ने कहा कि श्रीबाबू के निधन के 65 वर्षों बाद भी उनकी कर्मभूमि के प्रमुख सार्वजनिक स्थल पर प्रतिमा का नहीं होना आत्ममंथन का विषय है. उन्होंने कहा कि स्मारक आने वाली पीढ़ियों को अपने गौरवशाली इतिहास और महापुरुषों के योगदान से जोड़ने का काम करते हैं.
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जाति और राजनीति से परे है श्रीबाबू की विरासत
भीम आर्मी के पूर्व जिलाध्यक्ष और अधिवक्ता विकास कुमार आजाद ने कहा कि श्रीबाबू की विरासत को संकीर्ण जातीय या राजनीतिक चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि श्रीबाबू सामाजिक समानता के पक्षधर थे. उन्होंने बाबाधाम देवघर में समाज के अंतिम व्यक्ति को मंदिर में प्रवेश का अधिकार दिलाया और विरोध के बावजूद देश में सबसे पहले जमींदारी उन्मूलन कानून लागू किया.
औद्योगिक विकास के स्वप्नद्रष्टा को उचित सम्मान की मांग
गढ़पुरा नमक सत्याग्रह गौरव यात्रा समिति के महासचिव राजीव कुमार ने कहा कि गढ़पुरा की ऐतिहासिक धरती और बेगूसराय के औद्योगिक विकास के स्वप्नद्रष्टा श्रीबाबू को उचित सम्मान मिलना चाहिए. इस दौरान समिति के कोषाध्यक्ष जयंत कुमार पासवान सहित अन्य सदस्य उपस्थित थे.
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