बांका रेल रुट भी है असुरक्षित, यात्री परेशान

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बांका: नक्सल प्रभावित जिला होने के कारण यहां के रेल रूट भी असुरक्षित है. क्योंकि इस रूट पर सुरक्षा के नाम पर वैसी कोई व्यवस्था नहीं है जिससे की यात्री अपने आप को सुरक्षित महसूस कर सके और नक्सलियों का किसी प्रकार का भय ना हो. हालांकि बांका से भागलपुर तक के रेल रूट में […]

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बांका: नक्सल प्रभावित जिला होने के कारण यहां के रेल रूट भी असुरक्षित है. क्योंकि इस रूट पर सुरक्षा के नाम पर वैसी कोई व्यवस्था नहीं है जिससे की यात्री अपने आप को सुरक्षित महसूस कर सके और नक्सलियों का किसी प्रकार का भय ना हो. हालांकि बांका से भागलपुर तक के रेल रूट में नक्सल प्रभावित इलाका नहीं पड़ता है लेकिन हसडीहा से भागलपुर व चांदन से देवघर के बीच नक्सल प्रभावित इलाका जरूर पड़ता है. दो-दो रूट नक्सल प्रभावित होने पर भी रेलवे के द्वारा पूरी सुरक्षा मुहैया नहीं करायी गयी है. बांका-भागलपुर रूट पर इंटरसिटी व सवारी गाड़ी, चांदन-देवघर रूट पर सवारी गाड़ी के साथ-साथ हसडीहा से भागलपुर के बीच सवारी गाड़ी चलती है. दिन में चलने वाली गाड़ी पर कोई वारदात की आशंका नहीं के बराबर रहती है. लेकिन रात में चलने वाली ट्रेनों पर यह आशंका सिर चढ़ कर बोलते रहता है.

हालांकि ट्रेन पर स्कॉर्ट पार्टी के रुप में जीआरपी के जबान रहते है. लेकिन ट्रेन के जाने के बाद स्टेशन पूरी तरह असुरक्षित हो जाता है. बांका स्टेशन पर आरपीएफ के दो जवान ही रहते है. मालूम हो कि नक्सलियों ने शनिवार की शाम जमालपुर के करीब दानापुर इंटरसिटी ट्रेन पर हमला कर राइफल लूटने के दौरान तीन पुलिसकर्मियों को शहीद कर दिये.

भगवान भरोसे हैं रेलयात्र

बांका. शनिवार की घटना के बाद शाम को भागलपुर पहुंची सवारी गाड़ी से यात्र कर आये यात्री ने बताया कि भगवान भरोसे इस ट्रेन से यात्र करना पड़ता है. विजय नगर के संजय ने बताया कि इस ट्रेन से यात्र करना किसी भी दिन महंगा पड़ सकता है. वहीं बाबूटोला के विकास कुमार ने बताया कि एक तो रेल रूट की सुरक्षा नहीं होती तो दूसरी ओर ट्रेन पर साथ चलने वाले स्कॉर्ट पार्टी एक डब्बे में बंद हो जाते है. वहीं जितेंद्र कुमार ने बताया कि इस ट्रेन की चेन पुलिंग इतनी होती है कि कभी भी कोई कहीं चढ़ सकता है.

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