ओपीडी में भीड़ देख लौट रहे मरीज

Published at :13 May 2016 8:07 AM (IST)
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ओपीडी में भीड़ देख लौट रहे मरीज

औरंगाबाद (सदर) : सदर अस्पताल में औरंगाबाद शहर समेत जिले के प्रखंड क्षेत्रों से भी मरीज आते हैं, लेकिन अस्पताल में स्वास्थ्य सुविधाएं ठीक नहीं होने के कारण मरीजों को उलटे पांव वापस लौटना पड़ रहा है. दरअसल उन्हें अपनी जान की चिंता सताती रहती है. भले ही मरीज कितना भी बीमार क्यों न हो, […]

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औरंगाबाद (सदर) : सदर अस्पताल में औरंगाबाद शहर समेत जिले के प्रखंड क्षेत्रों से भी मरीज आते हैं, लेकिन अस्पताल में स्वास्थ्य सुविधाएं ठीक नहीं होने के कारण मरीजों को उलटे पांव वापस लौटना पड़ रहा है. दरअसल उन्हें अपनी जान की चिंता सताती रहती है. भले ही मरीज कितना भी बीमार क्यों न हो, वह कभी भी नहीं चाहेगा कि उसका इलाज कोई दूसरी बीमारी के डॉक्टर करे. लेकिन, सदर अस्पताल के ओपीडी की इन दिनों की यही स्थिति है. यहां चिकित्सकों के अभाव में सिविल सर्जन के आदेश पर एक दंत चिकित्सक सामान्य रोगों के मरीजों का इलाज कर रहे हैं.
गुरुवार को ओपीडी में तीन चिकित्सक उपस्थित थे. चिकित्सकों की दो कुरसियां खाली थीं. पूछने पर पता चला कि दो चिकित्सक छुट्टी पर हैं. ऐसे में ओपीडी मौजूद चिकित्सक ही इमरजेंसी सेवा व आपातकालीन सेवाओं को देख रहे हैं. ओपीडी में भारी भीड़ देख कर कई मरीज व उनके परिजन उलटे पांव लौट गये.
इस संदर्भ में जब सीएस डॉ आरपी सिंह से पूछा जाता है, तो उनका जवाब होता है कि सदर अस्पताल में व्यवस्था ठीक-ठाक है. बस आप जैसे लोग (मीडियाकर्मी) परेशान करते हैं. मरीजों का इलाज हो रहा है और वे संतुष्ट भी हैं.
बीमारी जाने बिना ही लिख रहे थे दवा
ओपीडी में गुरुवार को देखा गया कि भीड़ के कारण चिकित्सक मरीजों का इलाज ठीक से नहीं कर पा रहे थे. एक मरीज की बीमारी जाने बिना ही उनके पुरजे पर दवाओं का नाम लिख रहे थे. इस बीच अगर किसी दूसरे मरीज ने पुरजा चिकित्सक के आगे बढ़ा दिया, तो उसके पुरजे को भी अपने रजिस्टर में अंकित कर फट से दवा व टेस्ट का नाम लिख दे रहे थे. इस व्यवस्था पर कई मरीजों ने नाराजगी जतायी, तो कई मरीज बिना इलाजकराये ही वापस लौट गये. इस दौरान कई मरीज व उनके परिजनों से पूछ गया, तो उन्हों ने इस व्यवस्था पर नाराजगी जतायी
सीएस को मरीजों की जान की फिक्र नहीं
सदर अस्पताल की चिकित्सा व्यवस्था पर यकीन नहीं किया जा सकता. यहां चिकित्सक लापरवाहीपूर्वक मरीजों का इलाज करते हैं. जिन चिकित्सकों को सामान्य चिकित्सा की जानकारी नहीं है, उन्हें भी ओपीडी में सीएस ने बैठा दिया है. वे मरीजों का कैसे इलाज करेंगे.
रामध्यान सिंह ,औरंगाबाद
चिकित्सकों की कमी के कारण मरीजों की काफी भीड़ रह रही है. दो दिन से इलाज कराये बिना वापस लौट रहा हूं. आज भी मैं इलाज के लिए सदर अस्पताल आया था, लेकिन यहां देखा कि जिनसे पहले दांत का इलाज करा चुका हूं, वे आज ओपीडी में मरीजों का इलाज कर रहे हैं.
सौरभ कुमार ,औरंगाबाद
चार घंटे के इंतजार के बाद मेरे मरीज का नंबर आया. चिकित्सक ने मरीज का नब्ज तक नहीं पकड़ा और सीधे रेफर कर दिया. न बीमारी बतायी, न उसका इलाज. ऐसे में इस चिकित्सकीय व्यवस्था पर कैसे यकीन किया जाये. ऐसा लगता है कि सिविल सर्जन को मरीजों की जान की फिक्र नहीं.
अरविंद सिंह, माली
बड़ी उम्मीद लेकर मदनपुर से इलाज के लिए आया था, लेकिन यहां पर कोई व्यवस्था ही नहीं दिखी. तीन चिकित्सकों के भरोसे सैकड़ों मरीज कतार में खड़े थे. पुरजा कटाने की भी हिम्मत नहीं हुई. प्राइवेट क्लिनिक में ही जाकर अपना इलाज कराउंगा.
अशोक कुमार,मदनपुर
सदर अस्पताल में खांसी, सर्दी व बुखार को छोड़ कर कोई दूसरा इलाज संभव नहीं है. यहां तो मरीजों की भारी भीड़ झेल-झेल कर जैसे चिकित्सक ही बीमार बन गये हैं. बीमारियों को जाने बिना ही जल्दीबाजी में इलाज किया जाता है.
प्रकाश सिन्हा, क्लब रोड
बीमारी बताने पर चिकित्सक झल्ला जाते हैं. वे बीमारी सुनना ही नहीं चाहते. जल्दी-जल्दी में पूरजे पर बस दवा व टेस्ट के नाम लिखते हैं और मरीजों को चलता कर देते हैं. ऐसे इलाज पर मरीज कैसे भरोसा कर सकते हैं. सीएस का ध्यान सदर अस्पताल की व्यवस्था पर बिल्कुल नहीं है.
विजय कुमार सिंह, करमा रोड
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