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न निबंधन, न कोई नंबर, फिर भी सड़कों पर दौड़ रही जुगाड़ गाड़ी

Updated at : 19 Dec 2019 1:23 AM (IST)
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न निबंधन, न कोई नंबर, फिर भी सड़कों पर दौड़ रही जुगाड़ गाड़ी

अरवल : शहर के सड़कों पर फर्राटे से जुगाड़ गाड़ी दौड़ रहा है. जिले के अन्य बाजारों में भी इस तरह के वाहन चलते हैं. गांवों में सामान आदि ढोने के काम में इनका प्रयोग खूब हो रहा है. लोग भी इसे खूब पसंद कर रहे हैं. कारण जहां यह आसानी से उपलब्ध हो जा […]

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अरवल : शहर के सड़कों पर फर्राटे से जुगाड़ गाड़ी दौड़ रहा है. जिले के अन्य बाजारों में भी इस तरह के वाहन चलते हैं. गांवों में सामान आदि ढोने के काम में इनका प्रयोग खूब हो रहा है.

लोग भी इसे खूब पसंद कर रहे हैं. कारण जहां यह आसानी से उपलब्ध हो जा रहा है वहीं कोई खर्च भी कम है. सड़क पर बेधड़क दौड़ते जुगाड़ गाड़ियों के स्वामियों को न तो किसी रजिस्ट्रेशन व टैक्स की चिंता होती है न तो पकड़े जाने का खौफ.
परिवहन विभाग के लिए भी एक चुनौती ही है कि वह इनका रजिस्ट्रेशन भी किस वाहन के रूप में करेंगे. वहीं सुप्रीम कोर्ट ने जुगाड़ गाड़ी के परिचालन पर पूरी तरह रोक लगाने का आदेश दिया गया था. बावजूद न तो इस पर रोक लगायी गयी और न ही प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा जुगाड़ गाड़ी के चालकों के विरूद्ध कोई ठोस कार्रवाई ही की गयी है.
माल ढुलाई का साधन बन गया है जुगाड़ गाड़ी : माल ढुलाई का यह एक अब प्रमुख वाहन बन गया है. प्रशासन भी अपनी आंखों से सड़कों पर इसे चलता हुआ देख रहा है. लेकिन अभी तक इस पर रोक क्यों नहीं लगायी जा रही है.
जिले के कई ग्रामीण इलाकों में लोकल ट्रांसपोर्ट की भारी कमी के बीच जुगाड़ गाड़ी फर्राटे से दौड़ रही है और गरीबों के रोजमर्रा के जीवन की राह को आसान तो बना रही है, पर इसके साथ ही वह ट्रैफिक नियमों को भी कदम-कदम पर तोड़ रही है और सड़कों पर मौत बन कर फिर रही है. यहां यह बता दें कि इसके चालक के पास न तो कोई लाइसेंस होता है और न ही इस गाड़ी के कोई कागजात आदि ही बनाये जाते हैं.
कैसे बनता है जुगाड़ गाड़ी : एक साधारण पंप सेट से ही इसका निर्माण कर दिया जाता है. कबाड़ी बाजार से पंपिंग मशीन, पुरानी मोटरसाइकिल, स्कूटर, ऑटो रिक्शा और आटा चक्की के पुराने पुर्जों को खरीद कर जोड़-तोड़ कर जुगाड़ गाड़ी तैयार की जाती है. इसे बनाने में 10 से 12 हजार रूपए तक खर्च आता है.
तिपहिया ठेला गाड़ी में कल-पुर्जा लगा कर जुगाड़ गाड़ी बना ली जाती है. कोई भी मोटरसाइकिल, स्कूटर या ऑटो रिक्शा मैकेनिक उसे आसानी से तैयार कर देता है. वहीं डीटीओ केके त्रिपाठी ने बताया की अभी तो देखा नहीं गया है. अगर किसी को जुगाड़ गाड़ी से माल ले जाते हुए देखा जाता है तो उसकी गाड़ी को सीज की जाती है.
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