भोजपुर: तरारी में बदहाल सरकारी स्कूल; घुटने भर पानी में चलकर विद्यालय आने को मजबूर बच्चे, दो कमरों में पांच कक्षाएं
घुटने भर पानी पार कर पढ़ने जाते छात्र | Prabhat Khabar Network
भोजपुर जिले के तरारी प्रखंड में सरकारी स्कूलों की दयनीय स्थिति सामने आई है. न्यू प्राथमिक विद्यालय बड़ाढ़ी टोला में घुटने भर पानी और गंदगी के बीच 71 बच्चे केवल दो कमरों में पढ़ रहे हैं. मध्य विद्यालय कुसम्ही में छत से पानी टपकता है और बच्चों को बरामदे में बैठने को मजबूर होना पड़ता है.
Arrah News: भोजपुर जिले के तरारी प्रखंड में सरकारी विद्यालयों की चरमराई बुनियादी सुविधाओं और शैक्षणिक बदहाली को उजागर करने के लिए इंकलाबी नौजवान सभा (RYA) और भाकपा माले द्वारा संयुक्त रूप से 'स्कूल ठीक करो-शिक्षा सुधारो' अभियान चलाया जा रहा है. अभियान के दूसरे दिन जांच टीम ने प्रखंड के न्यू प्राथमिक विद्यालय बड़ाढ़ी टोला और मध्य विद्यालय कुसम्ही का स्थलीय निरीक्षण किया. दोनों विद्यालयों में भवन, शौचालय, जलनिकासी और फर्नीचर की घोर कमी देखकर टीम के सदस्यों ने गहरी चिंता जताई.
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न्यू प्राथमिक विद्यालय बड़ाढ़ी टोला: घुटने भर पानी और गंदगी के बीच पढ़ाई
जांच टीम जब न्यू प्राथमिक विद्यालय बड़ाढ़ी टोला पहुंची, तो वहां की जमीनी हकीकत चौंकाने वाली थी:
- जलजमाव का संकट: विद्यालय परिसर में गहरा गड्ढा होने के कारण बारिश का गंदा पानी घुटने से ऊपर तक भर गया है. मासूम छात्र-छात्राएं इसी गंदे पानी से होकर स्कूल जाने को विवश हैं, जिससे उनके कपड़े भीग जाते हैं और संक्रमण का खतरा बना रहता है.
- दो कमरों में 71 बच्चे: विद्यालय में कुल 71 छात्र नामांकित हैं, लेकिन शिक्षण के लिए मात्र दो कमरे उपलब्ध हैं. एक कमरे में कक्षा 1 से 3 और दूसरे में कक्षा 4 व 5 के बच्चों को ठूंसकर बैठाया जाता है.
- बुनियादी सुविधाओं का अभाव: विद्यालय में न तो पर्याप्त टेबल-बेंच हैं और न ही छात्रों के अनुपात में चालू शौचालय की सुविधा. चारों तरफ गंदगी का अंबार पसरा हुआ है.
मध्य विद्यालय कुसम्ही: छत से टपकता है पानी, बरामदे में चलती हैं कक्षाएं
मध्य विद्यालय कुसम्ही की स्थिति भी बदतर पाई गई. विद्यालय में 258 छात्र नामांकित हैं, लेकिन उनके लिए केवल 4 कमरे उपलब्ध हैं:
- कमरों की कमी: जगह के अभाव में कक्षा 1 से 3 तक के बच्चों को एक साथ एक कमरे में तथा कक्षा 4 व 5 के विद्यार्थियों को दूसरे कमरे में पढ़ाया जाता है. कमरों में जगह न होने पर कई कक्षाओं के बच्चों को खुले बरामदे में जमीन पर बैठकर पढ़ना पड़ता है.
- टपकती छत और अनुपयोगी संसाधन: बारिश के दौरान दो कमरों की छत से पानी टपकता है, जिससे पढ़ाई पूरी तरह बाधित हो जाती है. कमरे के अभाव में सरकार द्वारा भेजे गए कंप्यूटर और खेल सामग्री एक कोने में धूल फांक रहे हैं और बच्चे उनके उपयोग से वंचित हैं. यहां भी शौचालयों की व्यवस्था बेहद अपर्याप्त है.

सरकारी स्कूलों की समस्याओं को नजरअंदाज कर रही सरकार: उपेंद्र भारती
"सरकारी विद्यालयों में पढ़ने वाले अधिकांश बच्चे गरीब, मजदूर और सामान्य परिवारों से आते हैं. सरकार और शिक्षा विभाग की आपराधिक अनदेखी के कारण इन मासूमों का भविष्य अंधकारमय हो रहा है. नामांकन के अनुपात में न तो भवन हैं, न बेंच-डेस्क और न ही जल निकासी का कोई प्रबंध. यदि शिक्षा विभाग ने इन दोनों विद्यालयों की समस्याओं का शीघ्र समाधान नहीं किया, तो हम जनता और अभिभावकों को संगठित कर बड़ा आंदोलन खड़ा करेंगे." — उपेंद्र भारती, राज्य कमेटी सदस्य एवं प्रखंड सचिव, भाकपा माले
दौरे के दौरान इंकलाबी नौजवान सभा एवं भाकपा माले के कई प्रमुख कार्यकर्ता, स्थानीय अभिभावक और ग्रामीण उपस्थित रहे.
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