अररिया: पंचायतों में अब कागजों पर नहीं, मैदान में दिखेंगे खेल क्लब; खेल भवन में हुई अहम बैठक, ग्रामीण प्रतिभाओं को तराशने का बना रोडमैप
बैठक में उपस्थित विभिन्न खेल क्लब के अध्यक्ष | Prabhat Khabar Network
अररिया में ग्राम पंचायतों के खेल क्लबों को सक्रिय करने की कवायद तेज हो गई है. अब ये क्लब कागजों पर नहीं, बल्कि मैदान में दिखेंगे, जिससे ग्रामीण युवाओं को खेल से जुड़ने का मौका मिलेगा. खेल मैदानों के उपयोग और प्रतिभाओं को तराशने पर जोर दिया जा रहा है.
जिले की सुदूरवर्ती ग्राम पंचायतों में गठित खेल क्लबों को कागजी प्रक्रियाओं से बाहर निकालकर धरातल पर सक्रिय करने की कवायद तेज हो गई है. पंचायतों में उपलब्ध खेल मैदानों का समुचित उपयोग सुनिश्चित करने और ग्रामीण युवाओं व बाल प्रतिभाओं को सीधे खेल गतिविधियों से जोड़ने के लिए प्रशासनिक स्तर पर ठोस कदम उठाए जा रहे हैं. इसी कड़ी में अररिया स्थित खेल भवन सभागार में सदर प्रखंड की विभिन्न ग्राम पंचायतों के खेल क्लबों के अध्यक्षों, सचिवों, कोषाध्यक्षों और सदस्यों के साथ एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई, जिसकी अध्यक्षता जिला उपाधीक्षक शारीरिक शिक्षा सान्याल कुमार ने की.
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मैदानों की होगी पहचान, नियमित खेल गतिविधियां अनिवार्य
बैठक में पंचायतों में खेल संस्कृति को पुनर्जीवित करने के लिए स्पष्ट कार्ययोजना पर चर्चा की गई:
- खेल मैदानों का चिह्नीकरण व संरक्षण: प्रत्येक ग्राम पंचायत में उपलब्ध सार्वजनिक खेल मैदानों को चिह्नित कर उन्हें खेलने योग्य बनाया जाएगा, ताकि स्थानीय युवाओं को अभ्यास के लिए भटकना न पड़े.
- कागजी नहीं, सक्रिय भूमिका: शारीरिक शिक्षा उपाधीक्षक ने दो टूक कहा कि खेल क्लब केवल फाइलों और दस्तावेजों तक सीमित नहीं रहेंगे. प्रत्येक क्लब को अपने क्षेत्र में नियमित अभ्यास सत्र और स्थानीय टूर्नामेंट आयोजित करने होंगे.
- क्लब पदाधिकारियों से मांगे सुझाव: बैठक के दौरान क्लबों के अध्यक्षों व सचिवों से धरातल पर आने वाली समस्याओं और संसाधनों की आवश्यकता को लेकर सीधे सुझाव लिए गए.
पंचायत खेल क्लबों के लिए तैयार रोडमैप
ग्रामीण खेल इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए तय किए गए प्रमुख बिंदु:
| कार्ययोजना (Action Plan) | उद्देश्य / विवरण (Objective & Details) |
| प्रतिभा खोज (Scouting) | सुदूर देहात के बच्चों और किशोरों को चिन्हित कर तराशना |
| मैदानों का प्रबंधन | पंचायत स्तर पर उपलब्ध खेल मैदानों का व्यवस्थित रखरखाव |
| प्रतियोगिताएं | पंचायतों के बीच इंटर-क्लब और ब्लॉक स्तरीय खेल स्पर्धाएं |
| उपकरण व संसाधन | क्लबों के माध्यम से खिलाड़ियों को खेल सामग्री उपलब्ध कराना |
| मॉनिटरिंग | जिला खेल कार्यालय द्वारा क्लबों की गतिविधियों की नियमित समीक्षा |
ग्रामीण प्रतिभाओं को राष्ट्रीय पटल पर लाने का लक्ष्य
उपाधीक्षक शारीरिक शिक्षा सान्याल कुमार ने विभागीय दिशा-निर्देशों का हवाला देते हुए क्लबों को सक्रिय करने के दूरगामी फायदे गिनाए:
- अवसरों की कमी होगी दूर: ग्रामीण अंचलों में प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है, लेकिन सही मार्गदर्शन और नियमित प्लेटफॉर्म न मिलने के कारण युवा पीछे रह जाते हैं. क्लबों के सक्रिय होने से उन्हें अभ्यास और प्रतिस्पर्धा का सीधा मंच मिलेगा.
- नशे से दूर, मैदान की ओर: युवाओं को खेलों से जोड़कर उनकी ऊर्जा को सकारात्मक दिशा में लगाने और उन्हें राज्य व राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं के लिए तैयार करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है.
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