प्रशासनिक कार्यों में सरल हिंदी अपनाने की अपील: अररिया में आयोजित विचार गोष्ठी में साहित्यकारों और अधिकारियों ने रखे विचार

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कार्यक्रम में उपस्थित जिलाधिकारी | Prabhat Khabar Network

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अररिया में हिंदी दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित विचार गोष्ठी में जिला पदाधिकारी विनोद दूहन ने सरकारी कामकाज में सरल और प्रभावी हिंदी के प्रयोग की अपील की. उन्होंने कहा कि हिंदी जन-जन की आवाज है और प्रशासनिक कार्यों में इसके उपयोग से जनता से सीधा जुड़ाव बढ़ेगा. इस अवसर पर साहित्यकारों ने भी हिंदी के महत्व पर प्रकाश डाला.

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अररिया समाहरणालय परिसर स्थित परमान सभागार में जिला प्रशासन के तत्वावधान में 'हिंदी दिवस' के उपलक्ष्य में एक गरिमामय विचार गोष्ठी एवं सम्मान कार्यक्रम का आयोजन किया गया. कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला पदाधिकारी (डीएम) विनोद दूहन ने की.

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समारोह में हिंदी भाषा के ऐतिहासिक महत्व, उसकी समृद्ध साहित्यिक व सांस्कृतिक विरासत तथा विशेष रूप से दैनिक प्रशासनिक एवं राजकीय कार्यों में हिंदी के अधिकाधिक, सरल व प्रभावी प्रयोग पर विस्तार से मंथन किया गया.

'हमारी विरासत व जन-जन की आवाज है हिंदी': डीएम विनोद दूहन

जिलेवासियों एवं अधिकारियों को हिंदी दिवस की बधाई देते हुए जिलाधिकारी विनोद दूहन ने प्रशासनिक व्यवस्था में भाषा की भूमिका को रेखांकित किया:

  • प्रशासन और जनता का सीधा जुड़ाव: डीएम ने कहा कि हिंदी केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक पहचान और आमजन के दिलों से जुड़ी भाषा है.
  • सरल और सुगम संवाद: सरकारी योजनाओं, कल्याणकारी नीतियों और सेवाओं का लाभ अंतिम पंक्ति के व्यक्ति तक तभी सुगमता से पहुंचेगा, जब प्रशासनिक पत्राचार और आदेशों में क्लिष्ट शब्दों के स्थान पर सरल, सहज व बोधगम्य हिंदी का प्रयोग होगा.
  • अधिकारियों को आह्वान: उन्होंने सभी विभागीय पदाधिकारियों व कर्मियों से अपील की कि वे अपने दैनिक फाइलों और पत्राचार में हिंदी के प्रयोग को प्राथमिकता दें.

सामाजिक व सांस्कृतिक विविधता को जोड़ने वाली मजबूत कड़ी

कार्यक्रम में उपस्थित वक्ताओं एवं साहित्यकारों ने हिंदी के वैश्विक और राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य पर अपने विचार रखे:

  • साहित्यकारों की सहभागिता: जिले के ख्यातिप्राप्त साहित्यकार रमेश रमण एवं हरिश्चंद्र सिंह ने हिंदी साहित्य के गौरवशाली इतिहास और जनमानस में सामाजिक चेतना जगाने में लेखकों के योगदान को साझा किया.
  • एकता का सूत्र: वक्ताओं ने रेखांकित किया कि भारत की बहुभाषिक और विविध संस्कृति को एक सूत्र में पिरोने का काम हिंदी ने सहजता से किया है. इसके संरक्षण और संवर्धन के लिए निरंतर सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता है.

राजकीय कार्यों में हिंदी के विस्तार का लिया गया संकल्प

कार्यक्रम के दौरान अपर समाहर्ता (आपदा प्रबंधन) सहित जिले के कई वरीय प्रशासनिक अधिकारी व समाहरणालय के कर्मी उपस्थित रहे:

  • सामूहिक प्रतिबद्धता: सभी उपस्थित अधिकारियों व कर्मचारियों ने सरकारी कामकाज को जनोन्मुखी बनाने के लिए हिंदी को अपनी कार्यशैली का मुख्य हिस्सा बनाने की शपथ ली.
  • मंच संचालन: कार्यक्रम का सफल व सारगर्भित मंच संचालन वरिष्ठ उद्घोषक नरसिंह नाथ मंडल ने किया.

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