15 नवंबर से होगी धान की अधिप्राप्ति

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डीसीओ ने जिले के 218 पैक्स अध्यक्षों के साथ बैठक की. वेब पोर्टल पर किसानों के ऑनलाइन निबंधन की प्रक्रिया जारी है ़़ अररिया : धान अधिप्राप्ति, ऋण वसूली, अंकेक्षण कार्य से संबंधित बैठक का आयोजन गुरुवार को जिला सहकारिता कार्यालय व को-ऑपरेटिव बैंक परिसर में किया गया. बैठक में जिले के सभी पैक्स व […]

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डीसीओ ने जिले के 218 पैक्स अध्यक्षों के साथ बैठक की. वेब पोर्टल पर किसानों के ऑनलाइन निबंधन की प्रक्रिया जारी है ़़

अररिया : धान अधिप्राप्ति, ऋण वसूली, अंकेक्षण कार्य से संबंधित बैठक का आयोजन गुरुवार को जिला सहकारिता कार्यालय व को-ऑपरेटिव बैंक परिसर में किया गया. बैठक में जिले के सभी पैक्स व व्यापार मंडल अध्यक्षों को 15 नवंबर से हर हाल में धान अधिप्राप्ति शुरू करने व 18 नवबंर तक 31 मार्च 16 तक के कार्यों का अंकेक्षण कराने का निर्देश डीसीओ कवींद्र नाथ ठाकुर द्वारा दिया गया.
उन्होंने यह भी कहा कि जो पैक्स निर्धारित समय अवधि के दौरान अपने अंकेक्षण कार्य को पूरा नहीं करा लेते हैं उन्हें किसी भी प्रकार की वित्तीय सहायता नहीं मिल पायेगी. साथ ही उन्हें अधिप्राप्ति करने के लिए चयनित भी नहीं किया जायेगा. मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित हुए कृषि प्रबंध शाख समिति के संयुक्त निदेशक ललन शर्मा, प्रबंध निदेशक बीके ठाकुर ने उपस्थित पैक्स अध्यक्ष को केश क्रेडिट के संबंध में आवश्यक निर्देश दिया. बताया गया कि इस बार धान अधिप्राप्ति के लिए निर्धारित लक्ष्य के अनुपात में 40 प्रतिशत तक केश क्रेडिट उपलब्ध कराया जायेगा. इससे पैक्सों द्वारा ज्यादा से ज्यादा किसानों से धान की खरीद की जा सकेगी.
06 से 18 तक करायें अंकेक्षण
जिला अंकेक्षण पदाधिकारी शशि कुमार सिन्हा ने कहा कि पैक्स अध्यक्षों को अपने कार्यों का अंकेक्षण कराना आवश्यक है. इसके लिए जिला मुख्यालय में अंकेक्षण कार्यालय खोल दिये गये हैं. उन्होंने अपना मोबइल नंबर 9431645752 सार्वजनिक करते हुए कहा कि समय कम है और लगभग 150 से ज्यादा पैक्सों का अंकेक्षण कार्य भी पूरा करना है. इसलिए जिन पैक्सों ने अंकेक्षण नहीं कराया है वे निर्धारित समय के अंदर अपने पैक्सों का अंकेक्षण करा ले.
किसानों को भी ऋण उपलब्ध करायें : संयुक्त निदेशक
यह सारी समस्याओं को सुनने के बाद संयुक्त निदेशक ललन शर्मा ने कहा कि यह सही है कि को-ऑपरेटिव बैंकों को बकाये ऋण की वसूली कैसे की जाये इसकी समझ नहीं है. आज तीनों जिला मिलाकर करोड़ों का ऋण बकाया है. लेकिन वसूली नहीं हो पा रही है. इसका खामियाजा बैंक तो भुगत ही रहा है. साथ ही पैक्स अध्यक्ष भी भुगत रहे हैं. उन्होंने पैक्सों के समर्थन में कहा कि अगर आप पैक्सों के माध्यम से ऋण वसूली करना चाहते हैं तो उनके माध्यम से किसानों को ऋण भी उपलब्ध करायें. ऐसी व्यवस्था होने पर ऋण की वसूली भी संभव हो पायेगी. मौके पर व्यापार मंडल अध्यक्ष रामकुमार गुप्ता, पैक्स अध्यक्ष रामवेणी गुप्ता, रमण कुमार वर्मा, भवेश कुमार राय आदि पैक्स अध्यक्षों के अलावा बीसीओ इंद्रकुमार सिन्हा, नीरज कुमार, जनार्दन कुमार आदि मौजूद थे.
ब्याज रहित ऋण आवश्यक
पैक्स संघ के जिलाध्यक्ष रामचंद्र सिंह ने अपने संबोधन में पैक्स व किसानों के हितों की बात कही. उन्होंने कहा कि 10 प्रतिशत किसान नहीं बल्कि शत प्रतिशत किसानों से धान खरीद करने का लक्ष्य निर्धारित किया जाए. इसके अलावा पैक्सों को ब्याज रहित केश क्रेडिट उपलब्ध कराया जाये. इससे पैक्सों की आर्थिक स्थिति में सुधार आयेगा. कई वर्षों से खरीफ फसलों के लिए किसानों को ऋण नहीं दिया जा सका है. ऐसी व्यवस्था हो कि पैक्स के अनुशंसा पर किसानों को ऋण मुहैया कराया जा सका. ऐसे करने के बाद ही पैक्स किसानों के बीच सुदृढ़ हो पायेगा. को-ऑपरेटिव बैंक के अध्यक्ष अली राजा ने कहा कि एसएफसी व सहकारिता बैंक के बीच पैक्स अध्यक्ष पीस रहे हैं. एसएफसी द्वारा पैक्सों को भुगतान करने में लेटलतीफी बरती जाती है. इसका परिणाम यह होता है कि पैक्स अध्यक्षों को 50 से 70 हजार का ब्याज एसएफसी को भुगतान करना पड़ा है. यह व्यवस्था बंद होनी चाहिए.
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