पटना ब्वॉय की स्मार्ट एंड्रायड वॉच

By Prabhat Khabar Digital Desk
Updated Date

अंगरेजी में एक कहावत है ‘सक्सेस इज प्रोग्रेसिव रियलाइजेशन ऑफ वर्थी गोल’ यानी निरंतर अच्छे लक्ष्य की अनुभूति ही कामयाबी की बुनियाद है. इसे ही सिद्धांत वत्स ने अपनी जिंदगी का फलसफा बनाया और महज 19 साल की उम्र में कामयाबी की नयी इबारत लिख डाली. उन्होंने अपने सहयोगियों के साथ मिल कर दुनिया की पहली एंड्रायड स्मार्ट वॉच कंपनी की नींव रखी..

दिल में कुछ अलग करने की चाह और खुद पर यकीन हो, तो आपको आगे बढ़ने से कोई नहीं रोक सकता. सिद्धांत वत्स ने इस बात को बखूबी हकीकत में बदला है. किसी ने भी नहीं सोचा था कि पटना के रहनेवाले इस युवा के दिमाग की उपज एंड्रायड वॉच एक दिन दुनिया के 110 देशों में पहुंच जायेगी. इतना ही नहीं, सिद्धांत की यह वॉच ग्राहकों द्वारा इतनी पसंद की जायेगी कि उन्हें इसका नया वजर्न भी दुनिया के सामने लाना पड़ेगा, जिसे वे जल्द ही लांच करनेवाले हैं.

तैयार किया एंड्रायडली सिस्टम
सिद्धांत वत्स ने अपने सहयोगी अपूर्व सुकांत व दो अन्य साथियों की मदद से एंड्रायडली सिस्टम की बुनियाद रखी. 17 साल की उम्र में सिद्धांत ने कड़ी मेहनत से दुनिया के पहले एंड्रायड स्मार्ट वॉच के सपने को वास्तविकता में बदला और इसका नाम एंड्रायडली रखा. एंड्रायड स्मार्ट वॉच की खूबी है कि इससे आप कॉल करने के साथ -साथ इंटरनेट ब्राउजिंग और व्हाट्सएप्प का भी इस्तेमाल कर सकते हैं. फोटो खींचने और म्यूजिक का आनंद लेने के लिए दी गयी सुविधा इसे और भी खास बना देती है. इसमें एक प्रकार से फोन की सभी सुविधाएं मौजूद हैं.

हाइस्कूल ड्रॉप आउट सिद्धांत
सिद्धांत वत्स से बातचीत करके हर कोई मंत्रमुग्ध हो सकता है. तकनीकी मुद्दे पर तो सिद्धांत का कोई जवाब ही नहीं, लेकिन यह भी सच है कि सिद्धांत की पढ़ाई हाइस्कूल तक भी नहीं हुई है. सिद्धांत का खुद भी मानना है कि पढ़ाई छोड़ने की बात पर मम्मी-पापा लगभग सदमे में आ गये थे और आज भी पढ़ाई के लिए दबाव बनाते हैं. इन सबके बावजूद सिद्धांत के अंदर अपने सपनों को साकार करने की जबरदस्त ललक है.

सपना देखना है जरूरी
सिद्धांत वत्स का मानना है कि कामयाबी की सही मायने में शुरुआत सपने देखने के साथ ही होती है. सपने ही आगे बढ़ने कि लिए प्रोत्साहित करते हैं. सपने ही हैं, जो सिद्धांत को अपनी उम्र के साथियों से काफी आगे ले गये और एक सफल एंटरप्रेन्योर बना दिया. सिद्धांत का मानना है कि यदि आप अपने सपनों से प्यार करते हैं और उनके पीछे भागते रहते हैं, तो बॉलीवुड की फिल्मों की तरह अंत में सब कुछ अच्छा हो जाता है. यही कारण है कि सिद्धांत जब आठवीं में थे, तब उन्होंने एक एनजीओ की शुरुआत की. उन्होंने कभी भी खुद को नियमों के बंधन में नहीं बांधा. जो भी चाहा और जो भी अच्छा लगा, वही किया.

एनजीओ के काम से मिली प्रेरणा
सिद्धांत वत्स ने बहुत कम उम्र में अपनी मां की एनजीओ ‘फलक फाउंडेशन’ के लिए काम करना शुरू कर दिया था. सातवीं कक्षा में ही सिद्धांत ने शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक मूल्यों के प्रति लोगों को जागरूक करना शुरू कर दिया था. कंप्यूटर की बेसिक जानकारी, अंगरेजी और मैथ्स आदि बच्चों को पढ़ाना शुरू कर दिया था. कुछ दिनों बाद एनजीओ के माध्यम से वे रक्तदान और हेल्थ चेकअप कैंप में भी सक्रिय हो गये. सिद्धांत के मुताबिक एनजीओ के माध्यम से बोधगया में वर्जीनिया (यूएसए) की एक संस्था की मदद से अंतरराष्ट्रीय स्तर का पर्यटन हब बनाने में कामयाबी हासिल की. इसमें काफी विदेशी निवेश भी हुआ. सिद्धांत टेडएक्स, होरासिस, बिजनेस मीट जैसे सौ से अधिक कॉन्फ्रेंस में वक्ता के रूप में शामिल हो चुके हैं.

चुनौतियां को सकारात्मकता से लें
सिद्धांत का मानना है कि किसी एक चीज को ज्यादा दिन तक इंज्वाय नहीं किया जा सकता है. खुद को समय और बदलते ट्रेंड के साथ अपडेट रखना बहुत बड़ी कला है. यही स्पिरिट आगे बढ़ने के लिए रास्ता तैयार करती है. मैं अपने सपनों का पीछा करना चाहता हूं. मैं वह सब कुछ करना चाहता हूं, जो भी मेरे दिमाग में आता है. मुङो कोई वस्तु या इंसान प्रेरित नहीं करता. मैं कुछ अलग करना चाहता हूं और सकारात्मक सोच साकार करने के लिए हर वक्त तैयार रहता हूं. इसके लिए मेरे ुपास पर्याप्त समय होता है.

क्या कहेंगे लोग, इस डर से आगे बढ़ें
सिद्धांत का मानना है कि हिंदुस्तान में परिवार, पड़ोसी और दोस्त ही सबसे बड़ी चुनौती हैं, जो केवल हतोत्साहित करते हैं. वे केवल यह बता सकते हैं कि यह आइडिया सही नहीं है. आपको छोड़ कर, यहां तक कि आप की टीम के सदस्य भी ऐसे तमाम कारण बतायेंगे. लेकिन, कोई यह नहीं बतायेगा कि काम बेहतर कैसे हो सकता है. खुद पर भरोसा ही सबसे बड़ी चीज है. सिद्धांत का कहना है कि इन सबके अलावा मैं और कुछ नहीं जानता. अचानक ही मेरे दिमाग में कोई आइडिया आ जाता है और मैं काम शुरू कर देता हूं.

रंग लायी मेहनत
सिद्धांत ने माइक्रोप्रोसेसर को छोटे-से-छोटे रूप में बनाया, जिससे कि वह छोटे मदरबोर्ड पर फिट हो सके. इस काम के लिए उन्होंने लगातार दो साल तक कड़ी मेहनत की. सिद्धांत के अनुसार आप इस छोटे-से डिवाइस से सभी एंड्रायड फंक्शन का इस्तेमाल कर सकते हैं और इसका लुक भी स्मार्ट है. यह एक प्रकार से आपकी कलाई में टेबलेट कंप्यूटर और फोन की तरह है. इसकी स्क्रीन पर आप मेल देखने और कॉल करने का काम बेहद आसानी से कर सकते हैं. स्पीकर फोन और ब्लू-टूथ जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध हैं. अगर आप ड्राइविंग कर रहे हैं, तो आपको पॉकेट तक जाने की जरूरत नहीं है, क्योंकि फोन तो आपकी कलाई में है.

क्या है संरचना: एंड्रायडली वॉच में 4167 मेगाहट्र्ज प्रोसेसर, 256 एमबी रैम और आठ जीबी स्टोरेज है.

मिला सम्मान

प्रधानमंत्री कार्यालय, भारत सरकार द्वारा एंटरप्रेन्योरशिप सहित तमाम उपलब्धियों के लिए सिद्धांत वत्स को सम्मानित किया जा चुका है. इसके अलावा सिद्धांत को अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा द्वारा व्हाइट हाउस में आमंत्रित किया जा चुका है.

Share Via :
Published Date
Comments (0)
metype

संबंधित खबरें

अन्य खबरें