Shumbh-Nishumbh Vadh Katha: शुंभ-निशुंभ कौन थे? मां दुर्गा से क्यों हुआ उनका युद्ध
असुरों से युद्ध करतीं मां दुर्गा की सांकेतिक तस्वीर (एआई)
Shumbh-Nishumbh Vadh Katha: शारदीय नवरात्र के पावन अवसर पर मां दुर्गा के पराक्रम से जुड़ी कथाएं सुनना शुभ माना जाता है. ऐसे में, इस लेख में जानिए मां दुर्गा और शुंभ-निशुंभ के बीच हुए युद्ध की पूरी कथा.
Shumbh-Nishumbh Vadh Katha: साल 2026 में 11 अक्टूबर से शारदीय नवरात्र की शुरुआत हो चुकी है. नवरात्र के नौ दिनों में मां दुर्गा के पराक्रम से जुड़ी शुंभ-निशुंभ वध की कथा का पाठ करना शुभ माना जाता है. दुर्गा सप्तशती में शुंभ और निशुंभ के वध का वर्णन मिलता है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, शुंभ और निशुंभ के अत्याचारों से तीनों लोकों में हाहाकार मच गया था. तब संसार की रक्षा के लिए मां दुर्गा ने रणभूमि में उतरकर असुरों का संहार किया था.
पौराणिक कथा
कौन थे शुंभ और निशुंभ?
पौराणिक कथाओं के अनुसार, शुंभ और निशुंभ दो शक्तिशाली असुर भाई थे. उन्होंने देवताओं को पराजित कर स्वर्ग पर अधिकार जमा लिया था. इंद्र को उनके पद से हटाकर दोनों भाइयों ने देवताओं के अधिकार छीन लिए थे. इस कारण देवताओं को स्वर्ग छोड़ना पड़ा.
ऐसी स्थिति में देवताओं को मां भगवती का वह वरदान याद आया, जो उन्होंने महिषासुर के वध के बाद दिया था. देवी ने आश्वासन दिया था कि संकट के समय उनकी स्तुति करने पर वे देवताओं की रक्षा के लिए प्रकट होंगी. इसी विश्वास के साथ सभी देवता हिमालय पहुंचे और आदिशक्ति की आराधना करने लगे.
कैसे हुआ देवी कौशिकी का प्राकट्य?
जब देवता हिमालय पर देवी की स्तुति कर रहे थे, उसी समय देवी पार्वती वहां पहुंचीं. उन्होंने देवताओं से पूछा कि वे किसकी आराधना कर रहे हैं. तभी देवी पार्वती के शरीर की कोशिकाओं से एक दिव्य शक्ति प्रकट हुई, जिसे कौशिकी कहा गया.
देवी कौशिकी ने देवताओं को बताया कि वे शुंभ और निशुंभ के अत्याचारों से मुक्ति पाने के लिए आदिशक्ति की स्तुति कर रहे हैं. मान्यता है कि कौशिकी के प्रकट होने के बाद देवी पार्वती का वर्ण काला हो गया. इसी कारण वे कालिका के नाम से प्रसिद्ध हुईं.
शुंभ ने देवी के सामने रखा विवाह का प्रस्ताव
हिमालय पर देवी के दिव्य स्वरूप को देखकर चंड और मुंड नामक असुरों ने उनके सौंदर्य और तेज का वर्णन शुंभ के सामने किया. उन्होंने शुंभ को बताया कि ऐसी अद्भुत देवी उसके वैभव के योग्य हैं. यह सुनकर शुंभ ने सुग्रीव नामक दूत को देवी के पास भेजा और उनके सामने विवाह का प्रस्ताव रखवाया.
देवी ने इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया. उन्होंने स्पष्ट कहा कि उन्होंने प्रतिज्ञा की है कि जो उन्हें युद्ध में पराजित करेगा, वही उनसे विवाह कर सकेगा. जब यह संदेश शुंभ और निशुंभ तक पहुंचा, तो वे क्रोधित हो गए. इसके बाद उन्होंने देवी को अपने अधीन करने के लिए सेना भेजने का निर्णय लिया.
धूम्रलोचन, चंड-मुंड और रक्तबीज का हुआ वध
सबसे पहले शुंभ ने अपने सेनापति धूम्रलोचन को देवी को लाने का आदेश दिया. लेकिन देवी ने युद्ध में उसका संहार कर दिया. इसके बाद चंड और मुंड ने देवी पर आक्रमण किया. इस युद्ध में मां की शक्ति से दोनों असुर मारे गए. चंड और मुंड का वध करने के कारण देवी के उग्र स्वरूप को चामुंडा कहा गया.
इसके बाद शुंभ और निशुंभ ने रक्तबीज को युद्धभूमि में भेजा. रक्तबीज को वरदान प्राप्त था कि उसके रक्त की बूंदें धरती पर गिरते ही उसके समान एक और असुर उत्पन्न हो जाता था.
ऐसे में उसका वध करना कठिन हो गया. तब मां दुर्गा ने अपनी शक्तियों की सहायता से रक्तबीज का संहार किया. इस तरह शुंभ और निशुंभ की सेना लगातार कमजोर होती चली गई.
मां दुर्गा ने कैसे किया निशुंभ का वध?
अपने सेनापतियों और शक्तिशाली योद्धाओं के मारे जाने के बाद शुंभ और निशुंभ स्वयं युद्धभूमि में उतरे. दोनों भाइयों ने मां दुर्गा पर अस्त्र-शस्त्रों से हमला किया. देवी ने उनके प्रहारों का सामना करते हुए अपने बाणों और दिव्य अस्त्रों से जवाब दिया.
दोनों के बीच तलवार, त्रिशूल, चक्र और धनुष-बाण से संघर्ष हुआ. देवी ने अपने अस्त्रों से निशुंभ को घायल कर दिया. अंत में मां दुर्गा ने उसका वध कर दिया. भाई की मृत्यु से शुंभ क्रोध से भर उठा और उसने देवी को युद्ध के लिए ललकारा.
मां दुर्गा ने ऐसे किया शुंभ का अंत
निशुंभ के मारे जाने के बाद शुंभ ने मां दुर्गा पर आरोप लगाया कि वे अन्य देवियों की सहायता से युद्ध कर रही हैं. तब देवी ने अपनी विभिन्न शक्तियों को अपने भीतर समेट लिया और शुंभ को बताया कि वे ही समस्त शक्तियों का मूल स्वरूप हैं.
इसके बाद देवी और शुंभ के बीच भयंकर युद्ध हुआ. दोनों ने एक-दूसरे पर कई अस्त्रों से प्रहार किए. अंत में मां दुर्गा ने शुंभ को पराजित कर उसका वध कर दिया. इस प्रकार दोनों असुर भाइयों के अंत के साथ देवताओं को उनके अधिकार वापस मिले और तीनों लोक उनके अत्याचारों से मुक्त हो गए.
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