भगवान विष्णु ने देवकी-वसुदेव को ही क्यों चुना अपना माता-पिता? जानें श्रीकृष्ण जन्म का रहस्य

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माता देवकी और पिता वासुदेव के साथ भगवान कृष्ण की सांकेतिक तस्वीर (एआई)

Janmashtami 2026: देवकी और वसुदेव को ही भगवान श्रीकृष्ण के माता-पिता बनने का सौभाग्य क्यों मिला? पौराणिक कथा के अनुसार, इसके पीछे देवकी-वसुदेव के पिछले जन्म की तपस्या और भगवान विष्णु का दिया हुआ वरदान था. यह वरदान क्या था जानने के लिए पढ़ें पूरी खबर.

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Janmashtami 2026: जन्माष्टमी यानी भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है. धार्मिक मान्यता है कि इसी दिन भगवान विष्णु के आठवें अवतार श्रीकृष्ण ने देवकी और वसुदेव के पुत्र के रूप में जन्म लिया था. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि भगवान विष्णु ने देवकी और वसुदेव को ही अपना माता-पिता क्यों चुना?

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श्रीकृष्ण का जन्म मथुरा के कारागार में हुआ था. उस समय देवकी और वसुदेव कंस की कैद में थे. फिर आखिर भगवान ने किसी सुखी और संपन्न परिवार के बजाय कारागार में बंद देवकी और वसुदेव को ही अपना माता-पिता क्यों बनाया? आइए इस लेख के माध्यम से जानते हैं श्रीकृष्ण के जन्म से जुड़ा यह रहस्य.

पौराणिक कथा

AI Image
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सुतपा और पृश्नि ने की थी भगवान विष्णु की कठोर तपस्या

पौराणिक मान्यता के अनुसार, देवकी और वसुदेव अपने पूर्वजन्म में पृश्नि और सुतपा नाम के प्रजापति दंपति थे. दोनों भगवान विष्णु के परम भक्त थे. उनकी इच्छा थी कि स्वयं भगवान विष्णु उनके पुत्र के रूप में जन्म लें. इसी मनोकामना को पूरा करने के लिए दोनों ने भगवान विष्णु की कठोर तपस्या शुरू की.

कहा जाता है कि सुतपा और पृश्नि ने 12,000 दिव्य वर्षों तक तपस्या की. इस दौरान उन्होंने अपनी इंद्रियों पर नियंत्रण रखा और वर्षा, तेज धूप, ठंड और तेज हवा जैसी कठिन परिस्थितियों को सहन किया. उनकी तपस्या, और भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु उनके सामने प्रकट हुए . श्री हरी विष्णु ने उन्हें वरदान मांगने को कहा. 

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पृश्नि ने मांगा भगवान विष्णु जैसा पुत्र

दोनों नें भगवान विष्णु से उनके समान पुत्र प्राप्ती की इच्छा जताई. भगवान विष्णु ने उन्हें वरदान दे दिया. लेकिन इसके बाद उन्होंने विचार किया कि संसार में उनके समान दूसरा कोई है ही नहीं. ऐसे में उनके समान पुत्र देना संभव नहीं होगा. अपने दिए हुए वचन को पूरा करने के लिए भगवान विष्णु ने स्वयं उनके पुत्र के रूप में तीन बार जन्म लेने का निर्णय किया. यही वरदान आगे चलकर श्रीकृष्ण के देवकी और वसुदेव के पुत्र बनने का कारण बना.

तीन जन्मों में पूरा हुआ भगवान का वचन

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान विष्णु ने पृश्नि और सुतपा के पुत्र के रूप में तीन जन्म लिए.

पहला जन्म- पृश्निगर्भ

पहले जन्म में भगवान विष्णु ने पृश्नि और सुतपा के पुत्र के रूप में पृश्निगर्भ नाम से अवतार लिया. इस तरह भगवान ने पहली बार अपने भक्त दंपति की इच्छा पूरी की.

दूसरा जन्म- वामन अवतार

दूसरे जन्म में यही दंपति अदिति और कश्यप के रूप में जन्मे. तब भगवान विष्णु ने उनके पुत्र के रूप में वामन अवतार लिया. वामन अवतार में भगवान ने राजा बलि से तीन पग भूमि मांगी और अपनी लीला से देवताओं को उनका अधिकार वापस दिलाया.

तीसरा जन्म- श्रीकृष्ण

तीसरे जन्म में वही दंपति देवकी और वसुदेव के रूप में जन्मे. अब भगवान विष्णु को अपना पुराना वचन पूरा करना था. इसीलिए द्वापर युग में भगवान विष्णु ने देवकी के गर्भ से श्रीकृष्ण के रूप में जन्म लिया.

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Disclaimer: इस लेख में दी गई सभी जानकारियां धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं पर आधारित हैं. प्रभात खबर इन मान्यताओं की पुष्टि नहीं करता है.

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