नवमी पर हवन पहले करें या कन्या पूजन? जानें पूजा का सही क्रम और जरूरी नियम
हवन और कन्या पूजन को दर्शाती तस्वीर (फोटो- एआई)
Maha Navami 2026: नवरात्र की नवमी तिथि पर हवन और कन्या पूजन की परंपरा है. क्या आप जानते हैं कि नवमी के दिन पहले हवन करना चाहिए या कन्या पूजन. अगर नहीं, तो यहां जानिए.
Maha Navami 2026: शारदीय नवरात्र की नवमी को महा नवमी कहा जाता है. महा नवमी के दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा होती है. इसके अलावा, इस दिन कन्या पूजन और हवन भी किया जाता है. मान्यता है कि नवमी के दिन कन्या पूजन और हवन से मां सिद्धिदात्री की विशेष कृपा प्राप्त होती है. क्या आप जानते हैं कि महा नवमी के दिन पहले कन्या पूजन करना चाहिए या हवन? आइए जानते हैं.
महा नवमी पर हवन पहले करें या कन्या पूजन?
ज्योतिषाचार्य पंडित धनंजय पांडेय ने बताया कि महा नवमी के दिन पहले हवन करना चाहिए. महा नवमी के दिन हवन संपन्न करने के बाद कन्या पूजन का विधान है. इसलिए महा नवमी के दिन पहले हवन कार्य पूरा करना चाहिए. इसके बाद कन्या पूजन संपन्न करना चाहिए. महा नवमी पर क्रम से अनुष्ठान करने से मां सिद्धिदात्री का आशीर्वाद प्राप्त होता है.
महा नवमी कब है?
महावीर और मिथिला पंचांग के अनुसार, महा नवमी 19 अक्टूबर 2026, सोमवार को है. इस दिन महा नवमी का व्रत रखा जाएगा. महावीर पंचांग के अनुसार, नवमी तिथि 19 अक्टूबर 2026 को सुबह 7 बजकर 54 मिनट से शुरू होगी. नवमी तिथि की समाप्ति 20 अक्टूबर 2026, मंगलवार को सुबह 9 बजकर 35 मिनट पर होगी. इस दिन चामुंडा और बलि पूजा सुबह 9 बजकर 34 मिनट के बाद कर सकते हैं.
महा नवमी पर कन्या पूजन और हवन के लिए मुहूर्त
| अनुष्ठान (Event) | शुभ समय / मुहूर्त (Timings) |
| हवन का शुभ मुहूर्त | सुबह 9 बजकर 34 मिनट से सूर्यास्त से पहले तक |
| कन्या पूजन का शुभ मुहूर्त | सूर्योदय से सुबह 10:30 बजे से पहले या दोपहर 1:30 बजे के बाद |
ज्योतिषाचार्य डॉ. रतन कुमार मिश्रा ने बताया कि महा नवमी के दिन हवन और पूजन के लिए ये मुहूर्त शुभ हैं.
हवन के दौरान या बाद में क्या न करें
- महा नवमी पर हवन के बाद अग्नि को पानी डालकर न बुझाएं. ऐसा करना अग्नि देव का अपमान माना गया है.
- हवन के बाद भस्म (राख) को न तो कूड़ेदान में रखें और न ही इसमें पैर लगाएं. भस्म को किसी पवित्र नदी में या किसी पेड़े के नीचे मिट्टी में दबाया जा सकता है.
- हवन करने के लिए लोहे के बर्तन का प्रयोग नहीं करना चाहिए. लोहे के बर्तन में हवन करना अशुभ माना गया है. हवन कुंड मिट्टी, पीतल या तांबे का होना चाहिए.
- हवन में सूखी और आम या पवित्र लकड़ी का प्रयोग करना चाहिए. अगर लकड़ी में दीमक लगा हो या कीड़ें हों तो, उसे अग्नि में न डालें.
- हवन के दौरान कुंड में सबसे पहले कपूर से अग्नि को प्रज्वलित करना (जलाना) चाहिए. इसके बाद उसमें लकड़ी देना चाहिए. हवन कुंड में प्लास्टिक न डालें.
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