ट्रंप की कुंडली का ये योग बनाता है उन्हें इतना संघर्षशील? ज्योतिषाचार्य ने समझाया पूरा गणित

Updated:
विज्ञापन

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की कुंडली की सांकेतिक तस्वीर (एआई)

डोनाल्ड ट्रंप की कुंडली का ज्योतिषीय विश्लेषण. जानें कैसे सिंह लग्न, सूर्य, राहु और मंगल जैसे ग्रह उनके संघर्षों और वापसी के पैटर्न को दर्शाते हैं.

विज्ञापन

Donald Trump Kundali: डोनाल्ड ट्रंप की कुंडली को अगर सिर्फ एक सामान्य कुंडली की तरह देखें तो शायद बहुत कुछ छूट जाएगा. खासकर जब बात उनके संघर्ष, अचानक आने वाली परिस्थितियों और बार-बार मुश्किल से निकलकर वापस सामने आने की हो. वैदिक ज्योतिष में आयु और जीवन की मजबूती देखने के लिए किसी एक योग पर फैसला नहीं किया जाता. पिण्डायु, अंशायु, नैसर्गिकायु, लग्नायु, जैमिनि आयु जैसे कई सिद्धांत हैं. साथ में लग्न, लग्नेश, अष्टम भाव, अष्टमेश और शनि की स्थिति भी देखी जाती है.

विज्ञापन

ट्रंप की कुंडली में लग्न पर पापकर्तरी प्रभाव दिखाई देता है. पहली नजर में यह स्थिति दबाव और संघर्ष वाली लग सकती है. लेकिन केवल इसी आधार पर आयु या किसी बड़ी घटना का निष्कर्ष निकाल देना ठीक नहीं होगा. असली सवाल यह है कि लग्नेश कैसा है और पूरी कुंडली उसका कितना साथ दे रही है.

सूर्य की ताकत यहां बहुत मायने रखती है

सिंह लग्न में सूर्य लग्नेश होता है और ट्रंप की कुंडली में सूर्य दशम भाव में बैठा है. दशम भाव को कर्म, पद, प्रतिष्ठा और सार्वजनिक जीवन का भाव माना जाता है.सूर्य खुद नेतृत्व और अधिकार का ग्रह है. इसलिए लग्नेश का दशम भाव में होना अपने आप में ध्यान खींचता है.

अब इसके साथ राहु का संबंध भी है. राहु की वजह से चीजें थोड़ी और असामान्य हो जाती हैं. राहु को ज्योतिष में महत्वाकांक्षा, अलग रास्ते, अचानक घटनाओं और सामान्य सीमाओं को तोड़ने वाली प्रवृत्ति से जोड़ा जाता है.इसी वजह से सूर्य-राहु का यह संबंध व्यक्ति के सार्वजनिक जीवन को काफी अलग रंग दे सकता है.

यहां यह कहना जरूरी है कि इसका मतलब यह नहीं कि हर राजनीतिक घटना या विवाद का कारण राहु ही है. ज्योतिष में ग्रहों को प्रतीकात्मक संकेतों के रूप में पढ़ना ज्यादा उचित है.

यह भी पढ़ें; सितंबर में इन मूलांक वालों के खुलेंगे किस्मत के द्वार

मंगल भी कम दिलचस्प नहीं है

लग्न में मंगल की मौजूदगी इस कुंडली की एक और खास बात है.सिंह लग्न के लिए मंगल को पारंपरिक पाराशरी मत में राजयोगकारक माना जाता है. मंगल वैसे भी साहस, ऊर्जा, प्रतिस्पर्धा और संघर्ष का ग्रह है.तो एक तरफ लग्न पर दबाव है, दूसरी तरफ लग्न में मंगल बैठा है.यानी तस्वीर सिर्फ इतनी नहीं है कि परेशानी है. तस्वीर यह भी है कि परेशानी आने पर व्यक्ति किस तरह उसका सामना करता है.

ट्रंप के व्यक्तित्व में भी यह बात सार्वजनिक जीवन में दिखाई देती रही है. वे विवादों से बचने वाले नेता के बजाय अक्सर विवाद के बीच ही खड़े दिखाई देते हैं.

पापकर्तरी है, लेकिन कहानी वहीं खत्म नहीं होती

पापकर्तरी प्रभाव को लेकर अक्सर जल्दबाजी में निष्कर्ष निकाल लिया जाता है. लेकिन ज्योतिष में किसी योग को अकेले पढ़ना सही तरीका नहीं है.अगर लग्न कमजोर हो, लग्नेश भी कमजोर हो और साथ में दूसरे आयु-संबंधी कारक भी कमजोर हों, तब बात ज्यादा गंभीर हो सकती है.यहां मामला वैसा सीधा नहीं है. लग्नेश सूर्य की स्थिति मजबूत है और मंगल भी लग्न में है. इसलिए इस कुंडली में दबाव के साथ प्रतिरोध की क्षमता भी दिखाई देती है.

गुरु की भूमिका थोड़ी उलझी हुई है

सिंह लग्न के लिए गुरु पंचमेश और अष्टमेश होता है. इसलिए गुरु को सिर्फ शुभ या सिर्फ अशुभ कह देना आसान नहीं है.पंचमेश होने के कारण गुरु शुभता, बुद्धि और पूर्व पुण्य से जुड़ता है. अष्टमेश होने के कारण वही ग्रह जीवन के गहरे बदलाव, संकट और अचानक परिस्थितियों से भी जुड़ जाता है.गुरु वक्री भी है. पारंपरिक ज्योतिष में वक्री ग्रहों को लेकर अलग-अलग मत मिलते हैं. कुछ परंपराएं इन्हें सामान्य स्थिति से अलग और कई बार ज्यादा प्रभावी तरीके से फल देने वाला मानती हैं.इसलिए यहां गुरु की भूमिका को मैं एक तरह के दोहरे संकेत के रूप में देखूंगा.

एक तरफ चुनौती.

दूसरी तरफ उसी चुनौती के बीच संभलने की संभावना.

चंद्रमा और वापसी का पैटर्न

चंद्रमा की स्थिति भी इस कुंडली में देखने लायक है. नीचभंग जैसे पारंपरिक सिद्धांतों को ज्योतिष में कई बार ऐसे हालात से जोड़ा जाता है जहां व्यक्ति किसी कठिन दौर के बाद फिर से अपनी स्थिति बनाने में सफल होता है. इसे किसी जादुई नियम की तरह नहीं लेना चाहिए.

एक ज्योतिषीय पैटर्न की तरह समझें:

गिरावट हुई, दबाव आया, फिर किसी तरह वापसी हुई.

ट्रंप के राजनीतिक जीवन में इस तरह के उतार-चढ़ाव दिखाई जरूर देते हैं. लेकिन यह कहना कि हर वापसी ग्रहों ने कराई, एक ज्योतिषीय विश्वास होगा, स्थापित तथ्य नहीं.

यह भी पढ़ें: September Hindu Calendar 2026: जन्माष्टमी से पितृ पक्ष तक, देखें लिस्ट

2024 की दो घटनाओं ने इस कुंडली की चर्चा और बढ़ा दी

13 जुलाई 2024 को पेनसिल्वेनिया के बटलर में ट्रंप की रैली के दौरान गोलीबारी हुई. इसके बाद 15 सितंबर 2024 को वेस्ट पाम बीच में भी उन पर हमले की कोशिश की घटना सामने आई. इन घटनाओं का जिक्र करते हुए थोड़ी सावधानी जरूरी है.

ज्योतिष यह साबित नहीं करता कि कोई ग्रह किसी व्यक्ति को गोली से बचाता है. न ही किसी कुंडली के आधार पर यह गारंटी दी जा सकती है कि व्यक्ति भविष्य में किसी दुर्घटना या हिंसक घटना से सुरक्षित रहेगा.हां, एक ज्योतिषी इन घटनाओं को कुंडली में दिखाई देने वाले संकट और संरक्षण के संकेतों के संदर्भ में पढ़ सकता है.

यानी यहां बात व्याख्या की है, वैज्ञानिक कारण-परिणाम की नहीं.

और अगर उसी नजरिए से देखें तो तस्वीर कुछ ऐसी बनती है

पापकर्तरी — दबाव

मजबूत सूर्य — आत्मबल

मंगल — संघर्ष करने की ताकत

राहु-केतु — अचानक और असामान्य घटनाएं

चंद्रमा — मुश्किल के बाद संभलने का संकेत

गुरु — संकट के साथ संरक्षण का मिश्रित प्रभाव

यही शायद इस कुंडली का सबसे दिलचस्प हिस्सा है.

खतरा दिखाई देता है, लेकिन उसके सामने टिके रहने की क्षमता के संकेत भी मिलते हैं.

ज्योतिष की भाषा थोड़ी मजेदार कर दें तो मामला कुछ ऐसा है

कुंडली कहती है  “मुश्किल आने वाली है.”

दूसरी तरफ से आवाज आती है

“ठीक है, आने दो.”

“He is over now?” इतनी जल्दी भी नहीं!

ट्रंप के राजनीतिक जीवन में कई बार ऐसा लगा कि शायद उनका दौर खत्म हो रहा है. लेकिन उसके बाद वे फिर किसी न किसी रूप में चर्चा के केंद्र में आ गए.राहु-केतु अक्ष, दशम भाव और मजबूत सूर्य जैसी स्थितियों को देखते हुए पारंपरिक ज्योतिष में इसे असामान्य सार्वजनिक जीवन और लगातार सक्रिय बने रहने की प्रवृत्ति से जोड़ा जा सकता है.लेकिन यहां भी भविष्यवाणी की एक सीमा है.

किसी चुनाव का परिणाम केवल कुंडली से तय नहीं होता. मतदाता, राजनीतिक माहौल, कानून, संविधान, विपक्ष, आर्थिक परिस्थितियां और उस समय की वास्तविक घटनाएं भी उतनी ही महत्वपूर्ण हैं.

तीसरे कार्यकाल की बात

अब तीसरे कार्यकाल की चर्चा आती है तो मामला और दिलचस्प हो जाता है.अमेरिकी संविधान का 22वां संशोधन राष्ट्रपति के दो से अधिक निर्वाचित कार्यकाल पर रोक लगाता है. इसलिए तीसरे निर्वाचित कार्यकाल की बात सामान्य स्थिति में बहुत असाधारण होगी.ज्योतिष के आधार पर इसे अभी से पक्का संभव कहना भी सही नहीं होगा और पक्का असंभव कहना भी नहीं.

अगर इस विषय पर ज्योतिषीय अध्ययन किया जाए तो उस समय की दशा, गोचर और जन्मकुंडली के ग्रहबल को साथ में देखना पड़ेगा.और उसके बाद भी अंतिम फैसला वास्तविक राजनीतिक और संवैधानिक परिस्थितियां ही करेंगी.इसलिए मेरी नजर में इस कुंडली का सबसे संतुलित निष्कर्ष यही है

मुश्किलें दिखाई देती हैं, लेकिन उनसे लड़ने और वापस खड़े होने के संकेत भी कम नहीं हैं.

बाकी भविष्य को लेकर अंतिम शब्द किसी एक ग्रह के पास नहीं है.

ज्योतिष संकेत दे सकता है. फैसला जीवन और परिस्थितियां करती हैं.

पं. प्रशांत (काशी से)

यह भी पढ़ें; Janmashtami Vrat: जन्माष्टमी व्रत रखने से पहले जान लें 10 खास नियम, श्रीकृष्ण पूरी करेंगे मनोकामना

विज्ञापन

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola