राशिफल और कुंडली: शादी से पहले असल में क्या-क्या देखा जाता है?

Updated:
विज्ञापन

ज्योतिषी अनिल भार्गव

WhatsApp चैनल से जुड़ेंगूगल पर प्रभात खबर चुनें

शादी से पहले कुंडली मिलान में अक्सर पूरा ध्यान 36 गुणों पर टिक जाता है, लेकिन क्या सिर्फ ज्यादा गुण मिलना सफल विवाह की गारंटी है? ज्योतिषी अनिल भार्गव के अनुसार, नवमांश कुंडली, सातवां भाव और दशा-अंतरदशा देखे बिना केवल गुणों के आधार पर फैसला करना अधूरा हो सकता है.

विज्ञापन

शादी की बात शुरू होते ही परिवारों में सबसे पहले कुंडली मिलान और गुणों की चर्चा होती है. 24, 28 या 31 गुण मिलने के बाद कई बार परिवार इसे रिश्ते की अनुकूलता का आधार मान लेते हैं, जबकि कम गुण आने पर रिश्ता छोड़ने तक का फैसला कर लिया जाता है. हालांकि, ज्योतिषी अनिल भार्गव के अनुसार, विवाह जैसे महत्वपूर्ण निर्णय के लिए केवल गुण मिलान के आंकड़े को अंतिम आधार मानना उचित नहीं है. पूरी जन्म कुंडली का अध्ययन करना अधिक जरूरी है.

विज्ञापन

ज्योतिष-आचार्य एवं भृगु-भार्गव परंपरा के विशेषज्ञ ज्योतिषी अनिल भार्गव बताते हैं कि राशिफल और जन्म कुंडली को एक ही चीज समझना सही नहीं है. सामान्य राशिफल किसी राशि के लोगों के लिए ग्रहों की मौजूदा स्थिति के आधार पर सामान्य संकेत देता है, जबकि जन्म कुंडली व्यक्ति के जन्म की तारीख, सटीक समय और स्थान के आधार पर तैयार होती है. इसी वजह से शादी जैसे व्यक्तिगत और महत्वपूर्ण फैसले के लिए केवल सामान्य राशिफल पर्याप्त नहीं माना जा सकता.

अनिल भार्गव के अनुसार, जन्म का सही समय कुंडली के विश्लेषण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. समय में अंतर होने पर लग्न और भावों की स्थिति बदल सकती है, जिससे कुंडली की व्याख्या भी अलग हो सकती है. एक ही दिन जन्म लेने वाले दो लोगों की कुंडली भी अलग हो सकती है, यदि उनका जन्म समय या स्थान अलग हो. इसलिए विवाह मिलान के लिए जन्म की सही जानकारी जरूरी होती है.

पारंपरिक वैदिक ज्योतिष में विवाह के लिए अष्टकूट गुण मिलान की पद्धति अपनाई जाती है. इसमें कुल 36 गुण होते हैं और आठ अलग-अलग पक्षों का अध्ययन किया जाता है. इनमें वर्ण, वश्य, तारा, योनि, ग्रह मैत्री, गण, भकूट और नाड़ी शामिल हैं. इन कूटों के माध्यम से स्वभाव, आपसी आकर्षण, मानसिक तालमेल, शारीरिक अनुकूलता, पारिवारिक स्थिति और स्वास्थ्य से जुड़े विभिन्न पहलुओं का आकलन किया जाता है.

ज्योतिषी अनिल भार्गव बताते हैं कि आम तौर पर 18 या उससे अधिक गुणों को स्वीकार्य और 24 से अधिक गुणों को अच्छा माना जाता है, लेकिन केवल गुणों की संख्या के आधार पर विवाह का अंतिम निर्णय नहीं लिया जाना चाहिए. उनके अनुसार, 36 में से 36 गुण मिलना भी सफल वैवाहिक जीवन की गारंटी नहीं है और 18 से कम गुण आने का अर्थ भी यह नहीं कि विवाह हर स्थिति में असफल होगा. गुण मिलान को पूरी कुंडली के संदर्भ में समझना जरूरी है.

नाड़ी दोष और मांगलिक दोष को लेकर भी परिवारों में अक्सर चिंता रहती है. अनिल भार्गव के अनुसार, नाड़ी दोष को गंभीरता से देखा जाता है, लेकिन पारंपरिक ज्योतिष में इसके कई अपवाद भी बताए गए हैं. इसलिए केवल नाड़ी दोष दिखाई देने पर किसी रिश्ते को तुरंत अस्वीकार करने के बजाय दोनों की राशि, नक्षत्र और ग्रह स्थिति सहित पूरी कुंडली का अध्ययन किया जाना चाहिए. इसी तरह मांगलिक दोष का प्रभाव भी हर कुंडली में एक जैसा नहीं माना जा सकता.

गुण मिलान के अलावा ज्योतिषी विवाह के लिए नवमांश यानी D9 कुंडली, दशा का समय और सातवें भाव एवं उसके स्वामी की स्थिति को भी महत्वपूर्ण मानते हैं. अनिल भार्गव के अनुसार, नवमांश कुंडली वैवाहिक जीवन से जुड़े कई सूक्ष्म संकेत देती है. कई बार मुख्य जन्म कुंडली में कमजोर दिखाई देने वाली ग्रह स्थिति नवमांश में मजबूत हो सकती है और इससे पूरी तस्वीर बदल सकती है.

विवाह का समय भी कुंडली विश्लेषण का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है. अनिल भार्गव बताते हैं कि विवाह किस दशा या अंतरदशा में हो रहा है, इसे नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए. इसी तरह सातवां भाव और उसका स्वामी विवाह एवं साझेदारी से सीधे जुड़े माने जाते हैं. सातवें भाव पर किन ग्रहों की दृष्टि है और उसका स्वामी किस स्थिति में है, इन बातों को भी गुण मिलान से अलग देखा जाता है.

अनिल भार्गव अपने अनुभव का उदाहरण देते हुए बताते हैं कि कुछ समय पहले सूरत से एक परिवार विवाह के लिए कुंडली लेकर उनके पास आया था. गुण मिलान में 19 अंक आए थे, जिसके बाद परिवार में रिश्ते को लेकर विरोध शुरू हो गया. पूरी कुंडली देखने पर नवमांश में दोनों की स्थिति अनुकूल दिखाई दी और सातवें भाव पर गुरु की शुभ दृष्टि भी थी. उनके अनुसार, कम स्कोर मुख्य रूप से एक कूट की वजह से था. उन्होंने परिवार को केवल गुणों के आधार पर निर्णय लेने के बजाय पूरी कुंडली को समझने की सलाह दी.

अनिल भार्गव का कहना है कि राशिफल रोजमर्रा की दिशा का सामान्य संकेत दे सकता है, जबकि जन्म कुंडली व्यक्ति की व्यक्तिगत परिस्थितियों का विस्तृत ज्योतिषीय विश्लेषण प्रस्तुत करती है. वहीं गुण मिलान इस पूरी प्रक्रिया का केवल एक हिस्सा है. उनके अनुसार, न तो अधिक गुण आने पर आंख मूंदकर रिश्ते को सही मान लेना चाहिए और न ही कम गुण आने पर तुरंत रिश्ता खत्म कर देना चाहिए. विवाह जैसे फैसले में पूरी कुंडली को समझने के साथ-साथ अंतिम निर्णय संबंधित व्यक्ति और परिवार को अपनी समझ के आधार पर लेना चाहिए.

ज्योतिषी अनिल भार्गव ज्योतिष-आचार्य एवं ज्योतिष-शास्त्री हैं. वे श्री महर्षि वैदिक ज्योतिष महाविद्यालय, उदयपुर से जुड़े रहे हैं और भृगु-भार्गव परंपरा में 15 वर्षों से अधिक के अनुभव तथा एक लाख से अधिक परामर्श का उल्लेख करते हैं.

कुंडली मिलान के लिए ऑनलाइन सुविधा: विवाह से पहले कुंडली और गुण मिलान की प्रारंभिक जानकारी के लिए Free Kundali Matching सुविधा यहां उपलब्ध है -

विज्ञापन

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola