Gita Gyan: गुस्सा और गलतफहमी बढ़ा रहे हैं रिश्ते में दूरी? गीता की ये 3 सीख आएंगी काम
गीता उपदेश (File Photo)
हर रिश्ते में कभी न कभी मनमुटाव होता है. कई बार गुस्सा और गलतफहमी रिश्ते में दूरी बढ़ा देते हैं. ऐसे समय में गीता की कुछ बातें आपको सही रास्ता दिखा सकती हैं. जानें रिश्तों से जुड़ी भगवान श्रीकृष्ण की 3 जरूरी सीख.
Gita Gyan: हर रिश्ते में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं. कई बार छोटी-छोटी बातों को लेकर मनमुटाव हो जाता है और रिश्ते में कड़वाहट बढ़ने लगती है. चाहे रिश्ता पति-पत्नी का हो, प्रेम संबंध का या परिवार का, ऐसे समय में समझ नहीं आता कि क्या करना चाहिए. भगवद्गीता में भगवान श्रीकृष्ण ने ऐसी कई सीख दी हैं, जिन्हें अपनाकर रिश्ते को बेहतर और मजबूत बनाया जा सकता है. आइए जानते हैं गीता की 3 ऐसी सीख, जो रिश्तों में आई कड़वाहट को कम करने में मदद कर सकती हैं.
1. सुख-दुख को स्थायी न मानें
मात्रास्पर्शास्तु कौन्तेय शीतोष्णसुखदुःखदाः। आगमापायिनोऽनित्यास्तांस्तितिक्षस्व भारत।।
अध्याय-2, श्लोक-14
भावार्थ: भगवान श्रीकृष्ण इस श्लोक में अर्जुन से कहते हैं कि सुख और दुख का आना-जाना लगा रहता है. जिस तरह मौसम बदलता रहता है, उसी तरह जीवन में परिस्थितियां भी हमेशा एक जैसी नहीं रहतीं. इसलिए व्यक्ति को सुख-दुख में विचलित हुए बिना धैर्य रखना चाहिए.
रिश्तों के लिए सीख: रिश्ते में भी हर समय सब कुछ अच्छा नहीं रहता. कभी मतभेद हो सकते हैं तो कभी गलतफहमी. ऐसे में किसी एक विवाद या खराब दौर को पूरे रिश्ते का आधार मानकर तुरंत बड़ा फैसला लेने के बजाय धैर्य से स्थिति को समझना बेहतर है.
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2. क्रोध पर रखें नियंत्रण
त्रिविधं नरकस्येदं द्वारं नाशनमात्मनः। कामः क्रोधस्तथा लोभस्तस्मादेतत्त्रयं त्यजेत्।।
अध्याय-16, श्लोक-21
भावार्थ: भगवद्गीता के इस श्लोक में भगवान श्रीकृष्ण काम, क्रोध और लोभ को मनुष्य के लिए पतन के तीन द्वार बताते हैं. इसलिए व्यक्ति को इन तीनों से दूर रहने की कोशिश करनी चाहिए.
रिश्तों के लिए सीख: रिश्ते में गुस्सा कड़वाहट बढ़ा सकता है. गुस्से में कही गई बात सामने वाले को दुख पहुंचा सकती है. इसलिए झगड़े के समय तुरंत जवाब देने के बजाय पहले शांत हो जाएं और फिर बात करें.
3. सामने वाले को बदलने के बजाय समझें
सदृशं चेष्टते स्वस्याः प्रकृतेर्ज्ञानवानपि। प्रकृतिं यान्ति भूतानि निग्रहः किं करिष्यति।।
अध्याय-3, श्लोक-33
भावार्थ: भगवान श्रीकृष्ण बताते हैं कि व्यक्ति अपनी प्रकृति और स्वभाव के अनुसार ही कर्म करता है। हर इंसान का स्वभाव अलग होता है, इसलिए उसे केवल दबाव डालकर बदला नहीं जा सकता। उसके स्वभाव को समझकर सही दिशा देना बेहतर है।
रिश्तों के लिए सीख: सामने वाले को बार-बार अपनी पसंद के अनुसार बदलने की कोशिश करने से रिश्ते में तनाव बढ़ सकता है. इसलिए एक-दूसरे के स्वभाव को समझें और कमियों पर मिलकर बात करें. इससे रिश्ते में आपसी समझ और तालमेल बेहतर हो सकता है.
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