उत्तर प्रदेश की पहचान अब तक देश के बड़े शराब बाजार के तौर पर रही है, लेकिन अब यूपी की तस्वीर बदल रही है. राज्य तेजी से शराब के उत्पादन के साथ-साथ एक्सपोर्ट यानी विदेश भेजने के बड़े हब के रूप में भी अपनी जगह बना रहा है. आंकड़ों की मानें तो यूपी अब सिर्फ शराब की खपत के लिए नहीं, बल्कि इसे तैयार कर दुनिया के दूसरे देशों तक पहुंचाने में भी आगे बढ़ रहा है.शराब एक्सपोर्ट के मामले में कहां है यूपी वाणिज्य मंत्रालय (APEDA) और यूपी आबकारी विभाग के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही यानी अप्रैल से जून के बीच यूपी से शराब उत्पादों का एक्सपोर्ट 45.4 फीसदी बढ़ा.इस बढ़ोतरी के साथ यूपी शराब एक्सपोर्ट के मामले में देश में पहली बार तीसरे नंबर पर पहुंच गया है. महाराष्ट्र और पंजाब इससे आगे हैं.आंकड़ों के मुताबिक, इस दौरान भारत ने कुल 965 करोड़ रुपये के शराब उत्पाद विदेश भेजे. इसमें अकेले यूपी की हिस्सेदारी 122.3 करोड़ रुपये रही. यानी देश से होने वाले कुल शराब एक्सपोर्ट में यूपी की हिस्सेदारी करीब 13 फीसदी रही.अगर मात्रा की बात करें तो भारत से करीब 8.13 करोड़ लीटर शराब उत्पाद विदेश भेजे गए. इसमें करीब 1.05 करोड़ लीटर शराब यूपी की डिस्टिलरियों में तैयार हुई.ऐसे में एक सवाल तो ये है कि आखिर यूपी की शराब विदेशी बाजार में अपनी जगह कैसे बना रही है?ये भी पढ़ें: सरकारी स्कूल का जायजा लेने से पहले क्यों जरूरी है परमिशन ? CJP विवाद से समझिए पूरा नियमयूपी की शराब की मांग बढ़ने की वजह क्या है?इसकी एक बड़ी वजह राज्य की बदली हुई एक्सपोर्ट पॉलिसी मानी जा रही है.उत्तर प्रदेश सरकार ने शराब और दूसरे अल्कोहलिक प्रोडक्ट्स को विदेश भेजने पर ज्यादा फोकस करना शुरू किया है. इसके लिए ऐसी व्यवस्था बनाई जा रही है, जिससे डिस्टिलरियों के लिए शराब को एक्सपोर्ट करना आसान हो और लागत भी कम आए.पहले आबकारी व्यवस्था का ज्यादा फोकस घरेलू बाजार पर था. अब सरकार विदेशी बाजार में भी यूपी की शराब की पहुंच बढ़ाने पर जोर दे रही है.हालांकि, शराब के एक्सपोर्ट में 45.4 फीसदी की बढ़ोतरी को सिर्फ नई नीति का नतीजा मानना सही नहीं होगा. इसके पीछे विदेशी बाजार में बढ़ती मांग, कंपनियों की अपनी रणनीति और राज्य में बढ़ती उत्पादन क्षमता जैसे कई कारण भी हो सकते हैं.यानी नीति में बदलाव के साथ-साथ कंपनियों का बढ़ता उत्पादन और विदेशों से मिल रही मांग भी यूपी के शराब एक्सपोर्ट को तेजी दे रही है.एक्सपोर्ट बढ़ाने के लिए डिस्टिलरियों का क्या है योगदानयूपी की कहानी सिर्फ सरकारी नीतियों तक सीमित नहीं है. राज्य की डिस्टिलरियां भी एक्सपोर्ट बढ़ाने में अहम योगदान दे रही.पहली तिमाही में बोतलबंद शराब और एक्स्ट्रा न्यूट्रल अल्कोहल यानी ईएनए के उत्पादन में 163 फीसदी की बढ़ोतरी हुई. ईएनए शराब बनाने में इस्तेमाल होने वाला एक जरूरी कच्चा माल है.इसका मतलब है कि यूपी में शराब बनाने की क्षमता तेजी से बढ़ रही है. उत्पादन बढ़ने से कंपनियों के लिए घरेलू बाजार के साथ-साथ विदेशों से आने वाले ऑर्डर पूरे करना भी आसान होगा.यूपी को कच्चे माल के मामले में भी फायदा है. यूपी देश के बड़े गन्ना उत्पादक राज्यों में शामिल है. इसके अलावा यहां अनाज का उत्पादन भी बड़े पैमाने पर होता है. ऐसे में डिस्टिलरियों को शराब बनाने के लिए जरूरी कच्चा माल आसानी से मिल जाता है.यानी बढ़ती उत्पादन क्षमता, पर्याप्त कच्चा माल और एक्सपोर्ट पर बढ़ता फोकस ये तीनों मिलकर यूपी को शराब के बड़े एक्सपोर्ट हब के तौर पर मजबूत कर रहे हैं.ये भी पढ़ें: सिंधु जल संधि स्थगित होने का फायदा! लद्दाख के खेतों में पहुंचेगा ग्लेशियर का 9 करोड़ लीटर पानीसिर्फ शराब नहीं, पूरी सप्लाई चेन को हो रहा फायदाशराब का उत्पादन बढ़ने का फायदा सिर्फ डिस्टिलरियों तक सीमित नहीं रहता, जैसे-जैसे उत्पादन बढ़ेगा, बोतल, ढक्कन, पैकेजिंग, लेबल, गोदाम, ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक जैसी दूसरी सेवाओं की मांग भी बढ़ेगी.डिस्टिलरियों को ज्यादा गन्ने और अनाज की जरूरत होगी. इससे किसानों के लिए स्थानीय बाजार और मजबूत हो सकता है. साथ ही पैकेजिंग, ट्रांसपोर्ट और दूसरे छोटे-बड़े कारोबारियों को भी काम मिल सकता है.यानी यूपी में शराब का एक्सपोर्ट बढ़ना सिर्फ सरकार के आबकारी राजस्व तक सीमित मामला नहीं है. इसका असर खेती से लेकर मैन्युफैक्चरिंग, पैकेजिंग और लॉजिस्टिक्स तक पूरी सप्लाई चेन पर पड़ सकता है.सीधे शब्दों में कहें तो शराब का कारोबार बढ़ेगा तो उसके साथ जुड़े कई दूसरे कारोबारों को भी इसका फायदा मिल सकता है.हालांकि विदेशी बाजार में कम कीमत किसी प्रोडक्ट को शुरुआत में बढ़त दिला सकती है, लेकिन लंबे समय तक टिके रहने के लिए अच्छी क्वालिटी और मजबूत ब्रांड सबसे ज्यादा जरूरी होते हैं.फ्रूट वाइन हो सकता है अगला मौकायूपी की शराब इंडस्ट्री के लिए अगला बड़ा मौका फ्रूट वाइन हो सकता है. राज्य में आम, अमरूद, लीची जैसे कई फलों का बड़े पैमाने पर उत्पादन होता है. अगर इन फलों से वाइन और दूसरे वैल्यू-एडेड प्रोडक्ट तैयार किए जाएं तो किसानों के लिए भी नए बाजार खुल सकते हैं.राज्य की एक्सपोर्ट पॉलिसी में भी ग्लोबल मार्केट तक पहुंच बढ़ाने के साथ ब्रांडिंग और लॉजिस्टिक्स को मजबूत करने पर जोर दिया गया है.क्या मेड इन यूपी बनेगा ग्लोबल ब्रांड?फिलहाल यूपी की शराब एक्सपोर्ट की कहानी शुरुआती दौर में है. पहली तिमाही में 45.4 फीसदी की बढ़ोतरी निश्चित तौर पर उत्साह बढ़ाने वाली है, लेकिन असली तस्वीर आने वाले कुछ सालों में साफ होगी.अगर यूपी की डिस्टिलरियां बेहतर क्वालिटी, सही कीमत, अच्छी पैकेजिंग और मजबूत ब्रांडिंग के साथ विदेशी बाजार में अपनी जगह बनाए रखती हैं, तो यह बढ़ोतरी सिर्फ एक आंकड़ा नहीं रहेगी. यह यूपी की शराब इंडस्ट्री में बड़े बदलाव की शुरुआत बन सकती है.पढ़िए देश दुनिया और बिहार झारखंड की ओरिजिनल खबर