वोट मांगने का नया तरीका..

Published at :12 Feb 2014 4:41 AM (IST)
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वोट मांगने का नया तरीका..

।। चंचल।। (सामाजिक कार्यकर्ता) आप आजाद हैं, कुच्छो करिये, कौन रोकता है. नंगे हो जाइए. फूलों पर लेट जाइए. जिसे छुपाने के लिए इनसान ने भांति-भांति के उपक्रम किये और पेड़ की छाल से होते हुए कपड़े तक आये, उसको छुपाने के लिए उस पर अपने नेता की तसवीर चिपका दीजिए. वोट मांगने का यह […]

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।। चंचल।।

(सामाजिक कार्यकर्ता)

आप आजाद हैं, कुच्छो करिये, कौन रोकता है. नंगे हो जाइए. फूलों पर लेट जाइए. जिसे छुपाने के लिए इनसान ने भांति-भांति के उपक्रम किये और पेड़ की छाल से होते हुए कपड़े तक आये, उसको छुपाने के लिए उस पर अपने नेता की तसवीर चिपका दीजिए. वोट मांगने का यह भी तरीका है. जा रे जमाना.. पिंटू मोबाइल लाल्साहेब के आगे किया हुआ है. लाल्साहेब मोबाइल की तसवीर देख कर हैरान हैं. दोनों हाथ सिर पर धरे, उकड़ू बैठे हैं. नवल उपाधिया, कयूम मियां, उमर दरजी सब एक दूसरे को खिसकाते, धकेलते मोबाइल में झांक लेना चाहते हैं. लखन कहार से नहीं रहा गया-माजरा का है भाई! हम्मे भी तो दिखाओ. उमर दरजी परम मुरहा. तहमत पकड़ कर बड़ी संजीदगी से बेहूदी बात कर दी-अथी छपा है, देखबो? लखन ताव खा गये. अब दोनों के बीच जिस भाषा में बात हुई इसे शहर में ‘संवेदनशील’ कहते हैं. लेकिन अभी दोनों मिल कर बीड़ी भी जलायेंगे और जो संवेनशील है, उसे नवल के माई के खाते में सुरक्षित रख दिया जायेगा.

चिखुरी ने वहीं तखत पर बैठे-बैठे ही पूछा- का बात है बे. मजमा काहे लगा है. का है मोबाइल में? कौन बोलता कि मोबाइल में नंगी तसवीर वोट मांग रही है! चिखुरी बुजुर्ग हैं भाई. लेकिन कयूम तो बोल ही सकते हैं. इसलिए कयूम ने चिखुरी को बताना शुरू किया पूरे दम से. इतने दम से कि आने-जानेवाले भी रुक कर सुनें. काम छोड़ कर सुनें. जिस समय कयूम का बयान शुरू हुआ, ररा नाऊ झाबू दुबे की दाढ़ी बनाने के लिए उसे पानी से भिगो रहा था, लेकिन कयूम की आवाज सुनते ही उसने पानी की कटोरी झाबू की ओर खिसका कर बोला- लù तनी हम कयूम को सुन लें. और कयूम को सुनिए – जनाबेआली. जमाना देखिए किस रफ्तार से भाग रहा है. छ बच्चन के बाप बनने के बाद भी हम सोहराब की अम्मा का मुंह तक ना देख पाये रहे. (कयूम की बीवी, जिनका चेहरा किसी ने नहीं देखा) अब एक जमाना इ आवा है कि सब कुछ देखो. न देखने का मन हो तब भी देखो. खुल्लम खुल्ला.

चिखुरी से नहीं रहा गया – मियां असल बात तो बताओ..

इ जो वोट है न, जो चाहे सो करा दे. याद है चच्चा उ जमाना. जब नेता लोग कान्हें पे कमरा लादे गांव-गांव घूम के ओट मांगत रहे. फिर लोड स्पीकर आया, गाड़ी आयी, नचनिया-बजनिया आये, संदूक वाले आये, फिर बंदूक वाले आये, लेकिन अब ये आये हैं. नंगी तसवीर है. जो छिपाया जाता है, उस पर नेता जी का चेहरा है. अब का बताएं बोलने में शर्म लग रही है. नवल को चिढ़ाने का मन हुआ -कयूम चचा! छिपाने की क्या बात रही? मद्दू ने मुद्दे को संजीदा कर दिया- प्रिंसिपल साहिब! बुरा मत मानियेगा, आपकी पार्टी तो अपनी भद्द पिटवा ही चुकी है, अब पूरे देश की ऐसी की तैसी करने पर आमादा है. वोट के लिए यह हरकत?

प्रिंसिपल साहिब ने ‘वाजिब’ तर्क दिया-भाई देश आजाद है, जिसका जो मर्जी आये करे. चुनाव में सब चलता है. हम आपसे पूछते हैं चुनाव में पैसे का नंगा खेल जायज है क्या? खून-खराबा जायज है क्या? जाति-बिरादरी का नंगा प्रदर्शन जायज है क्या? प्रिंसिपल अभी चालू ही रहते लेकिन चिखुरी से नहीं रहा गया-सुनो! तुन्हें इन बातों से तकलीफ नहीं होगी, लेकिन हमें है. सुराज की लड़ाई में शामिल रहते, दुख उठाते तो तुम्हें भी तकलीफ होती. आजादी की लड़ाई हमारे पुरनियों ने इसलिए नहीं लड़ी थी कि आज तुम उसे नंगा कर दोगे. वोट के लिए सारे करतब तुम लोगों ने किया. आज तुम्हे संविधान नहीं पसंद है. संसद नहीं पसंद है. जनतंत्र नहीं पसंद है. तुम इसे मजबूरी में जी रहे हो. लेकिन हम इसके लिए प्रतिबद्ध हैं. मुल्क में जनतंत्र हमने दिया है. वोट देने का अधिकार हमने दिया है. खुदमुख्तार जनता है इसे हमने दिया है. और तो और तुम्हें गाली बकने तक का अधिकार हमने दिया है. अगर हम चाहते तो आजादी के बाद एक पार्टी का निजाम बना लेते. कोइ रोक नहीं सकता था. लेकिन हमारे पुरखों ने जनतंत्र और बहुदलीय व्यवस्था का फैसला लिया. यह बापू की देन है जिनकी हत्या तुमने की है.

बात गंभीर होता देख उमर ने टोका. यह जानते हुए कि इस हरकत पर उसे गाली मिलेगी- तो एक बात बताया जाये कि यह वोट मांगने का नया तरीका हमारे गांव में भी आयेगा? इस सवाल पर लोग हंस दिये. चिखुरी जो गुस्से में थे, उनकी भी मूंछ मुस्कुरा उठी. लाल्साहेब ने इस प्रस्ताव का अनुमोदन किया- कितने का फूल लगेगा. सौ? दो सौ? चार सौ.. हम करेंगे. नवल बोले-भाई इस पर टिकस भी लगेगा? ये लो! तो का खैरात में यह सब देखने को मिलता है? नगद ना रहे तो हंसिया, खुरपी, कुदार, गड़ासा, तेंगारा जो रहे घर से लेते आना. ररा नाऊ बहुत खिस्सू है- नहन्नी से भी काम चल जायेगा? उसकी बात पर जोर का ठहाका लगा. जमीन पर दाना चुगती गौरैयों का झुंड फुर्र से उड़ गया. करियवा कुकुर कुनमुनाया. नवल चले जा रहे हैं..

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