खेलों की दुर्दशा
Updated at : 03 Aug 2016 6:10 AM (IST)
विज्ञापन

खेल में सिर्फ हुनर ही काम आता है. हुनर जन्मजात नहीं होता, उसे बड़ी लगन और साधना से कमाना पड़ता है. पहलवान नरसिंह यादव ने बीते पांच हफ्तों के भीतर खेल से जुड़ी इसी बुनियादी बात को छिन्न-भिन्न होते देखा है. इस दौरान उन्हें बिना दोष अग्निपरीक्षा से गुजरते हुए हर पल यही लगा होगा […]
विज्ञापन
खेल में सिर्फ हुनर ही काम आता है. हुनर जन्मजात नहीं होता, उसे बड़ी लगन और साधना से कमाना पड़ता है. पहलवान नरसिंह यादव ने बीते पांच हफ्तों के भीतर खेल से जुड़ी इसी बुनियादी बात को छिन्न-भिन्न होते देखा है.
इस दौरान उन्हें बिना दोष अग्निपरीक्षा से गुजरते हुए हर पल यही लगा होगा कि भारतीय खेलों की दुनिया में हुनर सबसे बाद में आता है और खेलों से जुड़ी नियामक संस्थाओं तथा उसकी नौकरशाही का छल और छद्म पहले. खेल संघों के कामकाज और खिलाड़ियों के चयन में भ्रष्टाचार, भेदभाव, साजिशें, भाई-भतीजावाद, शोषण जैसे दोष नयी बातें नहीं हैं, बल्कि ये चीजें परिपाटी की शक्ल ले चुकी हैं.
यही वे कारण हैं, जो सवा अरब लोगों के इस देश को हर ओलिंपिक में पदक-तालिका में बहुत पीछे रहने पर मजबूर करते हैं. पर्याप्त पोषण, प्रशिक्षण, उपकरण और फिर निरंतर कठिन होते मुकाबले में आगे रखने के लिए जरूरी कोचिंग के अभाव से जूझ कर कोई खिलाड़ी अपना काबिलियत साबित करता है, तो भी उसे क्षेत्र, धर्म, जाति, लिंग के आधार पर होनेवाले छुपे-ढके भेदभावों से रोजमर्रा टकराना पड़ता है.
खेलों की नौकरशाही के अलिखित नियमों से बहुत हद तक उसका भाग्य और पदक तालिका में देश का स्थान तय होना है. खेल संघों के नेतृत्व पर नेताओं और सेवानिवृत नौकरशाहों का कब्जा है. उन्हीं की पसंद के प्रशिक्षक और प्रबंधक खेलों का भविष्य तय करते हैं. चूंकि खेल हमारे सार्वजनिक विमर्श में प्राथमिकता नहीं रखते, इसलिए इन बातों पर गंभीरता से चर्चा भी नहीं होती. स्वायत्तता के नाम पर खेल जगत का दारोमदार गैरजिम्मेवार हाथों में है और उनसे किसी तरह की जवाबदेही भी नहीं मांगी जाती.
जरूरत इस बात की है कि खेलों के बेहतर प्रबंधन और अच्छे खिलाड़ियों को तैयार करने का जिम्मा पेशेवर और सक्षम खिलाड़ियों और प्रशिक्षकों को दिया जाये, ताकि वैश्विक स्तर पर हमारी प्रतिभाओं को आत्मविश्वास के साथ अपने दम-खम का जौहर दिखाने का समुचित मौका मिल सके और देश का नाम रोशन हो. नरसिंह जैसे पहलवानों के साथ आगे किसी किस्म का अन्याय नहीं होने देने के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आश्वासन से यह उम्मीद बंधी है कि सरकार खेल संघों में अपेक्षित सुधार की दिशा में समुचित पहल करेगी.
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
विज्ञापन
लेखक के बारे में
By Prabhat Khabar Digital Desk
यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए
विज्ञापन




