वामपंथियों के लिए मंगलमय होगा 2014

देश में बढ़ते भ्रष्टाचार और महंगाई के कारण देश की जनता, देश के दोनों मुख्य राष्ट्रीय दलों कांग्रेस व भाजपा के बजाय दूसरा विकल्प खोज रही है. और इस विकल्प को देने की कोशिश माकपा और अन्य वामपंथी पार्टियां कर रही हैं. वहीं, आम आदमी पार्टी (आप) ने भी देश की प्रमुख पार्टियों के लिए […]
देश में बढ़ते भ्रष्टाचार और महंगाई के कारण देश की जनता, देश के दोनों मुख्य राष्ट्रीय दलों कांग्रेस व भाजपा के बजाय दूसरा विकल्प खोज रही है. और इस विकल्प को देने की कोशिश माकपा और अन्य वामपंथी पार्टियां कर रही हैं.
वहीं, आम आदमी पार्टी (आप) ने भी देश की प्रमुख पार्टियों के लिए मुश्किल पैदा कर दी है. इन तमाम पार्टियों में अगर फर्क करना हो, तो वामपंथी पार्टियों को छोड़ कर किसी में फर्क करना बेहद मुश्किल है.
एक तरफ वामपंथी पार्टियां मुद्दों की राजनीति करती हैं, तो दूसरी तरफ अन्य पार्टियां सत्ता और वोट बैंक की राजनीति करने से पीछे नहीं हटना चाहतीं. और इन तमाम तरह की राजनीति के बीच जनता पिसती चली जाती है. एक तरफ मोदी बनाम राहुल, तो दूसरी तरफ केजरीवाल बनाम मोदी, तो तीसरी नीतीश बनाम प्रकाश करात.
सौरभ कुमार, गोमो
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