21वीं सदी का गंठबंधन बनने की ओर

Updated at : 08 Feb 2016 1:36 AM (IST)
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21वीं सदी का गंठबंधन बनने की ओर

इतिहास में पहले कभी भी दो विविधतापूर्ण और सांस्कृतिक रूप से विशिष्ट शक्तियां वैश्विक भलाई के लिए साझा दृष्टिकोण के द्वारा संगठित नहीं हुई हैं. आनेवाले वर्षों में भारत और अमेरिका को लक्ष्य तक पहुंचाने के लिए बड़े उत्साह की प्रतीक्षा है. एक साल पहले मेरा परिवार और मैं भारत में अमेरिकी राजदूत के रूप […]

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इतिहास में पहले कभी भी दो विविधतापूर्ण और सांस्कृतिक रूप से विशिष्ट शक्तियां वैश्विक भलाई के लिए साझा दृष्टिकोण के द्वारा संगठित नहीं हुई हैं. आनेवाले वर्षों में भारत और अमेरिका को लक्ष्य तक पहुंचाने के लिए बड़े उत्साह की प्रतीक्षा है.

एक साल पहले मेरा परिवार और मैं भारत में अमेरिकी राजदूत के रूप में कार्य करने के लिए 12,000 किलोमीटर दूर उस देश की यात्रा को लेकर बहुत उत्साहित था, जिसे मेरे माता-पिता अपना घर कहते थे. जनवरी 2015 में गणतंत्र दिवस पर मुख्य अतिथि के रूप पहले अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के भारत आगमन की नयी दिल्ली और वाशिंगटन में तैयारियां हो रही थीं. आगामी वर्ष में हमारे देश क्या कार्य कर सकते हैं, उसके लिए एक महत्वाकांक्षी विजन रखते हुए प्रधानमंत्री मोदी और ओबामा ने मानवीय प्रयास के संपूर्ण क्षेत्र में तेजी से सहयोग बढ़ाने का संकल्प किया. मुझे यह बताते हुए गर्व हो रहा है कि 2015 के हमारे प्रयासों के उल्लेखनीय परिणाम मिले हैं, और 2016 से हमें बड़ी आकांक्षाएं हैं.
साल 2015 में अमेरिका और भारत ने ऐतिहासिक रणनीतिक झुकाव को क्रियाशील बनाने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाये. गणतंत्र दिवस के दौरान भारत-प्रशांत क्षेत्र के लिए नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय प्रणालियां बनाने हेतु प्रतिबद्धता पर साझा दृष्टिकोण बना. इन प्रणालियों ने सात दशकों तक शांति-समृद्धि की रक्षा की है. हमारे नेताओं ने साउथ ब्लॉक और वेस्ट विंग के बीच नयी सुरक्षित लाइनों का प्रयोग करते हुए नियमित रूप से तीन बार बात की. स्थायी अमेरिका-भारत-जापान मंत्रिस्तरीय प्रक्रिया की स्थापना करते हुए, हमने लोकतंत्रों के भारत-प्रशांत समुदाय के तीन स्तंभों के बीच बातचीत स्थापित की है.
जनवरी, 2015 में मनोहर पर्रिकर अमेरिकी पैसिफिक कमांड देखनेवाले पहले भारतीय रक्षा मंत्री बने. जून, 2015 में एश्टन कार्टर इंडियन मिलिट्री कमांड देखनेवाले पहले अमेरिकी डिफेंस सेक्रेटरी थे. मालाबार के दौरान हिंद महासागर में पहला जटिल नौसैनिक अभ्यास हमारी बढ़ती भागीदारी का सबूत था और हम जापान का नियमित भागीदार के रूप में स्वागत करते हैं. रक्षा प्रौद्योगिकी और व्यापार योजना के अंतर्गत हमने एयरक्राफ्ट कैरियर और जेट इंजन प्रौद्योगिकी पर संयुक्त कार्यसमूह शुरू किये हैं. हमारे विशेष ऑपरेशंस बल मिल कर प्रशिक्षित करेंगे और भारत के रेड फ्लैग वायु सैनिक अभ्यास में शामिल होने की आशा है. नेपाल भूकंप के बाद हमारे ऐतिहासिक सहयोग ने प्रदर्शित किया है कि हमारा बढ़ता सैनिक अंतर्संचालन मानवीय और आपदा राहत अभियानों में भाग लेने के लिए तैयारी में सहयोग करता है.
अमेरिका और भारतीय अनुसंधानकर्ताओं ने दुनिया की कुछ चिंताजनक स्वास्थ्य और विकास चुनौतियों का समाधान किया है. बीते मार्च में संयुक्त अनुसंधान ने दुनिया के सबसे सस्ते रोटावाइरस टीका शुरू करने में सहायता की, जिससे लाखों जीवन की रक्षा की संभावना है. अमेरिकी सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रीवेंशन ने संक्रामक बीमारियों से लड़ने के लिए भारतीय स्वास्थ्य संस्थानों के साथ भागीदारी के लिए 16 नये समझौतों पर हस्ताक्षर किये हैं. हमने टीबी से लड़ने के लिए नये प्रयास किये हैं, संयुक्त कैंसर अनुसंधान कर रहे हैं और गंभीर इनेसेफेलाइटिस से संघर्षरत हैं. अफ्रीका में हमारे विकास विशेषज्ञ कृषि उत्पादकता बढ़ाने और कुपोषण कम करने के लिए भागीदारी कर रहे हैं.
हमारी तीव्र प्रगति को देखने के लिए कुछ वर्ष पीछे देखने की जरूरत है. वर्ष 2005 में हमारा दोतरफा व्यापार लगभग 30 बिलियन डॉलर था. आज यह 104 बिलियन है. हमारी दृष्टि इस संख्या को बढ़ा कर 500 बिलियन डॉलर करने पर है. पिछले केवल तीन वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार में 5 बिलियन की बढ़ोतरी हुई है, इसमें आगामी पीढ़ी लोकोमोटिव्स के साथ भारत को रेलवे नेटवर्क उपलब्ध कराने के लिए जीइ के लिए 2.6 बिलियन का समझौता शामिल है. इनमें बहुत से भारत में ही बनाये जायेंगे. 2005 में भारत में लगभग 200 अमेरिकी कंपनियां कार्य कर रही थीं, आज इनकी संख्या बढ़ कर 500 से ज्यादा हो गयी है.
इस साल स्ट्रैटजिक एंड कमर्शियल डायलॉग में दोनों देशों के लोगों के लिए अवसर पैदा करने में सहायता हेतु हमारे आर्थिक संबंधों को गहरा और विस्तृत करने के तरीकों पर बातचीत हुई. 2005 में लगभग 30,000 भारतीय छात्र अमेरिका में अध्ययन कर रहे थे. इस वर्ष यह संख्या 1,32,000 हो गयी है. दस साल पहले 4,00,000 के करीब भारतीयों ने अमेरिका का दौरा किया. बीते साल हमने 1 मिलियन (10 लाख) से ज्यादा वीजा आवेदनों पर कार्यवाही की है- यह अब तक के रिकॉर्ड के अनुसार सर्वाधिक है. कुल मिला कर हमारे वाणिज्यिक और लोगों के बीच संबंध मजबूत और विकसित हो रहे हैं.
ओबामा और नरेंद्र मोदी ने जलवायु परिवर्तन को मानवता के लिए गंभीर खतरा माना और एक महत्वाकांक्षी जलवायु समझौता संपन्न करने के लिए अन्य के साथ मिल कर कार्य करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की. हमने फुलब्राइट-इंडिया जलवायु छात्रवृत्ति शुरू की और एडवांस क्लीन एनर्जी (पीएसीइ) अनुसंधान के लिए भागीदारी का विस्तार किया है. इसके साथ ही ऑफ-ग्रिड स्वच्छ ऊर्जा समाधानों के लिए नवप्रवर्तन के वाणिज्यीकरण में तेजी लाने के लिए नये फंड की स्थापना की है. बहुपक्षीय मंच पर संयुक्त राष्ट्र में सतत विकास लक्ष्यों की प्रक्रिया के अंतर्गत हमने जलवायु परिवर्तन का सफलतापूर्वक समाधान किया है. हम सुपर ग्रीनहाउस गैसों के उत्पादन और उपभोग को कम करने के लिए मोंट्रियल प्रोटोकाॅल 2016 के संशोधन अपनाने के लिए कार्य करने हेतु सहमत हुए हैं. इन प्रयासों के परिणामस्वरूप जलवायु परिवर्तन से लड़ने के लिए पेरिस समझौते में सहायता मिली है. यह एक मजबूत, महत्वाकांक्षी, पारदर्शी और जिम्मेवार वैश्विक ढांचा है, जो बताता है कि दुनिया न्यून काॅर्बन की ओर अग्रसर है. हालांकि, वैश्विक तापक्रम को दो डिग्री सेल्सियस से नीचे लाने की यात्रा लंबी और चुनौतीपूर्ण है. भारत और अमेरिका इसके समाधान हेतु वैश्विक प्रयासों का नेतृत्व करने के लिए इतनी बेहतर स्थिति में कभी नहीं रहे.
इन महान परिणामों के इस साल के बाद अमेरिका-भारत संबंध वैश्विक समृद्धि के लिए 21वीं सदी का गंठबंधन बनने की ओर अग्रसर हैं. हमारी भागीदारी आम लोगों की रक्षा कर सकती है, हमारे देशों और दुनिया के युवाओं को सशक्त बना सकती है तथा वैश्विक शांति, समृद्धि और विकास में मदद कर सकती है. हालांकि, अभी भी हमारे कुछ मतभेद हो सकते हैं- जैसे कि करीबी भागीदारों में होता है. इतिहास में पहले कभी भी दो विविधतापूर्ण और सांस्कृतिक रूप से विशिष्ट शक्तियां वैश्विक भलाई के लिए साझा दृष्टिकोण के द्वारा संगठित नहीं हुई हैं. आनेवाले वर्षों में, हमारे देशों को लक्ष्य तक पहुंचाने और महत्वाकांक्षी विकास के लिए बड़े उत्साह की प्रतीक्षा है.
रिचर्ड वर्मा
यूएस एम्बेसडर
delhi@prabhatkhabar.in
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