महापुरुषों पर राजनीति क्यों?

वर्ष 2016 में युग पुरुष स्वामी विवेकानंद की 153वीं जयंती मनायी गयी. उनके जन्म दिवस 12 जनवरी को युवा दिवस के रूप में भी हम जानते है. स्वामीजी ने पूरे भारत का िसर विश्व में गर्व से ऊंचा किया है. उनके दिये गये हर उपदेश आज भी हर एक के जहन में हैं. उन्होंने हमें […]
वर्ष 2016 में युग पुरुष स्वामी विवेकानंद की 153वीं जयंती मनायी गयी. उनके जन्म दिवस 12 जनवरी को युवा दिवस के रूप में भी हम जानते है. स्वामीजी ने पूरे भारत का िसर विश्व में गर्व से ऊंचा किया है. उनके दिये गये हर उपदेश आज भी हर एक के जहन में हैं. उन्होंने हमें यह पाठ भी पढ़ाया की किस तरह हम एक छोटी-सी जिंदगी में भी बड़े काम कर सकते हैं.
जैसे उन्होंने मात्र 39 वर्ष की उम्र में किया. लेकिन, आज उनके नाम पर भी राजनीति हो रही है. राजनीतिक पार्टियां उनके नाम पर राजनीति करना नहीं भूलती. इन महापुरुषों के नाम पर योजनाएं बनाना भूल जाती हैं. आज भी इन महापुरुषों के नाम पर सरकार के पास योजनाएं क्यों नहीं हैं. क्या स्वामी जी अगर किसी राजनीतिक पार्टी से जुड़े होते, तो ही उनके नाम पर योजनाओं का नाम रखा जाता?
-सुमंत चौधरी, जमशेदपुर
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