अरे नासमझ!तू चारा क्यों नहीं खा रही है ?

Published at :12 Oct 2013 2:34 AM (IST)
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अरे नासमझ!तू चारा क्यों नहीं खा रही है ?

।।कुमार आशीष।।(प्रभात खबर, भागलपुर) सुबह-सुबह मोहल्ले के मुन्ना भाई के फोन से नींद खुली. मुन्ना भाई ने खैरियत पूछने के बजाय बताया कि पत्रकार साहब कहां हो नुक्कड़ पर आओ गजब हो गया है. मैं भी फोन काटते ही उठा और टेबुल पर पड़ी चाय की प्याली को देखते-देखते बाहर निकल गया. नुक्कड़ पर पहुंचने […]

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।।कुमार आशीष।।
(प्रभात खबर, भागलपुर)

सुबह-सुबह मोहल्ले के मुन्ना भाई के फोन से नींद खुली. मुन्ना भाई ने खैरियत पूछने के बजाय बताया कि पत्रकार साहब कहां हो नुक्कड़ पर आओ गजब हो गया है. मैं भी फोन काटते ही उठा और टेबुल पर पड़ी चाय की प्याली को देखते-देखते बाहर निकल गया. नुक्कड़ पर पहुंचने से पहले ही मुन्ना भाई को लोगों से घिरे देखा तो लगा कि जरूर किसी खास व्यक्ति के घर में चोरी हुई है, वरना मुन्ना भाई कहां बगैर किसी मतलब के आम लोगों के बीच खड़े मिलते है. मेरे नुक्कड़ पर पहुंचते ही मुन्ना भाई और भीड़ मेरी तरफ मुखातिब हो गये. लोगों ने बताना शुरू किया कि चुन्ना की गाय ने चारा खाने से मना कर दिया है.

सुबह से ही चुन्ना भाई ने डॉक्टर का इलाज व तरियामा वाले ओझा से टोटका करा कर देख लिया है, लेकिन गाय चारा खाने के लिए टस से मस नहीं हो रही है. भीड़ में से किसी ने कहा चल कर खुद देख लीजिए, क्या आफत है. चुन्ना का पूरा परिवार दूध बेच कर ही गुजारा करता है, गाय कुछ खायेगी नहीं तो दूध कहां से देगी. चुन्ना के दरवाजे पर उसकी मां बार-बार अखबार वाले हॉकर को बुरा-भला कहे जा रही थी. मेरे पत्रकार मन ने चुन्ना से पूरी बात जानने को विवश कर दिया. कुरेदने पर उसने बताया कि भाई साहब, रात तक गाय बिल्कुल सामान्य थी, लेकिन रोजाना अखबार वाला आंगन में अखबार देता था, आज गाय की नादी के पास अखबार रख कर चला गया. जब तक वापस मैं चारा डालने गया तो गाय अखबार को पलट कर सुस्त पड़ चुकी थी.

चुन्ना हाय तौबा मचाये जा रहा था कि कल तक निरक्षर व नासमझ मेरी गाय को अखबार में छपी खबर किसने पढ़ा दी. बेचारी गाय तब से खूंटे में बंधे मायूस बैठे चारे को निहार रही है. मैंने भी कई बार गाय को पुचकारने की कोशिश की, लेकिन वह ऐतिहासिक इमारत की तरह मुझे घूरे जा रही थी. यह खबर फैलने की देर थी कि डीलर की दुकान की तरह चुन्ना के दरवाजे पर मोहल्ले के लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी थी. झोला वाले डाक्टर बड़ी-सी सूई गाय को दे चुके थे. किसी दवा का पूरा एक पत्ता गाय को बलपूर्वक खिलाया जा चुका था. बैद्य जी से पूछ कर रसायन बटी को कांड़ी में घोल कर मिलाने की तैयारी चल रही थी. गाय के बच्चे को आगे-पीछे किया जा रहा था कि उसको देख कर शायद गाय चेतना में लौटे. पर सब वेकार.

गाय के चारों ओर जमे लोग तरह-तरह की बातें कर रहे थे. कोई राजनेता को तो कोई अखबार बेचने वाले को नासमझ बता दूसरे के तर्क को बकवास कह रहे थे. जिसमें एक बात कॉमन थी सब अपने निशाने पर अखबार वाले हॉकर को लेकर ही कोसे जा रहे थे. तभी मुन्ना सामने आकर बोला चाहे जो हो जाये मोहल्ले वाली बात है, इस खबर को आप अखबार में छाप दीजिए कि फिर कोई चारे का सरेआम मजाक न बनाये, वरना चुन्ना जैसे कितने लोगों की गाय बगैर खाना के भूखे ही दम तोड़ देगी.

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