टीआरपी के आगे हाशिये पर दर्शक
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :06 Aug 2015 1:11 AM (IST)
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प्रख्यात जनसंचार शास्त्री मार्शल मेक्लुहान ने कहा है कि माध्यम ही संदेश है. आज मीडिया की स्थिति को देख कर यह कहना गलत नहीं कि स्वामित्व ही संदेश है. आज मीडिया संस्थानों के मालिकों द्वारा तय किये गये विचार ही दिखाये और पढ़ाये जाते हैं. टीआरपी की वास्तविकता जानने के लिए एक राष्ट्रीय स्तर का […]
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प्रख्यात जनसंचार शास्त्री मार्शल मेक्लुहान ने कहा है कि माध्यम ही संदेश है. आज मीडिया की स्थिति को देख कर यह कहना गलत नहीं कि स्वामित्व ही संदेश है. आज मीडिया संस्थानों के मालिकों द्वारा तय किये गये विचार ही दिखाये और पढ़ाये जाते हैं.
टीआरपी की वास्तविकता जानने के लिए एक राष्ट्रीय स्तर का सर्वेक्षण किया गया. तमाम कमियों एवं आलोचनाओं के बावजूद टीआरपी के आंकड़ों से ही टीवी मीडिया संचालित हो रहा है. मीडिया संस्थानों को टीआरपी के आंकड़ों के अनुसार अपनी सामग्री बनानी है. ऐसे दौर में दर्शक हाशिए पर जा रहा है.
मीडिया के संचालन के लिए पूंजी की जरूरत होती है. यह बाजार से प्राप्त होती है. इसीलिए मीडिया को बाजार संचालित करता है. यह नहीं बताता की कौन-सा चैनल, कौन-सा कार्यक्र म नंबर वन है.
सतीश कुमार सिंह, रांची
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