जनता के लिए विकास एक दिवास्वप्न
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :23 Jun 2015 5:39 AM (IST)
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प्रतिवर्ष केंद्र एवं राज्य सरकार द्वारा प्रशासनिक अधिकारियों की नियुक्ति के लिए प्रतिष्ठित और कठिन परीक्षाओं का आयोजन किया जाता है, लेकिन क्या कारण है कि इन परीक्षाओं को उत्तीर्ण करके अधिकारी बननेवालों की प्रतिष्ठा दिनानुदिन कम हो रही है? कई पर आय से अधिक संपत्ति रखने, रिश्वत लेने के मामले चल रहे हैं, तो […]
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प्रतिवर्ष केंद्र एवं राज्य सरकार द्वारा प्रशासनिक अधिकारियों की नियुक्ति के लिए प्रतिष्ठित और कठिन परीक्षाओं का आयोजन किया जाता है, लेकिन क्या कारण है कि इन परीक्षाओं को उत्तीर्ण करके अधिकारी बननेवालों की प्रतिष्ठा दिनानुदिन कम हो रही है?
कई पर आय से अधिक संपत्ति रखने, रिश्वत लेने के मामले चल रहे हैं, तो कई पर अनैतिक गतिविधियों और भ्रष्टाचार में लिप्त होने का केस दर्ज है. अपने पद की शक्ति और अधिकार का प्रयोग जनहित में न करके स्वहित में किया जा रहा है.
इन परीक्षाओं में व्यक्ति के ज्ञान के दायरे को तो मापा जाता है, परंतु नैतिक मूल्यों एवं जनसेवा की भावना को मापने का कोई पैमाना नहीं है. परिणामत: किसी भी तरह धन संग्रह करना ही इनका एकमात्र उद्देश्य बन जाता है और जनता के लिए विकास और परिवर्तन एक दिवास्वप्न ही रह जाता है.
नवनीत कौर सामरा, बेरमो, बोकारो
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