जवाबदेही के नाम पर खानापूरी न करें

Published at :10 Feb 2015 5:41 AM (IST)
विज्ञापन
जवाबदेही के नाम पर खानापूरी न करें

बिहार, झारखंड और देश के अन्य राज्यों में आज भी नि:शक्तता ऐसे बच्चों के लिए अभिशाप बनी है, जो जन्मजात नि:शक्त हैं अथवा बाद में दुर्घटनावश नि:शक्त हुए हैं. नि:शक्त होने का अर्थ उनके व्यक्तित्व के साथ एक अपशब्द जुड़ जाने जैसा है. आज भी हमारे समाज से ऐसे अपशब्दों का समूल सफाया नहीं हो […]

विज्ञापन
बिहार, झारखंड और देश के अन्य राज्यों में आज भी नि:शक्तता ऐसे बच्चों के लिए अभिशाप बनी है, जो जन्मजात नि:शक्त हैं अथवा बाद में दुर्घटनावश नि:शक्त हुए हैं. नि:शक्त होने का अर्थ उनके व्यक्तित्व के साथ एक अपशब्द जुड़ जाने जैसा है. आज भी हमारे समाज से ऐसे अपशब्दों का समूल सफाया नहीं हो सका है.
यह कोई रोग नहीं है, बल्कि यह समाज का पूर्वाग्रह है, जो बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहा है. समाज की यह अवधारणा बच्चों और व्यक्ति के भविष्य में जटिलताओं को पैदा कर रही है. नि:शक्तों को सुविधा देने और पुनर्वास के नाम पर सरकार की ओर से महज खानापूरी की जा रही है. नि:शक्तों के पुनर्वास और उन्हें सुविधा दिलाने के लिए आवाज उठानेवालों की तादाद आज भी कम है. यदा-कदा आवाज उठती भी है, तो वह कुएं की आवाज की तरह दब कर रह जाती है.
सौरभ कुमार, पटना
विज्ञापन
Prabhat Khabar Digital Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola