सुरक्षा बलों के कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी

Published at :11 Nov 2014 11:59 PM (IST)
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सुरक्षा बलों के कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी

लोकतंत्र के महापर्व की तैयारी में राज्य की तमाम मशीनरी जुटी है. चुनाव शांतिपूर्वक संपन्न हो, इसके लिए जोरशोर से तैयारियां की जा रही हैं. अधिकारी से लेकर कर्मचारी तक इस काम में लगे हैं. लेकिन इसके उलट कुछ अतिवादी संगठन चुनाव के दौरान गड़बड़ी फैलाने की कोशिश में लगे हैं. विशेष कर नक्सल प्रभावित […]

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लोकतंत्र के महापर्व की तैयारी में राज्य की तमाम मशीनरी जुटी है. चुनाव शांतिपूर्वक संपन्न हो, इसके लिए जोरशोर से तैयारियां की जा रही हैं. अधिकारी से लेकर कर्मचारी तक इस काम में लगे हैं.

लेकिन इसके उलट कुछ अतिवादी संगठन चुनाव के दौरान गड़बड़ी फैलाने की कोशिश में लगे हैं. विशेष कर नक्सल प्रभावित इलाकों में. कई इलाकों में नक्सलियों ने तो चुनाव बहिष्कार की घोषणा भी कर रखी है. लेकिन पुलिस प्रशासन की ओर से भी नक्सलियों के मंसूबे को नाकाम करने की कार्रवाई लगातार की जा रही है.

चुनाव से पहले नक्सलियों के खिलाफ चलाये जा रहे अभियान में भारी मात्र में लैंडमाइंस बनाने का सामान मिला है. ग्रामीणों की सूचना पर पुलिस ने लातेहार के कुमंडीह इलाके से 1745 डेटोनेटर, 154 प्रेशर कुकर, 123 स्टील टिफिन, एक आयरन कटर मशीन समेत बम व बम बनाने के सामान बरामद किया. पुलिस ने इन सामानों को जंगल में ले जाकर नष्ट कर दिया. लैंडमाइंस बनाने के लिए इन सामग्रियों को छिपा कर रखा गया था. इसे बरामद कर पुलिस ने नक्सलियों की योजना को विफल कर दिया. नक्सलियों ने चुनाव के दौरान विस्फोट करने की साजिश की थी. बहरहाल चुनाव से ठीक पहले इतनी बड़ी मात्र में नक्सलियों के गढ़ से जखीरा बरामद होना कई सवालों को जन्म देता है.

आखिर इतनी बड़ी मात्र में जंगल में विस्फोटक कैसे पहुंचे. किस काम के लिए इसका उपयोग होना था. एक दिन में तो इतने विस्फोटक जंगल नहीं ही पहुंचाये जा सकते. जाहिर है, इसमें कई लोगों की संलिप्ता होगी. इन तमाम बिंदुओं पर पुलिस को गौर करने की आवश्यकता है. यह काफी सुकूनवाली बात है कि पुलिस ने समय रहते विस्फोटकों को बरामद कर लिया. अभी तो चुनावी प्रक्रिया की शुरुआत ही हुई है. आगे जब मतदान होंगे और लोग घर से निकल कर दूर-दराज के इलाके में वोट देने जायेंगे, तब वैसी स्थिति में और भी सतर्कता बरतने की आवश्यकता है. पुलिस-प्रशासन को इसके लिए विशेष रूप से तैयार रहने की जरूरत है. जितनी अच्छी प्लानिंग होगी, उतनी कम हिंसा होगी. चुनाव के दौरान इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए सावधान और सचेत रहने की जरूरत है. तभी झारखंड में बुलेट पर बैलेट की असली जीत होगी.

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