देश की एकता के लिए यह शुभ नहीं
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :15 Sep 2014 8:10 AM (IST)
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मणिपुर एनआइटी में बिहारी छात्रों की पिटाई, उन्हें बंधक बनाने और प्रताड़ित करने की घटना ने महाराष्ट्र में मनसे या शिव सेना द्वारा अक्सर हिंदी भाषियों पर किये जाने वाले हमलों की खौफनाक यादें ताजा कर दी हैं. मणिपुर एनआइटी में जून माह में भी ऐसी घटनाएं घटित हुई थीं. ताजा विवाद हॉस्टल के मेस […]
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मणिपुर एनआइटी में बिहारी छात्रों की पिटाई, उन्हें बंधक बनाने और प्रताड़ित करने की घटना ने महाराष्ट्र में मनसे या शिव सेना द्वारा अक्सर हिंदी भाषियों पर किये जाने वाले हमलों की खौफनाक यादें ताजा कर दी हैं. मणिपुर एनआइटी में जून माह में भी ऐसी घटनाएं घटित हुई थीं. ताजा विवाद हॉस्टल के मेस में सब्जी मांगने (मामूली विवाद) को लेकर हुआ. इसके बाद स्थानीय छात्रों ने बिहार के छात्रों की पिटाई कर दी.
इस घटना से यह सवाल उठ रहा है कि पूर्वोत्तर के राज्यों में हिंदी भाषियों के प्रति जिस तरह के नफरत के बीज अलगाववादी संगठनों ने अपने राजनीतिक हित के लिए बोये हैं, कहीं उसका थोड़ा-बहुत असर कैंपसों पर भी तो नहीं दिखने लगा है? यदि ऐसी स्थिति है, तो यह सचमुच खतरनाक है. पूर्वोत्तर का इलाका लंबे समय से अशांत है. असम के उग्रवादी संगठन नेशनल डेमोक्रेटिक फ्रंट ऑफ बोडोलैंड ने तो हिंदी भाषियों के खिलाफ हिंसक अभियान ही छेड़ा हुआ है.
मणिपुर में भी ऐसे कई अलगाववादी गुट हैं, जो बाहर से आकर बसे लोगों को निशाना बनाते रहे हैं. वहां के शैक्षणिक कैंपस इससे अब तक अछूते थे. यदि कैंपसों में भी हिंदी भाषियों को लक्षित कर हमले शुरू हुए हैं, तो सावधान हो जाने की जरूरत है. अलग-अलग परिवेश और पृष्ठभूमि से आने के कारण कैंपसों में रहन-सहन व आचार-विचार में भिन्नता हो सकती है.
वैचारिक भिन्नता भी स्वाभाविक है. लेकिन, किसी भाषा या प्रदेश को लक्षित कर मारपीट, बंधक बनाने और प्रताड़ित करने को किसी भी रूप में सही नहीं ठहराया जा सकता है. यह नहीं भूलना चाहिए कि भारत विविधताओं वाला देश है. यहां कोस-कोस पर बानी (बोलचाल, भाषा) बदलती है. कई तरह की भाषाएं, अलग-अलग संस्कृति और परिधान, अलग-अलग धर्म व खानपान भारत की खूबसूरती है. यह सुकून पहुंचाने वाली बात है कि मणिपुर में बिहार के छात्रों की पिटाई पर दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने कड़ा रुख अख्तियार किया है. मणिपुर के मुख्यमंत्री ने खुद कैंपस का निरीक्षण कर छात्रों को सुरक्षा का भरोसा दिलाया. लेकिन, बाहरी छात्रों की सुरक्षा के साथ-साथ अविश्वास का माहौल खत्म करने के लिए राजनीतिक दलों और छात्र संगठनों को भी आगे आना होगा.
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