और कितनी लापरवाह

Updated at : 29 Nov 2018 12:19 AM (IST)
विज्ञापन
और कितनी लापरवाह

हम दिन-प्रतिदिन लापरवाह हो रहे हैं. हम सोचते हैं कि थोड़ी लापरवाही से क्या होगा, मगर हम अल्पकालिक खुशी के लिए अपनों के साथ और इस वातावरण के बड़े हितों के साथ खिलवाड़ कर रहे है. बहुत-से शहरों में पहले से ही दम घुटने वाली हवा मौजूद है. फिर भी हमने बेतहाशा आतिशबाजी की और […]

विज्ञापन
हम दिन-प्रतिदिन लापरवाह हो रहे हैं. हम सोचते हैं कि थोड़ी लापरवाही से क्या होगा, मगर हम अल्पकालिक खुशी के लिए अपनों के साथ और इस वातावरण के बड़े हितों के साथ खिलवाड़ कर रहे है.
बहुत-से शहरों में पहले से ही दम घुटने वाली हवा मौजूद है. फिर भी हमने बेतहाशा आतिशबाजी की और इस वातावरण को जानलेवा बना दिया. मालूम है कि हम आगे भी थमने वाले नहीं हैं.
अभी तो बड़ा दिन व नये साल का जश्न बाकी है और बिना आतिशबाजी का जश्न तो मनाया ही नहीं सकते, यह हमलोगों ने तय कर लिया है. ऐसा करते-सोचते वक्त हम यह भूल रहे हैं कि हमारे बीच बहुत सारे ऐसे लोग और बच्चे हैं, जो सांस की बीमारी से पहले से परेशान हैं.
कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं अपने अध्ययनों के जरिए लगातार आगाह कर रही हैं कि हमारे वातावरण में मौजूद हवा अब सांस लेने लायक नहीं रह गयी है, फिर भी हम चेत नहीं रहे हैं. हमारा ऐसा जश्न आनेवाली पीढ़ी के लिए तो परोक्ष रूप से मौत की सौगात ही है.
अवधेश कुमार, कोलकाता
विज्ञापन
Prabhat Khabar Digital Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola