बहुत कमी खलेगी बागुन दा की ....

Updated at : 23 Jun 2018 4:35 AM (IST)
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बहुत कमी खलेगी बागुन दा की ....

II अनुज कुमार सिन्हा II बागुन नहीं रहे. लंबे समय से बीमार थे. खबर मिलते ही बागुन दा की पुरानी बातें याद आने लगीं. मैं 1995 से लेकर 2010 तक लगातार जमशेदपुर में था आैर इसी नाते हर माह में एक या दाे बार चाईबासा जाता ही था. जब कभी माैका मिला, उनसे मिलता था. […]

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II अनुज कुमार सिन्हा II
बागुन नहीं रहे. लंबे समय से बीमार थे. खबर मिलते ही बागुन दा की पुरानी बातें याद आने लगीं. मैं 1995 से लेकर 2010 तक लगातार जमशेदपुर में था आैर इसी नाते हर माह में एक या दाे बार चाईबासा जाता ही था.
जब कभी माैका मिला, उनसे मिलता था. झारखंड आंदाेलन के पुराेधा बागुन दा जिंदादिल इंसान थे. 1963 में जब झारखंड पार्टी का कांग्रेस में जयपाल सिंह ने विलय कर दिया था, तब बागुन दा ने विराेध किया था आैर वे उस समय कांग्रेस में नहीं गये थे बल्कि झारखंड पार्टी काे जिंदा रखा था. सिर्फ पार्टी काे ही नहीं बल्कि झारखंड आंदाेलन काे जिंदा रखा था.
झारखंड आंदाेलन का वह बड़ा महत्वपूर्ण समय था आैर आंदाेलन काे जिंदा रखना बड़ी चुनाैती थी. काेई किसी भी दल में हाे, बागुन दा काे सभी प्यार करते थे. दरअसल वे दल से ऊपर थे.
जाे मन किया, बाेल दिया, काेई बुरा मानता नहीं था. वे ताे गुरुजी या शिबू साेरेन के भी गुरू थे. शायद 1967-68 की बात हाेगी. तब शिबू साेरेन ने जरीडीह (बाेकाराे) में एक कार्यक्रम किया था. उसमें बागुन दा काे उन्हाेंने बुलाया था. खुद गुरूजी बागुन दा की बहुत इज्जत किया करते थे.
2002 में चाईबासा के एक कार्यक्रम था. तब मधुकाेड़ा सिर्फ विधायक थे, मुख्यमंत्री नहीं बने थे. कार्यक्रम में बागुन दा थे, मधु काेड़ा थे, चांपिया जी समेत सिहंभूम के कई दिग्गज नेता थे.
कार्यक्रम में मुझे भी जमशेदपुर से बाेलने के लिए बुलाया गया था. विषय था-चाईबासा में रेल सुविधा बढ़ाने के लिए आंदाेलन. बड़ा आंदाेलन चला था आैर उसी का फल था कि चाईबासा में रेल सुविधा बढ़ाई गयी थी. स्टेज पर बागुन दा हंसी-मजाक खूब किया करते थे. वे मेरे ही बगल में बैठे थे. बीच में मैं था. एक आेर बागुन दा आैर दूसरी आेर मधु काेड़ा थे. तब मधु काेड़ा की शादी नहीं हुई थी.
स्टेज पर मजाक में ही कहा था-ए सिन्हा जी, एगाे लड़की देखिए न मधु काेड़ा के लिए. ये शादी नहीं कर रहा है. हमलाेग मिल कर इसकी शादी करायेंगे. जरूरी है. उनके बाेलने के बाद स्टेज पर सभी ने ठहाका लगाय था. ऐसे जिंदादिल इंसान थे बागुन दा. ऐसे बागुन दा की कमी झारखंड काे बहुत खलेगी. बागुन दा काे श्रद्धांजलि.
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