वंदे मातरम् के अपमान पर अब 3 साल तक की जेल, संसद से बिल पास

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संसद भवन में हंगामे के बीच वंदे मातम् संशोधन बिल पास

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संसद ने 'राष्ट्र गौरव अपमान निवारण (संशोधन) बिल हंगामे के बीच पास हो गया. अब राष्ट्रगीत 'वंदे मातरम्' का जानबूझकर अपमान करने पर 3 साल तक की जेल या जुर्माना लगाया जा सकता है.

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संसद में गुरुवार ( 30 जून ) को 'राष्ट्र गौरव अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक, 2026' को मंजूरी दे दी. इस कानून के तहत राष्ट्रगीत 'वंदे मातरम्' के गायन में जानबूझकर बाधा डालना, अपमान करना या सम्मान को ठेस पहुंचाना अब दंडनीय अपराध माना जाएगा. पीटीआई न्यूज एजेंसी के मुताबित, इसमें दोषी पाए जाने पर 3 साल तक की जेल, जुर्माना या दोनों की सजा हो सकती है.

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राष्ट्रगान जैसा मिलेगा सम्मान

गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने कहा कि इस कानून का उद्देश्य 'वंदे मातरम्' को वही सम्मान दिलाना है जो राष्ट्रगान 'जन गण मन' को प्राप्त है. उन्होंने कहा कि यह विधेयक किसी व्यक्ति, राज्य या विचारधारा के खिलाफ नहीं, बल्कि राष्ट्र गौरव और राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने वाला कदम है.

संसद में डीएमके सांसद के कनिमोई ने राष्ट्र गौरव अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक, 2026 पर कड़ा विरोध दर्ज कराया. उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी सरकार इसके साथ हिंदुत्व के एजेंडे को राष्ट्रीयता के रूप में पेश कर रही है. उन्होंने कहा कि यह देश के नागरिकों के विरुद्ध है. इस तरह राष्ट्रवाद नहीं थोपा जा सकता. कनिमोई ने विधेयक को संघीय ढांचे के विरुद्ध बताते हुए यह भी कहा कि विभिन्न मुद्दों पर सदन में हंगामे के बीच विधेयक को पारित नहीं किया जाना चाहिए. उन्होंने इसे राज्यों के हितों के और धर्मनिरपेक्षता के खिलाफ बताया.

विपक्ष ने जताया कड़ा विरोध

विधेयक पर चर्चा के दौरान द्रमुक समेत विपक्षी दलों ने विरोध किया. द्रमुक सांसद के कनिमोई ने आरोप लगाया कि सरकार राष्ट्रवाद के नाम पर अपनी विचारधारा थोप रही है. वहीं ए. राजा ने इसे संघीय ढांचे और धर्मनिरपेक्षता के खिलाफ बताते हुए संशोधन पेश किया, जिसे सदन ने खारिज कर दिया.

इतिहास का दिया गया हवाला

भाजपा सांसद संबित पात्रा ने संविधान सभा में 24 जनवरी 1950 को डॉ. राजेंद्र प्रसाद के उस वक्तव्य का उल्लेख किया, जिसमें 'वंदे मातरम्' को 'जन गण मन' के समान सम्मान देने की बात कही गई थी. सरकार का कहना है कि अब उसी भावना को कानूनी रूप दिया गया है.

क्या बदलेगा नए कानून से?

साल 1971 के मूल अधिनियम में संशोधन के बाद अब राष्ट्रगीत के अपमान या उसके गायन में बाधा डालने पर स्पष्ट कानूनी कार्रवाई संभव होगी. केंद्र सरकार का दावा है कि यह कानून राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान को और मजबूत करेगा, जबकि विपक्ष इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और संघीय व्यवस्था से जुड़ा संवेदनशील मुद्दा बता रहा है.

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