हिंदू नववर्ष आज से, मंगल के मकर राशि में प्रवेश से कोरोना से मिलेगी राहत

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हिंदू नववर्ष 2077 बुधवार से शुरू हो रहा है. इसके साथ ही नौ दिवसीय नवरात्रि भी शुरू हो जायेगी. ज्योतिषाचार्य सुशील पुरोहित ने बताया कि रेवती नक्षत्र और मीन राशि की चंद्रमा के गोचर में हो रहा है, यह संयोग देश के लिए अति शुभ रहेगा. नया साल चैत्र मास की शुक्ल प्रतिपदा से प्रारंभ होता है.

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कोलकाता : हिंदू नववर्ष 2077 बुधवार से शुरू हो रहा है. इसके साथ ही नौ दिवसीय नवरात्रि भी शुरू हो जायेगी. ज्योतिषाचार्य सुशील पुरोहित ने बताया कि रेवती नक्षत्र और मीन राशि की चंद्रमा के गोचर में हो रहा है, यह संयोग देश के लिए अति शुभ रहेगा. नया साल चैत्र मास की शुक्ल प्रतिपदा से प्रारंभ होता है. इस बार यह तिथि 25 मार्च को है यानी उस दिन परिधावी संवत्सर की विदाई और ‘प्रमादी’ नामक संवत्सर का शुभारंभ होनेवाला है. इसके राजा बुध और मंत्री चंद्र हैं.

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उन्होंने कहा कि बुधवार को मंगल का मकर राशि में प्रवेश हो रहा है तथा मंगल राहु का समसप्तक स्थिति समाप्त होगा. इससे कोरोना वायरस के समाधान की प्रबल संभावना है. उन्होंने कहा कि किसी भी दवाई या वैज्ञानिक अविष्कार या खोज का कारक ग्रह राहू होता है चूंकि अभी राहु का परम शत्रु ग्रह मंगल आमने सामने अर्थात ज्योतिषी भाषा में सम सप्तक थे, जिसके कारण राहु केतु जनित इस महामारी की दवा खोज नहीं पाया था, क्योंकि राहु से मंगल समसप्तक होने के कारण अग्नि कारक मंगल ग्रह अग्नि तत्व की राशि धनु अपनी अग्नि से राहू को अत्यंत कमजोर कर दिया था.

बुधवार से मंगल के मकर राशि में प्रवेश से राहु मंगल की समसप्तक अर्थात आमने-सामने की स्थिति समाप्त हो गयी है, जिससे अब वैज्ञानिक खोज का कारक ग्रह राहु बहुत जल्द ही इस वैश्विक महामारी कोरोना वायरस का जल्द ही इलाज खोज लिया जायेगा. उन्होंने बताया वायरस प्रभाव जब तक गोचर में गुरु केतु की युती सितंबर 2020 तक रहेगी तब तक विश्व में छींट पुट इसके केस मिलते रहेंगे. उन्होंने कहा कि 26 दिसंबर को मूल नक्षत्र धनु राशि में सूर्य ग्रहण के साथ ही कोरोना वायरस का प्रकोप शुरू हुआ था. सूर्यग्रहण का प्रभाव कम से कम तीन माह तक रहता है.

31 मार्च से वृहस्पति मकर राशि में प्रवेश करेगा और इसी दिन मंगल धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश होगा. उससे वायरस का प्रकोप थोड़ा कम होगा. 13 अप्रैल से सूर्य मेष राशि से उच्च राशि के हो जायेंगे. इससे वायरस से पीड़ित व्यक्तियों का ठीक होना शुरू हो जायेगी. 19 अप्रैल से 21 जून तक तापमान भी बढ़ जायेगा. यह भी वायरस के प्रभाव को कम करेगा. 23 सितंबर को केतु विश्चक राशि में प्रवेश करेगा. इससे सितंबर के अंत तक इसका प्रभाव पूरी तरह खत्म होने की सं‍भावना है.

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