एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा ने Operation Sindoor में पाकिस्तानी मिसाइल हमला किया था नाकाम, जानिए उनकी उपलब्धियां

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अयोध्या राम मंदिर, गोल घेरे में रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा की फोटो- एएनआई और एक्स

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पश्चिमी वायु कमान की जिम्मेदारी संभालने वाले एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को अब अयोध्या में नई भूमिका मिली है. पाकिस्तानी मिसाइल हमले को नाकाम करने वाले इस अनुभवी सैन्य अधिकारी को राम मंदिर की प्रशासनिक व्यवस्था संभालने की जिम्मेदारी सौंपी गई है.

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ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पश्चिमी मोर्चे पर भारतीय वायुसेना की कमान संभालने वाले रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा अब अयोध्या राम मंदिर की व्यवस्था देखेंगे. श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने उन्हें राम मंदिर का पहला पूर्णकालिक मुख्य कार्यपालक अधिकारी (CEO) बनाया है. करीब चार दशक तक लड़ाकू विमानों, एयरबेस और सैन्य अभियानों से जुड़ी जिम्मेदारियां निभाने के बाद अब मिश्रा राम मंदिर के प्रशासन और रोजमर्रा के संचालन की कमान संभालेंगे.

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ऑपरेशन सिंदूर के समय पश्चिमी मोर्चे के थे प्रमुख

जितेंद्र मिश्रा ने 1 जनवरी 2025 को भारतीय वायुसेना की पश्चिमी मोर्चे (Western Air Command) की कमान संभाली थी. मई 2025 में जब ऑपरेशन सिंदूर हुआ था, उस समय वे एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ के पद पर थे, यानी पाकिस्तान से लगे पश्चिमी क्षेत्र में वायुसेना के अहम अभियानों की जिम्मेदारी वहीं संभाल रहे थे. ऑपरेशन सिंदूर में उनकी भूमिका के लिए उन्हें सर्वोत्तम युद्ध सेवा पदक से भी सम्मानित किया गया.

एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा ने भारतीय वायुसेना की पश्चिमी वायु कमान की जिम्मेदारी संभाली थी.

  • इस अभियान के दौरान पश्चिमी मोर्चे पर वायु अभियानों और एयर डिफेंस की जिम्मेदारी उनके नेतृत्व में थी.
  • पश्चिमी क्षेत्र में S-400 एयर डिफेंस सिस्टम की तैनाती और उससे जुड़े ऑपरेशनल फैसला लेना.
  • ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान की ओर से फतह मिसाइल से दिल्ली को निशाना बनाने की कोशिश की गई थी. लेकिन भारतीय वायुसेना ने इस मिसाइल को दिल्ली तक पहुंचने से पहले आसमान में ही मार गिराया था.
  • जितेंद्र मिश्रा की कमान में वायुसेना ने पश्चिमी सीमा पर निगरानी, एयर डिफेंस और जवाबी कार्रवाई से जुड़े अभियान संभाले.

3000 घंटे से ज्यादा उड़ान का अनुभव

जितेंद्र मिश्रा का सैन्य करियर 6 दिसंबर 1986 को शुरू हुआ था, जब वे भारतीय वायुसेना में फाइटर पायलट के रूप में कमीशन हुए थे. रक्षा मंत्रालय के मुताबिक वे नेशनल डिफेंस एकेडमी, एयर फोर्स टेस्ट पायलट्स स्कूल, एयर कमांड एंड स्टाफ कॉलेज, USA और रॉयल कॉलेज ऑफ डिफ़ेंस स्टडीज, यूके के पूर्व छात्र हैं.

वे फाइटर कॉम्बैट लीडर और प्रायोगिक परीक्षण पायलट (Experimental Test Pilot) भी रहे हैं. अपने लंबे करियर में उन्होंने फाइटर स्क्वाड्रन की कमान, दो फ्रंटलाइन एयरबेस की जिम्मेदारी और एयरक्राफ्ट एंड सिस्टम्स टेस्टिंग एस्टेब्लिशमेंट में महत्वपूर्ण पद संभाले हैं. वे इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ (ऑपरेशन्स) के डिप्टी चीफ भी रहे हैं.

30 अप्रैल 2026 को वायुसेना से हुए रिटायर

जितेंद्र मिश्रा 30 अप्रैल 2026 को भारतीय वायुसेना से सेवानिवृत्त हुए. उनका सैन्य करियर करीब 39 साल का रहा. उन्हें सर्वोत्तम युद्ध सेवा पदक के अलावा अति विशिष्ट सेवा पदक और विशिष्ट सेवा पदक से भी सम्मानित किया जा चुका है. अब रिटायरमेंट के कुछ महीनों बाद ही उन्हें देश के सबसे प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल राम मंदिर की प्रशासनिक व्यवस्था संभालने की जिम्मेदारी दी गई है.

5,585 आवेदनों के बाद कैसे हुआ चयन?

राम मंदिर के CEO पद के लिए देशभर से कुल 5,585 आवेदन आए थे. तीन सदस्यीय सर्च कमेटी ने आवेदनों की जांच और चयन प्रक्रिया के बाद तीन नामों का अंतिम पैनल ट्रस्ट को सौंपा था. इसके बाद ट्रस्ट की बैठक में जितेंद्र मिश्रा के नाम पर मुहर लगाई गई.

राम मंदिर में क्या होगी जितेंद्र मिश्रा की जिम्मेदारी?

CEO के रूप में जितेंद्र मिश्रा राम मंदिर के प्रशासनिक और ऑपरेशनल कामकाज की निगरानी करेंगे. मंदिर परिसर में रोज बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं, ऐसे में भीड़ प्रबंधन, व्यवस्थाओं के संचालन, विभिन्न एजेंसियों के बीच तालमेल और प्रशासनिक फैसलों में CEO की भूमिका अहम होगी.

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