संसद मार्च के लिए CJP ने क्यों चुनी 20 जुलाई की तारीख, जानिए मानसून सत्र को लेकर क्या है रणनीति?

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Parliament Live Updates :CJP का मार्च 20 जुलाई को ही क्यों?

फोटो : CJP का संसद मार्च

CJP ने मानसून सत्र के पहले दिन जंतर-मंतर से संसद तक मार्च का ऐलान किया था, हालांकि प्रशासन द्वारा इसकी इजाजत नहीं दी गई, बावजूद इसके प्रदर्शनकारी सड़कों पर हैं. लेकिन संसद मार्च के लिए CJP ने 20 जुलाई की तारीख क्यों चुना? जानिए इसके पीछे की क्या है रणनीति..

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Parliament Live Updates : सुरक्षा व्यवस्था के लिहाज से भारत की राजधानी नई दिल्ली के लुटियंस जोन का इलाका सबसे हाई-सिक्योरिटी और वीवीआईपी इलाका है. जंतर-मंतर और भारतीय संसद राजधानी के इसी इलाके में स्थित हैं. दोनों लोकेशन के बीच करीब 1.5 किलोमीटर की दूरी है.आज 20 जुलाई को जहां एक तरफ संसद के सत्र की शुरुआत हो रही है, तो दूसरी तरफ CJP जंतर-मंतर से संसद तक मार्च की तैयारी कर रही है. ऐसे में लाजमी है कि आज इस इलाके में सुरक्षा व्यवस्था काफी सख्त होगी. लेकिन सवाल उठता है कि आखिर CJP ने संसद मार्च के लिए 20 जुलाई की तारीख ही क्यों चुनी? लेख में हम आपको बताएंगे, लेकिन उससे पहले जानते हैं मानसून सत्र और संसद मार्च को लेकर क्या है नया अपडेट

देखिए ये लाइव ब्लॉग..

कॉकरोच जनता पार्टी का संसद मार्च

संसदीय कार्यवाही

20 जुलाई की तारीख के पीछे ये है वजह

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि संसद का पहला दिन किसी भी विरोध प्रदर्शन के लिए सबसे अधिक प्रतीकात्मक माना जाता है. इसी दिन सरकार अपने विधायी एजेंडे की शुरुआत करती है और देशभर का राजनीतिक फोकस संसद पर होता है. ऐसे में CJP ने 20 जुलाई को संसद मार्च का ऐलान कर अपने मुद्दों को राष्ट्रीय स्तर पर प्रमुखता से उठाने की रणनीति अपनाई है. इसके अलावा...

विश्लेषकों का यह भी मानना है कि CJP पर हमेशा यह आरोप लगता रहा है कि उसकी लोकप्रियता मुख्य रूप से सोशल मीडिया तक सीमित है और जमीनी स्तर पर उसका प्रभाव सीमित है. ऐसे में संसद के पहले दिन बड़े मार्च का ऐलान पार्टी के लिए अपनी संगठनात्मक क्षमता और जनसमर्थन का प्रदर्शन करने की रणनीति भी हो सकता है.

हालांकि, पार्टी ने आधिकारिक तौर पर 20 जुलाई की तारीख चुनने की यह वजह नहीं बताई है.

मानसून सत्र के पहले दिन जंतर-मंतर पर दो-दो राजनीतिक प्रदर्शन

9 जुलाई को CJP ने घोषणा की थी कि वह संसद के पहले ही दिन जंतर-मंतर से संसद तक मार्च निकालेगी. पार्टी का कहना था कि संसद के भीतर जब जनहित के मुद्दों पर चर्चा होगी, उसी समय जनता की आवाज संसद के बाहर भी बुलंद की जाएगी. दिलचस्प बात यह है कि 17 जुलाई को जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भी घोषणा की थी कि उनकी पार्टी नेशनल कॉन्फ्रेंस 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा देने की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन करेगी. इसके साथ-साथ आज से संसद का मानसून सत्र भी शुरू हो रहा है, ऐसे में राजधानी में एक ही दिन कई राजनीतिक और सामाजिक प्रदर्शन हो रहा है.

इलाके में लागू है बीएनएस की धारा 163

संसद का मानसून सत्र और प्रदर्शन को लेकर इस इलाके में कानून-व्यवस्था बनाए रखना दिल्ली पुलिस और प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती माना जा रहा है. हालांकि प्रशासन ने इलाके में बीएनएस की धारा 163 लागू कर दी है और सुरक्षा एजेंसियां पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं. संसद परिसर के आसपास भी अतिरिक्त सुरक्षाबलों की तैनाती की गई है. प्रशासनिक तैयारियों के मद्देनजर पूरे इलाके में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं.

क्यों बनी कॉकरोच जनता पार्टी

दरअसल, मई 2026 को सुप्रीम कोर्ट में एक मामले की सुनवाई के दौरान भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत ने एक टिप्पणी की थी. जिसमें उन्होंने कथित तौर पर कहा था कि देश के कुछ बेरोजगार युवा नौकरी न मिलने पर सोशल मीडिया, आरटीआई (RTI) और एक्टिविज्म के रास्ते पर जाकर सिस्टम पर हमला करने लगते हैं. उन्होंने ऐसे लोगों की तुलना कॉकरोच (Cockroaches) और परजीवी (Parasites) से कर दी थी. हालांकि उन्होंने बाद में इस पर सफाई देते हुए कहा कि मीडिया ने उनकी टिप्पणी को गलत तरीके से पेश किया, उनका मतलब फर्जी डिग्री लेकर पेशों में आने वाले लोगों के संदर्भ में था.

इसको लेकर उस समय भारत से बाहर रह रहे अभिजीत दीपके ने देश की शिक्षा व्यवस्था और बेरोजगारी जैसे मुद्दों को लेकर सोशल मीडिया पर अभियान शुरू किया. धीरे-धीरे उनकी मुहिम को व्यापक समर्थन मिलने लगा और सोशल मीडिया पर उनके समर्थकों की संख्या तेजी से बढ़ती गई. शिक्षा, युवाओं और रोजगार से जुड़े मुद्दों के चलते इस अभियान ने बड़ी संख्या में युवाओं को आकर्षित किया.

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अभियान को लेकर लोगों में भारी उत्साह को देखते हुए अभिजीत दीपके 6 जून 2026 को भारत लौटे. जिसके बाद उन्होंने NEET-UG पेपर लीक मामले और कथित तौर पर इसको लेकर कई छात्रों द्वारा आत्महत्या जैसे कदम उठाए जाने की घटनाओं को लेकर केंद्र सरकार को घेरा. उन्होंने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग करते हुए दिल्ली में बड़े आंदोलन की घोषणा की. इस आंदोलन को उस समय और मजबूती मिली जब सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने 28 जून को जंतर-मंतर पर आमरण अनशन शुरू किया. भूख हड़ताल के 21 दिन बाद दिल्ली पुलिस ने दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश पर उन्हें दिल्ली के ही सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया. हालांकि इसके बावजूद यह आंदोलन जारी है, और आज संसद तक मार्च किया जा रहा है.

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गौतम कुमार

लेखक के बारे में

By गौतम कुमार

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