J&K Drone Alert: राजौरी-पुंछ में दिखे पाकिस्तानी ड्रोन, सेना का सर्च ऑपरेशन जारी
जम्मू-कश्मीर के राजौरी-पुंछ सेना का सर्च ऑपरेशन जारी है. फोटो- PTI
जम्मू-कश्मीर के राजौरी-पुंछ इलाके में संदिग्ध ड्रोन दिखने की सूचना के बाद सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट हो गई हैं. इसके साथ ही ऊधमपुर, कठुआ और राजौरी के जंगलों में पुलिस, सेना और अर्धसैनिक बलों का संयुक्त तलाशी अभियान लगातार जारी है. राजौरी में दो संदिग्ध हथियारबंद लोगों की सूचना मिली थी.
जम्मू-कश्मीर संभाग के राजौरी और पुंछ जिलों में शुक्रवार ( 28 अगस्त ) रात बालाकोट के बेहरूती गांव में ड्रोन मंडराता नजर आया और बाद में मंगलनार-दाबरोटे की तरफ बढ़कर पाकिस्तान लौट गया. भारतीय सेना ने इन इलाकों में बड़े पैमाने पर सघन तलाशी अभियान छेड़ दिया है. सुरक्षा बलों की चौकसी बढ़ा दी गई है और हर संदिग्ध हरकत पर पैनी नजर रखी जा रही है. इस मामले को लेकर स्थानीय लोगों में भी चिंता का माहौल है.
सुरक्षा बलों की बढ़ी हुई चौकसी
सुरक्षा सूत्रों के मुताबिक, पिछले कुछ हफ्तों में राजौरी और पुंछ के सीमावर्ती इलाकों में कई बार संदिग्ध ड्रोन देखे गए हैं. इन घटनाओं के बाद, सेना ने तुरंत कार्रवाई करते हुए दोनों जिलों में तलाशी अभियान को और तेज कर दिया है. सीमा पार से किसी भी तरह की घुसपैठ या संदिग्ध गतिविधि को रोकने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा बलों को तैनात किया गया है. सेना के जवान हर गांव, जंगल और पहाड़ी इलाके की बारीकी से जांच कर रहे हैं. ड्रोन की आवाजाही वाले इलाकों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, और रात के समय भी निगरानी लगातार जारी है.
ड्रोन की गतिविधियों का बढ़ता खतरा
आतंकवादियों द्वारा ड्रोन का इस्तेमाल हथियारों, गोला-बारूद और नशीले पदार्थों की तस्करी के लिए एक नए तरीके के तौर पर किया जा रहा है. राजौरी और पुंछ जैसे इलाके, जो अपनी पहाड़ी और घने जंगलों वाली भौगोलिक स्थिति के कारण थोड़े संवेदनशील माने जाते हैं, ऐसे खतरों के प्रति अधिक सचेत रहने की आवश्यकता है. हाल की घटनाओं ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है, और इसी वजह से सेना ने इस बार सर्च ऑपरेशन में कोई भी कसर नहीं छोड़ने का फैसला किया है.
स्थानीय प्रशासन का सहयोग
सेना के साथ-साथ, स्थानीय प्रशासन भी पूरी तरह से सहयोग कर रहा है. लोगों से अपील की गई है कि वे किसी भी संदिग्ध गतिविधि या वस्तु की सूचना तुरंत सुरक्षा बलों को दें. पुलिस भी इस अभियान में सेना के साथ मिलकर काम कर रही है. गांवों और कस्बों में नियमित रूप से गश्त लगाई जा रही है ताकि आम लोगों को किसी भी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े और वे सुरक्षित महसूस कर सकें.
पहले भी देखी गई है ऐसी घटनाएं
यह पहली बार नहीं है जब जम्मू संभाग में ड्रोन गतिविधि देखी गई हो. पिछले कुछ सालों में, सीमा पार से ड्रोन के जरिए हथियार और ड्रग्स गिराने की कई कोशिशें नाकाम की गई हैं. खास तौर पर, जम्मू हवाई अड्डे पर ड्रोन हमले की घटना ने सुरक्षा एजेंसियों को और भी सतर्क कर दिया था. इन घटनाओं को देखते हुए, सेना ने सीमावर्ती इलाकों में अपनी निगरानी प्रणाली को और मज़बूत किया है.
सेना का कड़ा रुख
सेना के अधिकारी इस मामले को लेकर बेहद गंभीर हैं. उनका कहना है कि किसी भी तरह की घुसपैठ या नापाक मंसूबों को कामयाब नहीं होने दिया जाएगा. इस बार का सर्च ऑपरेशन बहुत व्यापक है और इसमें आधुनिक तकनीक का भी इस्तेमाल किया जा रहा है. ड्रोन का पता लगाने के लिए विशेष उपकरण लगाए गए हैं और सेना के जवान हर पल सतर्क हैं.
भविष्य की रणनीति
राजौरी और पुंछ जैसे इलाकों में ड्रोन के बढ़ते खतरे को देखते हुए, सेना और सुरक्षा एजेंसियां अपनी रणनीतियों की समीक्षा कर रही हैं. सीमा सुरक्षा को और मजबूत करने के साथ-साथ, ड्रोन विरोधी तकनीकों पर भी जोर दिया जा रहा है. इस बार के सर्च ऑपरेशन का मकसद सिर्फ संदिग्ध ड्रोन गतिविधि का पता लगाना ही नहीं, बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए एक मजबूत ढांचा तैयार करना भी है. सेना का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि जम्मू और उसके आसपास का इलाका पूरी तरह से सुरक्षित रहे.
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