जन्मदिन विशेष: शतरंज और संगीत के शौकीन हैं अमित शाह, सरदार पटेल की बेटी के लिए पोस्टर लगाने से गृह मंत्री बनने तक का सफर

Updated:
विज्ञापन

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, फोटो- एएनआई

WhatsApp चैनल से जुड़ेंगूगल पर प्रभात खबर चुनें

Amit Shah Birthday Special: कभी सरदार पटेल की बेटी के लिए चुनावी पोस्टर लगाने वाले अमित शाह आज देश के गृह मंत्री हैं. राजनीति में बड़े फैसलों और संगठन पर मजबूत पकड़ के लिए पहचाने जाने वाले शाह को शतरंज, पुराने फिल्मी गानों और गजलों का भी शौक है. उनके जन्मदिन पर जानिए उनकी जिंदगी के दिलचस्प किस्से.

विज्ञापन

Amit Shah Birthday Special: साल 2002 की बात है. केशूभाई पटेल गुजरात के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे देते हैं. इसके बाद नरेंद्र मोदी राज्य के नये सीएम बने. उन्होंने अमित शाह को अपनी सरकार में गृह मंत्री समेत 11 मंत्रालयों की जिम्मेदारी सौंपी.

विज्ञापन

अमित शाह इस मंत्रिमंडल में इकलौते ऐसे मंत्री थे जो नरेंद्र मोदी की गैरमौजूदगी में बैठकों का नेतृत्व करते थे. पत्रकार पूर्णिमा जोशी ने अपने एक आर्टिकल में लिखा है कि मोदी को सत्ता तक पहुंचाने में शाह ने अहम भूमिका निभाई थी.

अब 24 साल बाद शाह देश के गृह मंत्री हैं और नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री. आज अमित शाह का 62वां जन्मदिन है. इस मौके पर अमित शाह के जीवन से जुड़े अहम किस्से जानते हैं.

अमित शाह और उनकी फैमली के बारे में जानिए-

Image

गांधी के विचारों से प्रेरित थीं अमित शाह की मां, वह 16 साल से पहनने लगे थे खादी

अमित शाह का जन्म 22 अक्टूबर 1964 को मुंबई के एक गुजराती परिवार में हुआ था. उनके पिता का नाम अनिलचंद्र शाह और मां का नाम कुसुमबेन था. हालांकि, उनका बचपन गुजरात के मानसा में बीता.

करीब 16 साल की उम्र तक वह वहीं रहे और इसके बाद उनका परिवार अहमदाबाद आ गया. बचपन से ही अमित शाह की इतिहास, भारतीय दर्शन और महान हस्तियों की जीवनियों में दिलचस्पी थी.

उनकी जिंदगी पर उनकी मां का खास प्रभाव रहा. कुसुमबेन गांधीवादी विचारों से प्रभावित थीं. अमित शाह को खादी के कपड़े पहनने की प्रेरणा भी अपनी मां से ही मिली थी.

सरदार पटेल की बेटी मणिबेन के लिए गलियों में पोस्टर लगाते थे अमित शाह

अमित शाह के राजनीतिक जीवन का एक बेहद दिलचस्प किस्सा साल 1977 से जुड़ा है. देश में आपातकाल के बाद लोकसभा चुनाव हो रहे थे. उस समय वह स्कूली छात्र थे, लेकिन राजनीति में उनकी दिलचस्पी बढ़ने लगी थी. इसी चुनाव में सरदार वल्लभभाई पटेल की बेटी मणिबेन पटेल गुजरात की मेहसाणा लोकसभा सीट से मैदान में थीं.

अमित शाह भी उनके प्रचार में जुट गए. वह गलियों में घूमकर मणिबेन के चुनावी पोस्टर और स्टिकर लगाते थे. यही वह दौर था, जब चुनावी राजनीति से उनका शुरुआती रिश्ता बना. आगे चलकर पोस्टर लगाने वाला यह किशोर खुद चुनाव लड़ने लगा और देश की राजनीति में महत्वपूर्ण पदों तक पहुंचा.

जब पोलिंग एजेंट अमित शाह पर पड़ी आडवाणी की नजर

अमित शाह का सार्वजनिक जीवन 1980 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़ने के साथ आगे बढ़ा. इसके बाद उन्होंने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) में काम किया. साल 1982 में उन्हें एबीवीपी की गुजरात इकाई का संयुक्त सचिव बनाया गया. साल 1984 में उन्होंने अहमदाबाद के नारनपुरा क्षेत्र में भाजपा के पोलिंग एजेंट की जिम्मेदारी संभाली.

इसके बाद 1987 में भारतीय जनता युवा मोर्चा से जुड़े और 1989 में अहमदाबाद शहर में भाजपा के सचिव बने. यह वह समय था, जब अमित शाह बूथ स्तर पर कार्यकर्ताओं से संपर्क करने, चुनावी तैयारियों और संगठन के काम को समझ रहे थे. इसी दौरान उन्हें लालकृष्ण आडवाणी और अटल बिहारी वाजपेयी जैसे बड़े नेताओं के चुनाव प्रबंधन में भी काम करने का मौका मिला.

शतरंज और संगीत के शौकीन हैं अमित शाह

अब बात अमित शाह के उस शौक की, जिसके बारे में बहुत कम लोगों को जानकारी होगी. उन्हें शतरंज खेलना बेहद पसंद है. वह साल 2006 में गुजरात राज्य शतरंज संघ के अध्यक्ष भी बने थे. अमित शाह का मानना रहा है कि शरीर के व्यायाम के साथ दिमाग का व्यायाम भी जरूरी है. इसी सोच के तहत उन्होंने अहमदाबाद के प्राथमिक विद्यालयों में शतरंज शुरू कराने की पहल की.

बाद में इस कार्यक्रम को गुजरात के अन्य स्कूलों तक बढ़ाया गया. उनके कार्यकाल में अहमदाबाद में शतरंज की एक बड़ी प्रतियोगिता हुई थी, जिसमें करीब 20 हजार खिलाड़ियों ने एक साथ हिस्सा लिया. इस आयोजन ने गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में जगह बनाई. इसके अलावा चार हजार महिला खिलाड़ियों की भागीदारी वाली शतरंज प्रतियोगिता का रिकॉर्ड लिम्का बुक में दर्ज हुआ था.

बच्चों के साथ शतरंज खेलते हुए अपनी तस्वीर खुद गृहमंत्री अमित शाह ने शेयर की, फोटो- amitshahofficial
बच्चों के साथ शतरंज खेलते हुए अपनी तस्वीर खुद गृहमंत्री अमित शाह ने शेयर की, फोटो- amitshahofficial

लगातार राजनीतिक कार्यक्रमों और सरकारी बैठकों में व्यस्त रहने वाले अमित शाह को संगीत से भी खास लगाव है. उनकी आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक, उन्हें पुराने हिंदी फिल्मी गाने और मशहूर गीतकार साहिर लुधियानवी की लिखी गजलें पसंद हैं. इसके अलावा उन्हें अलग-अलग तरह के व्यंजन खाना और महान भारतीय हस्तियों के जीवन पर बनी फिल्में देखना भी अच्छा लगता है. इतिहास की किताबें पढ़ना, शतरंज खेलना और क्रिकेट में दिलचस्पी रखना उनके व्यक्तिगत शौक में शामिल हैं. वह परिवार के साथ समय बिताना भी पसंद करते हैं.

राजनीति ही नहीं, क्रिकेट से भी है गहरा लगाव

भले ही चुनावी हलफनामे में शाह अभी भी खुद को किसान बताते हों, लेकिन राजनीति के इतर उनकी सबसे अधिक दिलचस्पी क्रिकेट और शतरंज में है.साल 2009 में वह गुजरात क्रिकेट एसोसिएशन के उपाध्यक्ष बने थे. उस समय नरेंद्र मोदी इसके अध्यक्ष थे.

इसके बाद 2014 में मोदी के प्रधानमंत्री बनने पर अमित शाह ने गुजरात क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाली. इस तरह राजनीति के साथ खेल प्रशासन में भी उनकी सक्रिय भागीदारी रही. उनकी रुचि केवल क्रिकेट देखने तक सीमित नहीं रही, बल्कि खेलों के आयोजन और खिलाड़ियों के लिए सुविधाओं से जुड़ी गतिविधियों में भी रही.

नरेंद्र मोदी स्टेडियम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, फोटो- एएनआई
नरेंद्र मोदी स्टेडियम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, फोटो- एएनआई

2014 में भाजपा अध्यक्ष बने, कार्यकर्ताओं की संख्या 3 करोड़ से 13 करोड़ तक पहुंचाया

अमित शाह के राजनीतिक जीवन में सबसे बड़ा बदलाव साल 2014 में आया. लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा ने उन्हें उत्तर प्रदेश का प्रभारी बनाया था. उस चुनाव में भाजपा ने प्रदेश की 80 में से 71 सीटें जीतीं, जबकि सहयोगी दल को दो सीटें मिलीं. चुनाव के बाद 9 जुलाई 2014 को अमित शाह को भारतीय जनता पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया. उस दौर में उन्होंने कहा था कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में विश्वास का माहौल बना है. अब उनकी कोशिश इस भरोसे को भाजपा के संगठनात्मक विस्तार में बदलने की थी.

इसी उद्देश्य से नवंबर 2014 में पार्टी ने देशव्यापी सदस्यता अभियान शुरू किया. इसमें आधुनिक तकनीक का सहारा लिया गया. लोगों को मिस्ड कॉल के जरिए भाजपा का सदस्य बनने की सुविधा दी गई. पार्टी के आंकड़ों के मुताबिक, अभियान से पहले सदस्यों की संख्या करीब तीन करोड़ थी. अप्रैल 2015 के अंत तक यह आंकड़ा 11 करोड़ तक पहुंच गया. इस अभियान ने भाजपा को देश के छोटे शहरों, कस्बों और गांवों में नए लोगों तक पहुंचने का अवसर दिया.

सदस्य बनाने के बाद घर-घर पहुंचने का बनाया प्लान

अमित शाह ने सदस्यता अभियान खत्म होने के बाद एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया. उनका मानना था कि केवल लोगों को पार्टी से जोड़ना काफी नहीं है. उनसे लगातार संपर्क बनाए रखना और उन्हें संगठन के काम में शामिल करना भी जरूरी है. इसी सोच के तहत भाजपा ने 'महासंपर्क अभियान' चलाया. इसमें कार्यकर्ताओं को नए सदस्यों के घर जाकर उनसे मिलने और पार्टी की गतिविधियों के बारे में जानकारी देने की जिम्मेदारी मिली.

इसके बाद जुलाई 2015 में 'पंडित दीनदयाल उपाध्याय महाप्रशिक्षण अभियान' की शुरुआत हुई. इसका लक्ष्य 15 लाख से अधिक कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित करना था. इस तरह संगठन को मजबूत बनाने के लिए सदस्यता, संपर्क और प्रशिक्षण की तीन चरणों वाली रणनीति अपनाई गई. बूथ से लेकर जिला और प्रदेश स्तर तक कार्यकर्ताओं की भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया गया.

अमित शाह के अध्यक्ष रहते भाजपा ने कई राज्यों में अपना आधार बढ़ाया. पश्चिम बंगाल में भी पार्टी के वोट प्रतिशत और सीटों की संख्या में बढ़ोतरी हुई. साल 2019 में भाजपा ने राज्य की 42 में से 18 लोकसभा सीटें जीतीं. इसके बाद 2026 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को पहली बार राज्य में बहुमत मिला.

कार्यकर्ताओं को किताबों से जोड़ने के लिए बनवाई लाइब्रेरी

अमित शाह के संगठनात्मक काम का एक और रोचक पहलू पुस्तकालयों से जुड़ा है. उनका मानना रहा है कि किसी राजनीतिक कार्यकर्ता को सिर्फ नारे लगाने या चुनाव प्रचार करने तक सीमित नहीं रहना चाहिए. उसे देश के इतिहास, संविधान, समाज और अलग-अलग विचारों की भी समझ होनी चाहिए. इसी सोच के साथ उन्होंने भाजपा कार्यालयों में पुस्तकालय और ई-लाइब्रेरी स्थापित करने पर जोर दिया.

फरवरी 2016 में दिल्ली स्थित पार्टी मुख्यालय में केंद्रीय पुस्तकालय की शुरुआत हुई. इसके बाद दिसंबर 2016 में छत्तीसगढ़ के रायपुर में नानाजी देशमुख के नाम पर एक पुस्तकालय का उद्घाटन किया गया. इसमें इतिहास, राजनीति, संविधान, महान हस्तियों की जीवनियां और दूसरे विषयों की 10 हजार से अधिक किताबें रखी गई थीं. बाद में कई राज्यों के भाजपा कार्यालयों में भी पुस्तकालय स्थापित किए गए. शाह चाहते थे कि कार्यकर्ताओं में नियमित किताबें पढ़ने और मुद्दों पर अध्ययन करने की आदत विकसित हो.

गृह मंत्री बने तो नक्सलवाद के खिलाफ अभियान पर दिया जोर

साल 2017 में अमित शाह राज्यसभा पहुंचे और 2019 के लोकसभा चुनाव में गुजरात की गांधीनगर सीट से सांसद चुने गए. इसके बाद नरेंद्र मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में उन्हें केंद्रीय गृह मंत्री बनाया गया. गृह मंत्री के रूप में उन्होंने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 के प्रावधान हटाने और नागरिकता संशोधन कानून जैसे बड़े तथा राजनीतिक रूप से विवादित फैसलों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.

उनके कार्यकाल में नक्सलवाद के खिलाफ सुरक्षा अभियानों पर विशेष जोर दिया गया. केंद्र सरकार ने नक्सल प्रभावित इलाकों में सुरक्षा बलों की कार्रवाई के साथ सड़क, शिक्षा और अन्य बुनियादी सुविधाओं के विस्तार को भी अपनी रणनीति का हिस्सा बनाया.

अमित शाह ने 31 मार्च 2026 तक देश को नक्सलवाद से मुक्त करने का लक्ष्य रखा था. मार्च 2026 में लोकसभा में उन्होंने दावा किया कि नक्सलवाद के खिलाफ अभियान को बड़ी सफलता मिली है और इसका श्रेय केंद्रीय सुरक्षा बलों, राज्य पुलिस तथा स्थानीय लोगों को जाता है.

Also Read:सोनिया गांधी ने इंस्टाग्राम पर किया डेब्यू, अपनी किताब ‘Belonging’ की पहली झलक दिखाई

विज्ञापन

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola