फिर पटरियों पर दौड़ने लगी है सपनों का सफर कराने वाली 162 साल पुरानी फेयरी क्वीन

Updated at : 18 Feb 2017 11:53 AM (IST)
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फिर पटरियों पर दौड़ने लगी है सपनों का सफर कराने वाली 162 साल पुरानी फेयरी क्वीन

नयी दिल्ली : अभी हाल ही में लंदन में शुरू की गयी हेरिटेज ट्रेन की तरह भारत में भी वर्ष 1855 में पहली बार भाप इंजन वाली शुरू की गयी फेयरी क्वीन हेरिटेज ट्रेन एक बार फिर पटरियों पर दौड़ने लगी है. सपनों का सफर तय कराने वाली भाप इंजन वाली यह फेयरी क्वीन ट्रेन […]

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नयी दिल्ली : अभी हाल ही में लंदन में शुरू की गयी हेरिटेज ट्रेन की तरह भारत में भी वर्ष 1855 में पहली बार भाप इंजन वाली शुरू की गयी फेयरी क्वीन हेरिटेज ट्रेन एक बार फिर पटरियों पर दौड़ने लगी है. सपनों का सफर तय कराने वाली भाप इंजन वाली यह फेयरी क्वीन ट्रेन एक बार फिर दिल्ली कैंट से अलवर तक की रेललाइन पर दौड़ाई जा रही है, जो सरिस्का वन्य जीव अभयारण्य तक लोगों को सफर करायेगी.

आरामदायक है फेयरी क्वीन का सफर

दो डिब्बों वाली इस फेयरी क्वीन ट्रेन में से एक डिब्बे में एयरकंडीशन लगा है, जिसमें 50 लोगों के बैठने की क्षमता है. इस बोगी में सीटों को इस तरह से बनाया गया है कि इसमें सफर करने वाले को आरामदायक महसूस होता है. इसके साथ ही, इसमें लजीज व्यंजनों के साथ पेंट्री कार को भी जोड़ा गया है, जो सफर करने वालों को लजीज व्यंजनों के जायके से रूबरू कराता है. इस ट्रेन की पहली बोगी में खिड़कियां इतनी बड़ी और चौड़ी हैं कि इसमें बैठने वाले लोगों को बाहर की चीजें एकदम स्पष्ट और खुली-खुली दिखाई देती हैं. एक तरह से इसमें राजशाही ठाठ की तरह सजावट की गयी है.

एक रात दो दिन में खूब उठा सकते हैं लुत्फ

इस फेयरी क्वीन ट्रेन में एक रात और दो दिन तक का सफर तय करना पड़ता है, जिसमें यात्रा के दौरान सवारी एक पूरी रात इस ट्रेन में सफर का लुत्फ उठा सकते हैं. इस ट्रेन को दिल्ली कैंट से प्रत्येक महीने के दूसरे और चौथे शनिवार को अवर के लिए रवाना अक्तूबर और मार्च के महीने में रवाना किया जाता है. दिल्ली कैंट से रवाना होने के बाद इसमें सफर करने वाले सवारियों को एक पूरी रात अलवर के होटलों में ठहराया जाता है और वे वहां पर आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम का लुत्फ भी उठाते हैं.

सफर के दौरान सरिस्का वन्य जीव अभयारण्य का उठा सकेंगे मजा

आम तौर पर अलवर में इस तरह के सांस्कृतिक कार्यक्रम शाम को ही आयोजित किये जाते हैं. इसके साथ ही, फेयरी क्वीन से यात्रा करने के दौरान सवारी दिल्ली के विभिन्न ऐतिहासिक स्थलों का दर्शन भी कर सकते हैं. सबसे बड़ी बात यह है कि इसके सवारी अपनी यात्रा के दौरान दुनिया भर में प्रसिद्ध सरिस्का वन्य जीव अभयारण्य का मुफ्त में सैर भी कर सकते हैं. इसमें सवारियों को मुफ्त में जीप या अन्य वाहनों की सुविधा भी उपलब्ध करायी जाती है.

कब-कब कर सकेंगे फेयरी क्वीन में सफर

बीते 11 फरवरी को एक बार फिर पटरी पर दौड़ाने वाली फेयरी क्वीन में आप 25 फरवरी को भी राजशाही यात्रा का लुत्फ उठा सकेंगे. इसके अलावा, इस साल के मार्च महीने में 11 और 25 तारीख को और फिर आठ और 22 अप्रैल को भी इस ट्रेन में अपनी सीट बुक करवाकर सफर का मजा ले सकते हैं.

बच्चों को 1620 और बड़ों को 3240 रुपये देने होंगे किराया

भारतीय रेल के प्रवक्ता के मुताबिक, इस ट्रेन में सफर करने वालों के लिए बच्चों को 1620 रुपये वयस्कों को 3240 रुपये किराये के रूप में भुगतान करना होगा. रेलवे के अधिकारियों का कहना है कि इस किराये में सवारियों को ऐतिहासिक और दर्शनीय स्थलों का दौरा कराने के साथ ही लजीज व्यंजनों का स्वाद लेने का भी मजा मिलेगा.

1972 में फेयरी क्वीन को मिला था हेरिटेज ट्रेन का दर्जा

रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, भाप इंजन से चलने वाली इस ट्रेन के कुछ पार्ट्स भारत में नहीं मिल रहे थे. इसलिए इसे दुरूस्त करने में थोड़ा वक्त लगा है. अब इसका बॉयलर बिल्कुल ठीक हो चुका है और फेयरी क्वीन फिर से एक बार छुक-छुक की आवाज के साथ रेल की पटरियों पर दौड़ने लगी है. पहली बार ईस्ट इंडिया रेलवे ने फेयरी क्वीन ट्रेन को 1855 में चलावाया था. 1909 में रेलवे ने इसे सर्विस से हटा दिया था. 1972 में इसे हेरिटेज का दर्जा देकर नेशनल रेल म्यूजियम में रख दिया गया. रेलवे ने 1997 में दोबारा इसे अपनी सर्विस में शामिल किया.

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