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आइये जानें देश की पहली महिला आइपीएस और भाजपा नेता किरण बेदी की पूरी कहानी

Updated at : 15 Jan 2015 4:52 PM (IST)
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आइये जानें देश की पहली महिला आइपीएस और भाजपा नेता किरण बेदी की पूरी कहानी

नयी दिल्ली : देश की पहली महिला आइ.पी.एस. अधिकारी बनने का गौरव पाने वाली किरण बेदी वैसे तो अपने कार्यकाल के दौरान भी अक्सर सुर्खियों में रहती आई हैं लेकिन नौकरी से सेवानिवृत्त होने के बाद भी वे कई मुद्दों पर प्रमुखता से लोगों और मीडिया का ध्यान अपनी तरफ खींचती रही हैं. किरण बेदी […]

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नयी दिल्ली : देश की पहली महिला आइ.पी.एस. अधिकारी बनने का गौरव पाने वाली किरण बेदी वैसे तो अपने कार्यकाल के दौरान भी अक्सर सुर्खियों में रहती आई हैं लेकिन नौकरी से सेवानिवृत्त होने के बाद भी वे कई मुद्दों पर प्रमुखता से लोगों और मीडिया का ध्यान अपनी तरफ खींचती रही हैं. किरण बेदी के भाजपा में शामिल होने को लेकर पहले से लगाये जा रहे थे और आज उन्हीं अनुमानों को सही साबित कारते हुए किरण बेदी ने दिल्ली में भारतीय जनता पार्टी के प्रधान कार्यालय में विधिवत पार्टी की सदस्यता ग्रहण कर ली. दिल्ली में होने वाले विधानसभा चुनाव के मद्देनजर बेदी का भाजपा में शामिल होना बहुत बड़ी बात मानी जा रही है.

आइये, किरण बेदी की जिंदगी से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण पहलुओं को देखें.
किरण बेदी के जीवन की शुरुआती कहानी
डॉ॰ किरण बेदी बेदी का जन्म सन् 1949 में पंजाब के अमृतसर शहर में हुआ. वे श्रीमती प्रेमलता तथा श्री प्रकाश लाल पेशावरिया की चार पुत्रियों में से दूसरी पुत्री हैं. भारतीय पुलिस सेवा की प्रथम वरिष्ठ महिला अधिकारी रहते हुए किरण बेदी ने विभिन्न पदों पर रहते हुए अपनी कार्य-कुशलता का परिचय दिया है. वे संयुक्त आयुक्त (पुलिस प्रशिक्षण) तथा दिल्ली पुलिस की विशेष आयुक्त (खुफिया) के तौर पर भी कार्य कर चुकी हैं. वे संयुक्त राष्ट्र संघ के ‘शांति स्थापना ऑपरेशन’ विभाग में नागरिक पुलिस सलाहकार’ की जिम्मेदारी से भी जुड़ी रही हैं. उन्हें वर्ष 2002 के लिए भारत की ‘सबसे प्रशंसित महिला’ चुना गया. द ट्रिब्यून के पाठकों ने उन्हें ‘वर्ष की सर्वश्रेष्ठ महिला’ चुना.
राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सम्मान
इसके अलावा, उनके मानवीय एवं निडर दृष्टिकोण ने पुलिस कार्यप्रणाली एवं जेल सुधारों के लिए अनेक आधुनिक आयाम जुटाने में महत्वपूर्ण योगदान किया है. निःस्वार्थ कर्त्तव्यपरायणता के लिए उन्हें शौर्य पुरस्कार मिलने के अलावा उनके कई कामों को सारी दुनिया में मान्यता मिली है जिसके परिणामस्वरूप एशिया का नोबल पुरस्कार कहे जाने वाले रमन मैगसेसे पुरस्कार से भी उन्हें नवाजा गया है. उल्लेखनीय है कि किरण बेदी की ही तरह अरविन्द केजरीवाल को भी रमन मैग्सेसे अवार्ड मिल चुका है.
किरण बेदी को मिले अन्य अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कारों की श्रृंखला में शामिल हैं – जर्मन फाउंडे्शन का जोसफ ब्यूज पुरस्कार, नार्वे के संगठन इंटशनेशनल ऑर्गेनाजेशन ऑफ गुड टेम्पलर्स का ड्रग प्रिवेंशन एवं कंट्रोल के लिए दिया जाने वाला एशिया रीजन एवार्ड, जून 2001 में प्राप्त अमेरीकी मॉरीसन-टॉम निटकॉक पुरस्कार तथा इटली का ‘वूमन ऑफ द इयर 2002’ पुरस्कार आदि प्रमुख हैं.
किरण बेदी का अन्ना-केजरीवाल कनेक्शन
किरण बेदी, अन्ना हजारे और अरविंद केजरीवाल के साथ भ्रष्टाचार के खिलाफ भारत (IAC) के प्रमुख सदस्यों में से एक रही हैं. IAC यानि इंडिया अगेंस्ट करप्शन के बैनर के नीचे ही समाजसेवी अन्ना हजारे के नेत्तृत्व में अरविन्द केजरीवाल, किरण बेदी, कुमार विश्वास, जेनरल वी.के.सिंह और बाबा रामदेव जैसे लोग भ्रष्टाचार के विरोध में साथ आये थे. अगस्त 2011 में भ्रष्टाचार के विरोध के दौरान अन्ना के अलावा बेदी, केजरीवाल सहित आइ.ए.सी. के तमाम प्रमुख सदस्यों ने भूख हड़ताल की थी और इनके विरोध-प्रदर्शनों की वजह से इन्हें गिरफ्तार भी किया गया था.
समाज सेवा का कार्य
किरण बेदी के द्वारा दो स्वयं सेवी संस्थाओं की स्थापना तथा पर्यवेक्षण का काम भी लम्बे समय से किया जा रहा है. ये संस्स्थाएं हैं- 1988 में स्थापित नव ज्योति एवं 1994 में स्थापित इंडिया विजन फाउंडेशन. ये संस्थाओं के जरिये रोजाना गरीब बेसहारा बच्चों तक पहुंचकर उन्हें प्राथमिक शिक्षा तथा स्त्रियों को प्रौढ़ शिक्षा उपलब्ध कराती हैं. ‘नव ज्योति संस्था’ नशामुक्ति के लिए इलाज करने के साथ-साथ झुग्गी बस्तियों, ग्रामीण क्षेत्रों में तथा जेल के अंदर महिलाओं को व्यावसायिक प्रशिक्षण और परामर्श भी उपलब्ध कराती है. डॉ॰ बेदी तथा उनकी संस्थाओं को आज अंतर्राष्ट्रीय पहचान तथा स्वीकार्यता प्राप्त है. नशे की रोकथाम के लिए संयुक्त राष्ट्र द्वारा किया गया ‘सर्ज साटिरोफ मेमोरियल अवार्ड’ इसका ताजा प्रमाण है.
अन्य पहलू
किरण बेदी एशियाई टेनिस चैंपियन रही हैं. उन्होंने कानून की डिग्री के साथ-साथ ‘ड्रग एब्यूज एण्ड डोमेस्टिक वायलेंस’ विषय पर डॉक्टरेट की उपाधि भी प्राप्त की है. उन्होंने ‘इट्स ऑलवेज पॉसिबल’ तथा दो आत्मकथाओं के रूप में ‘आय डेयर’ एवं ‘काइंडली बेटन’ नामक पुस्तक लिखी है.
किरण बेदी का पेशेवराना अनुभव
किरण बेदी पहली महिला आइ.पी.एस. अधिकारी के रूप में चर्चित तो रही हीं, साथ ही उनकी प्रखर कार्यशैली की वजह से उन्हें कई महत्वपूर्ण पदों की जिम्मेदारी निभाने को मिली. हालांकि, आज भी किरण बेदी को इस बात का मलाल है कि उनकी तमाम योग्यताओं और वरीयता के बावजूद तत्कालीन सरकार ने उन्हें दिल्ली का पुलिस कमिश्नर नहीं बनाया था.
बेदी का वर्क प्रोफाइल इस तरह है :-
– दिल्ली यातायात पुलिस प्रमुख
– नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो प्रमुख
– डिप्टी इंस्पेक्टर जनरल ऑफ पुलीस, मिजोरम
– इंस्पेक्टर जनरल ऑफ प्रिज़न, तिहाड़
– स्पेशल सेक्रेटेरी टू लेफ्टीलेन्ट गवर्नर, दिल्ली
– इंस्पेक्टर जनरल ऑफ पुलिस, चंडीगढ़
– ज्वाइंट कमिश्नर ऑफ पुलिस ट्रेनीग
– स्पेशल कमिश्नर ऑफ पुलिस इंटेलिजेन्स
– यू.एन. सिविलियन पुलिस एड्वाइजर
– महानिदेशक, होम गार्ड और नागरिक रक्षा
– महानिदेशक, पुलिस अनुसंधान एवं विकास ब्यूरो
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