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लोग आधार संख्या सार्वजनिक तौर पर साझा ना करें, गलत तरीके से प्रयोग अपराध : यूआइडीएआइ

Updated at : 01 Aug 2018 8:36 AM (IST)
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लोग आधार संख्या सार्वजनिक तौर पर साझा ना करें, गलत तरीके से प्रयोग अपराध : यूआइडीएआइ

ट्राई चीफ आरएस शर्मा के दावे को मिली चुनौती के बाद पहलभारतीय दंड संहिता के तहत नियमों का उल्लंघन करने वाले पर होगी कार्रवाई नयी दिल्ली: भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआइडीएआइ) ने लोगों से अपनी 12 अंकों वाली आधार संख्या इंटरनेट या सोशल मीडिया पर साझा नहीं करने या अन्य को किसी प्रकार की चुनौती […]

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ट्राई चीफ आरएस शर्मा के दावे को मिली चुनौती के बाद पहल
भारतीय दंड संहिता के तहत नियमों का उल्लंघन करने वाले पर होगी कार्रवाई

नयी दिल्ली: भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआइडीएआइ) ने लोगों से अपनी 12 अंकों वाली आधार संख्या इंटरनेट या सोशल मीडिया पर साझा नहीं करने या अन्य को किसी प्रकार की चुनौती देने से मना किया है. दूरसंचार नियामक ट्राई प्रमुख के आधार को सार्वजनिक करने और नुकसान पहुंचाने की चुनौती के बाद यूआइडीएआइ ने यह बात कही है. शर्मा की इस चुनौती के बाद सोशल मीडिया पर उनसे जुड़ी कई निजी जानकारियों को साझा किया गया और उनको ट्रोल भी किया गया. यूआइडीएआइ ने एक बयान में कहा, ‘‘इस प्रकार की चीजें अनावश्यक हैं और इससे बचा जाना चाहिए क्योंकि यह कानून के अनुरूप नहीं है.’

भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) के प्रमुख आरएस शर्मा ने शनिवार को अपनी आधार संख्या सार्वजनिक करते हुए यह चुनौती दी कि कोई यह बताये कि इस संख्या को जानकर कैसे वह उन्हें नुकसान पहुंचा सकता है. उसके बाद कुछ ने ट्विटर पर दावा किया कि उन्हें शर्मा की बैंक खाता संख्या और ई-मेल मिल गया है. हालांकि शर्मा ने इससे इनकार किया और इसे गलत बताया. यूआइडीएआइ ने कहा कि लोगों को सार्वजनिक रूप से इंटरनेट और सोशल मीडिया पर आधार संख्या नहीं डालनी चाहिए और ना ही अन्य को इसे लेकर कोई चुनौती देनी चाहिए. प्राधिकरण ने यह भी कहा कि किसी अन्य की आधार संख्या पर आधार सत्यापन या किसी भी उद्देश्य से अन्य के आधार का उपयोग धोखाधड़ी माना जाएगा और आधार कानून तथा भारतीय दंड संहिता की धारा के तहत आपराधिक कार्रवाई माना जाएगा.

अगर कोई व्यक्ति ऐसा करता है या दूसरे को ऐसा करने के लिए उकसाता है तो उसके खिलाफ कानून के तहत कानूनी कार्रवाई की जाएगी. इसलिए लोगों को ऐसी चीजों से दूर रहनी चाहिए. यूआइडीएआइ ने कहा कि 12 अंकों वाली आधार संख्या व्यक्तिगत रूप से संवेदनशील सूचना है. यह ठीक उसी प्रकार है जैसे कि बैंक खाता संख्या, पासपोर्ट संख्या, पैन. इसे वैध जरूरतों के लिए ही साझा किया जाना चाहिए.

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