मासिक धर्म संबंधी मिथकों को तोड़ने के लिए IIT दिल्ली के छात्रों ने तैयार किए मनोरंजक गेम

Updated at : 27 Jun 2018 6:29 PM (IST)
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मासिक धर्म संबंधी मिथकों को तोड़ने के लिए IIT दिल्ली के छात्रों ने तैयार किए मनोरंजक गेम

नयी दिल्ली : मासिक धर्म संबंधी मिथकों और वर्जनाओं को तोड़ने के क्रम में आई आई टी – दिल्ली के छात्रों ने युवतियों और महिलाओं के लिए कई गेम तैयार किए हैं जिससे कि मनोरंजक और आकर्षक तरीके से जागरूकता फैलाने का काम किया जा सके. इनमें पहेली , रूलेट और मासिक धर्म संबंधी मूल […]

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नयी दिल्ली : मासिक धर्म संबंधी मिथकों और वर्जनाओं को तोड़ने के क्रम में आई आई टी – दिल्ली के छात्रों ने युवतियों और महिलाओं के लिए कई गेम तैयार किए हैं जिससे कि मनोरंजक और आकर्षक तरीके से जागरूकता फैलाने का काम किया जा सके.

इनमें पहेली , रूलेट और मासिक धर्म संबंधी मूल चीजों पर फोकस करने वाले तीन गेमों का सेट शामिल है. इनमें बताया जाता है कि सैनिटरी नैप्किन कब-कब बदला जाना चाहिए और उसे कैसे निपटाया जाना चाहिए. संस्थान में प्रोडक्शन एंड इंडस्ट्रियल इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रही रितिका ने कहा, हमने मौखिक जागरूकता सत्रों की जगह तब तीन गेमों का सेट डिजाइन तैयार करने का फैसला किया जब हमने पाया कि महिलाओं में मासिक धर्म के बारे में जागरुकता की कमी है.

बायो टेक्नोलॉजी की छात्रा इशिता गुप्ता ने कहा, मौखिक सत्र और फिर इन गेमों को खेलने के बाद इन गेमों का असर जानने के लिए हमने एक सर्वेक्षण किया जिसमें हमने महिलाओं से मासिक धर्म के संबंध में एक प्रश्नावली भरने को कहा. उन्होंने कहा, मौखिक सत्र के बाद, 10 में से औसतन छह प्रश्नों के उत्तर सही दिए गए, जबकि मॉड्यूल आधारित सर्वेक्षण में महिलाओं ने 8.6 प्रतिशत प्रश्नों के सही जवाब दिए.

इशिता ने कहा, हम महिलाओं को अपने सामने गेम खिलाते हैं और इसे खेलने में उनकी मदद करते हैं. यदि वे गलतियां करती हैं तो हम उन्हें सही कराते हैं जिससे कि उनके मस्तिष्क में कोई गलत अवधारणा बाकी न रहना सुनिश्चत हो सके. आई आई टी दिल्ली की छात्रा तन्वी ने कहा, मुझे एक जागरूकता कार्यक्रम में एक लड़की से हुई बातचीत याद है जिसमें उसने बताया कि उसके लिए उसके परिवार में महिलाओं को कपड़े के टुकड़े की जगह सैनिटरी नैप्किन के इस्तेमाल के लिए समझाना कितना मुश्किल था.

सिविल इंजीनियरिंग की 19 वर्षीय छात्रा ने कहा, इसलिए यह परियोजना सिर्फ स्कूली लड़कियों के लिए नहीं है, बल्कि महिलाओं के लिए भी है ताकि इसका पूरा फायदा सुनिश्चित किया जा सके. ‘प्रोजेक्ट तितली’ नाम की इस पहल के तहत अब तक 1,500 से अधिक महिलाओं को जागरूक किया जा चुका है.

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