क्या आपका बच्चा भी छोटी-छोटी बातों से डर जाता है? पैरेंट्स करें ये 5 काम, अंदर से मजबूत बनेगा बच्चा

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बच्चे के अंदर के डर को खत्म करने के लिए क्या करना चाहिए? AI image

Parenting Tips: हर बच्चा अपने आप में अलग होता है और कुछ बच्चे छोटी-छोटी बातों से भी जल्दी घबरा जाते हैं. ऐसे में पैरेंट्स का रवैया बहुत मायने रखता है. अगर आप भी अपने बच्चे को अंदर से मजबूत और कॉन्फिडेंट बनाना चाहते हैं, तो अपनी कुछ छोटी-छोटी आदतों में बदलाव जरूर करें.

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Parenting Tips: हर बच्चा एक जैसा नहीं होता है. अगर आपके घर पर 5 बच्चे हैं, तो यह पॉसिबिलिटी रहती ही है कि वे सभी एक-दूसरे से बिल्कुल अलग होंगे. कुछ बच्चे ऐसे होते हैं जो नयी जगहों पर जाकर भी तुरंत दूसरों से घुल-मिल जाते हैं, तो कुछ बच्चे ऐसे भी होते हैं जो बहुत ही ज्यादा सेंसिटिव होते हैं और छोटी-छोटी बातों से ही घबरा जाते हैं. चाहे नए लोगों से मिलना हो, स्कूल के स्टेज पर चढ़ना हो या फिर कोई तेज आवाज अचानक से सुनाई दी हो, वे तुरंत घबरा जाते हैं।.

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अगर आपके बच्चे के साथ भी ऐसा ही होता है, तो आपको उसकी अलग से चिंता करने की जरुरत नहीं है. यह कोई बीमारी नहीं है, लेकिन अगर सही समय पर इस पर ध्यान न दिया जाए, तो बीतते समय के साथ आपका बच्चा अंदर से और भी ज्यादा कमजोर होता चला जाता है. अगर आप एक पैरेंट हैं और आपके बच्चे के साथ ऐसा होता है, तो ऐसे में आप अपनी कुछ छोटी-छोटी आदतों को बदलकर अपने बच्चे के अंदर के डर को दूर कर सकते हैं और उसके कॉन्फिडेंस को भी बूस्ट कर सकते हैं. तो चलिए जानते हैं इन्हीं आसान कामों के बारे में विस्तार से.

बच्चे के डर का मजाक न उड़ाएं, उसकी बात ध्यान से सुनें

अगर आपका बच्चा किसी छोटी सी बात से भी डर जाता है, तो आपको कभी भी उससे यह नहीं कहना चाहिए कि "इसमें डरने की क्या बात है?" या फिर "तुम तो एकदम ही डरपोक बच्चे हो." इस तरह की बातें सुनकर बच्चा और भी ज्यादा घबरा जाता है और अपनी बातें आपसे भी छिपाने लगता है. जब भी आपका बच्चा डरे, तो आपके लिए जरूरी हो जाता है कि आप उसकी बातों को ध्यान से सुनें और समझने की कोशिश करें. आपको यह समझना होगा कि उसे किस बात से परेशानी हो रही है. अपने बच्चे को हमेशा यह एहसास कराने की कोशिश करें कि आप उसके साथ हैं. जब आपके बच्चे को लगता है कि उसके माता-पिता उसकी बातों को समझ पा रहे हैं, तो उसका आधा डर वहीं पर खत्म हो जाता है.

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डांटने या किसी और से कम्पेयर करने से बचें

कई बार माता-पिता यह गलती कर देते हैं कि वे अपने बच्चे का कम्पेरिजन दूसरे बच्चों से करने लगते हैं, उदाहरण के लिए, "देखो वह बच्चा कितना निडर है और तुम इतनी सी बात से भी डर रहे हो." आपके ऐसा कहने से आपका बच्चा खुद को दूसरों से कम समझने लग जाता है. अगर आपका बच्चा किसी काम को करने में हिचकिचा रहा है, तो उसे डांटने या फिर उस पर गुस्सा करने की जगह पर उसे प्यार से समझाएं. अपने बच्चे को यह समझाएं कि शुरुआत में किसी भी चीज से डरना बहुत ही नॉर्मल बात है. जब बच्चे को आपका साथ मिलता है, तो वह बिना किसी डर के नई चीजें करने की कोशिश करता है.

छोटे-छोटे काम खुद करने दें और फैसले लेने दें

आपको शायद इस बात पर भरोसा न हो, लेकिन आपके बच्चे का कॉन्फिडेंस तभी बढ़ सकता है जब आप उसे अपने कामों को खुद करने की आजादी देते हैं. अपने बच्चे को उसके कुछ कामों को खुद करने की आदत डालने दें, जैसे जूते पहनना, स्कूल बैग पैक करना या फिर खिलौनों को उनकी सही जगह पर रखना. इसके अलावा, अपने बच्चे को उसकी पसंद की चीजें भी खुद चुनने का मौका दें. उदाहरण के लिए, उसे आज कौन से कपड़े पहनने हैं या फिर उसे कौन सी सब्जी खाने का मन है. जब आपका बच्चा खुद अपने फैसले लेता है, तो उसे भी लगता है कि वह जिम्मेदार है. उसके अंदर यह सोच डेवलप होते ही उसका डर अपने आप गायब होने लगता है.

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छोटी-छोटी कोशिशों की तारीफ जरूर करें

अगर आपका बच्चा अपने डर से बाहर निकलने के लिए खुद थोड़ी सी भी कोशिश कर रहा है, तो उसकी तारीफ करने में कभी भी कंजूसी न करें. उदाहरण के लिए, अगर वह पहले किसी नए मेहमान से बात करने से डरता या घबराता था और आज उसने सिर्फ उन्हें नमस्ते ही कह दिया है, तो आपको उसकी इस हिम्मत को बढ़ावा देना चाहिए. अपने बच्चे से कहें कि "आपने आज बहुत ही अच्छा काम किया है." आपकी जरा सी तारीफ बच्चे के लिए बहुत बड़ा काम करती है और उसे आगे भी निडर रहने की ताकत देती है.

बच्चे के सामने खुद कूल और शांत रहें

छोटे बच्चे उन्हीं चीजों को सीखते हैं जो वे अपने घरों में देखते हैं. अगर माता-पिता खुद ही किसी छोटी सी बात से परेशान हो जाते हैं या फिर घबरा जाते हैं, तो बच्चा भी यही सीख जाता है. बच्चे को अंदर से मजबूत बनाने के लिए आपको खुद उसके सामने हिम्मत से काम लेना होगा. किसी भी प्रॉब्लम या मुश्किल समय में शांत रहकर सॉल्यूशन निकालें. जब बच्चा आपको निडर और शांत देखेगा, तो वह भी मुश्किल हालातों से डरना बंद कर देगा.

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