क्या आपका पार्टनर हर बहस में खुद को सही मानता है? ये 3 संकेत हो सकते हैं नार्सिसिस्टिक व्यवहार के

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रिश्ते में नार्सिसिस्टिक व्यवहार को ऐसे पहचानें (photo- AI Generated)

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Narcissistic Behavior in Relationship: क्या हर झगड़े के बाद आपको ही माफी मांगनी पड़ती है? पार्टनर का हर बात में खुद को सही मानना नार्सिसिस्टिक व्यवहार का संकेत हो सकता है. जानें इसके संकेत.

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Narcissistic Behavior in Relationship: रिश्ते में हर बात पर सहमति होना जरूरी नहीं, लेकिन अगर हर बहस के बाद आपको ही अपनी गलती माननी पड़े, तो इस व्यवहार पर ध्यान देना चाहिए. कुछ पार्टनर अपनी बात को ही सही मानते हैं, दूसरे की भावनाओं को महत्व नहीं देते और अपनी गलती की जिम्मेदारी लेने से बचते हैं. जब ऐसा बार-बार होने लगे, तो रिश्ते में तनाव और भावनात्मक दूरी बढ़ सकती है. ये नार्सिसिस्टिक प्रवृत्ति से जुड़े कुछ व्यवहार हो सकते हैं.

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नार्सिसिस्टिक पर्सनालिटी डिसऑर्डर क्या है?

यूट्यूब चैनल @DrMayankAgrawal पर डॉ. मयंक अग्रवाल ने एक वीडियो में नार्सिसिस्टिक पर्सनालिटी डिसऑर्डर के बारे में जानकारी दी है. उनके मुताबिक, इस स्थिति में व्यक्ति खुद को दूसरों से ज्यादा खास और समझदार मान सकता है. उसे दूसरों से तारीफ और विशेष महत्व मिलने की अपेक्षा रहती है. आलोचना या असहमति मिलने पर वह गुस्सा, परेशानी या भावनात्मक ठेस महसूस कर सकता है.

ऐसे व्यक्ति बड़ी सफलता हासिल करने, खूब पैसा कमाने या महंगी गाड़ियां खरीदने जैसे सपने भी देख सकते हैं. कई बार वे अपने फायदे के लिए दूसरों की मदद लेते हैं और जरूरत पूरी होने के बाद उन्हें नजरअंदाज कर देते हैं. दूसरों की भावनाओं को समझने और उनकी परवाह करने में भी उन्हें परेशानी हो सकती है.

हर बहस में खुद को सही साबित करने की कोशिश

पति-पत्नी के बीच असहमति होना सामान्य है. लेकिन स्वस्थ रिश्ते में दोनों एक-दूसरे की बात सुनते हैं और समस्या का हल निकालने की कोशिश करते हैं. अगर पार्टनर हर बहस को जीतने की तरह लेता है, तो बातचीत का मकसद ही बदल जाता है. अगर, आप किसी समस्या पर बात करना चाहते हैं, लेकिन वह अचानक पुरानी गलतियां गिनाने लगे या मुद्दा बदल दे. बातचीत का रुख इस तरह बदल सकता है कि आखिर में गलती आपकी ही दिखाई जाने लगे. बार-बार ऐसा होने पर दूसरा पार्टनर अपनी बात रखने से भी बचने लगता है.

आपकी भावनाओं को महत्व न देना

रिश्ते में सिर्फ अपनी बात कहना ही नहीं, दूसरे की परेशानी सुनना भी जरूरी है. अगर आप अपनी किसी समस्या के बारे में बताएं और पार्टनर उसे समझने के बजाय नजरअंदाज कर दे, तो यह व्यवहार रिश्ते पर असर डाल सकता है. उदाहरण के लिए, आप दिनभर की परेशानी साझा कर रहे हैं, लेकिन पार्टनर आपकी बात सुनने के बजाय अपनी समस्याएं बताने लगे या आपको जरूरत से ज्यादा भावुक कहकर टाल दे. ऐसा बार-बार होने पर आपको महसूस हो सकता है कि आपकी भावनाओं की रिश्ते में कोई जगह नहीं है.

अपनी गलती का दोष आप पर डालना

किसी भी रिश्ते में गलती होने पर उसे स्वीकार करना और जिम्मेदारी लेना जरूरी है. लेकिन अगर पार्टनर अपनी गलती मानने के बजाय हर बार आपको ही जिम्मेदार ठहराता है, तो इस व्यवहार को नजरअंदाज न करें. मसलन, किसी विवाद की शुरुआत उसकी गलती से हुई हो, लेकिन बातचीत के अंत में वह आपको ही दोषी ठहराने लगे. अगर हर बार ऐसा होता है और आपको ही माफी मांगनी पड़ती है, तो रिश्ते में बराबरी से बातचीत करना मुश्किल हो सकता है.

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