बिहार के डॉ धीरेंद्र नारायण सिन्हा दुनिया के सबसे प्रभावशाली दो फीसदी वैज्ञानिकों की सूची में शामिल

Published by : KumarVishwat Sen Updated At : 07 Dec 2022 6:40 PM

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स्कूल ऑफ प्रिवेंटिव ऑन्कोलॉजी के उप निदेशक राजेश वर्मा ने बताया कि यह सूची दुनिया के विभिन्न शोध पत्रों में शोधार्थी के द्वारा वैज्ञानिक का नाम उद्धृत करने के फ्रीक्वेंसी के आधार पर बनाई जाती है. 2022 तक पूरी दुनिया में शोध पत्रों में डा धीरेंद्र नारायण सिन्हा के शोध का 46,683 बार रिफरेंस दिया गया.

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पटना/नई दिल्ली : बिहार की राजधानी पटना स्थित स्कूल ऑफ प्रिवेंटिव ऑन्कोलॉजी के निदेशक डॉ धीरेंद्र नारायण सिन्हा दुनिया के सबसे प्रभावशाली दो फीसदी वैज्ञानिकों की वैश्विक सूची में स्थान बनाया है. यह सूची अमेरिका के स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी की ओर से हर साल जारी की जाती है. डॉ धीरेंद्र नायाण सिन्हा इस साल की सूची में जगह बनाए हैं. हालांकि, वे वर्ष 2019 से लगातार इस सूची में जगह बनाए हुए हैं.

मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, इसी सूची में पूरे भारत से ऑनकोलॉजी एंड कारसिनोजेनेसिस (कैंसर विज्ञान एवं कैंसर कैसे होता है?) वर्ग में 101 वैज्ञानिकों ने जगह बनाई है, जिसमें डॉ धीरेंद्र 46वें स्थान पर हैं. इस वर्ग में बिहार से सिर्फ डॉ धीरेंद्र ही इस सूची में हैं. डॉ धीरेंद्र सिन्हा पटना मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (पीएमसीएच) के सर्जरी विभाग में थे और 2006 में ऐच्छिक सेवानिवृत्ति लेकर शोध कर रहे हैं.

स्कूल ऑफ प्रिवेंटिव ऑन्कोलॉजी के उप निदेशक राजेश वर्मा ने बताया कि यह सूची दुनिया के विभिन्न शोध पत्रों में शोधार्थी के द्वारा वैज्ञानिक का नाम उद्धृत करने के फ्रीक्वेंसी के आधार पर बनाई जाती है. वर्ष 2022 तक पूरी दुनिया में विभिन्न शोध पत्रों में डा धीरेंद्र नारायण सिन्हा के शोध का 46,683 बार रिफरेंस दिया गया है. एक अन्य सोर्स ‘ रिसर्च गेट ‘ के मुताबिक डा सिन्हा के शोध का रिफरेंस 41381 बार दिया गया है. इसी तरह के आंकड़ों के आधार पर स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी सबसे प्रभावशाली दो प्रतिशत वैज्ञानिकों की सूची तैयार करती है, जिसमें 2022 में एक बार फिर डा सिन्हा को भी शामिल किया गया है.

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गौरतलब है कि उनके पास पीयर-रिव्यूड जर्नल्स में 250 से अधिक वैज्ञानिक लेख प्रकाशित हैं. उनके कई शोध पत्र द न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन, द लैंसेट, द लैंसेट ऑन्कोलॉजी, द नेचर आदि जैसे उत्कृष्ट पीयर-रिव्यू जर्नल में छपे हैं. वह कई वर्षों से हार्वर्ड यूनिवर्सिटी, यूएसए विजिटिंग साइंटिस्ट के रूप में जाते रहे हैं. इनका कई पब्लिकेशन इंटरनेशनल एजेंसी ऑन रिसर्च इन कैंसर (आईएआरसी)में भी आया है. डॉ धीरेंद्र नारायण सिन्हा मधुबनी के मधेपुर प्रखंड के भगवानपुर के रहनेवाले हैं. वो मूलत: सर्जन हैं. इन्होंने एमबीबीएस, एमएस(जेनरल सर्जरी) और पीएचडी पीएमसीएच से ही किया है.

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कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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