क्रिटिकल मिनरल्स के मामले में आत्मनिर्भर बनेगा भारत, IIT ISM धनबाद और नीति आयोग ने मिलाया हाथ

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IIT ISM, नीति आयोग

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IIT ISM Dhanbad के टेक्समिन और नीति आयोग ने महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में मिलकर काम करने के लिए समझौता किया है. इससे भारत को खनिजों के मामले में आत्मनिर्भर बनाने में मदद मिलेगी.

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IIT ISM Dhanbad: भारत को क्रिटिकल मिनरल्स के मामले में आत्मनिर्भर बनाने के लिए एक अहम पहल की गई है. आईआईटी (ISM) धनबाद के टेक्समिन (TEXMiN) और नीति आयोग ने इस दिशा में मिलकर काम करने का फैसला किया है. दोनों संस्थानों के बीच 31 अक्टूबर 2026 को संयुक्त आशय पत्र (SOI) पर हस्ताक्षर किए गए. इस समझौते से देश में जरूरी खनिजों की खोज, उनकी उपलब्धता का पता लगाने और उनके इस्तेमाल की नई तकनीक विकसित करने में मदद मिलेगी. इसका उद्देश्य खनिजों के लिए दूसरे देशों पर भारत की निर्भरता कम करना है.

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क्या है IIT ISM धनबाद और नीति आयोग का समझौता?

इस समझौते के तहत टेक्समिन और NITI Aayog महत्वपूर्ण और रणनीतिक खनिजों के क्षेत्र में मिलकर काम करेंगे. दोनों संस्थान देश में मौजूद खनिज संसाधनों की पहचान करने और उनकी उपलब्धता का पता लगाने के लिए शोध करेंगे. इसके साथ ही खनिजों से जुड़ी नई तकनीक विकसित करने और सरकार को जरूरी सुझाव देने पर भी काम किया जाएगा.

इस साझेदारी में वैज्ञानिक जानकारी और तकनीकी विशेषज्ञता का इस्तेमाल करके खनिज क्षेत्र को मजबूत बनाने की योजना है. इससे खनिजों से जुड़ी सरकारी योजनाओं को तैयार करने में भी मदद मिलेगी.

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मिनरल्स की खोज से लेकर दोबारा इस्तेमाल तक पर काम

इस समझौते का दायरा केवल खनिजों की खोज तक सीमित नहीं है. इसके तहत खनिजों को जमीन से निकालने, उनका प्रसंस्करण करने और उनसे उपयोगी सामग्री तैयार करने पर भी ध्यान दिया जाएगा. इसके अलावा इस्तेमाल हो चुके खनिजों को दोबारा काम में लाने यानी उनके पुनर्चक्रण को बढ़ावा देने की योजना है.

दोनों संस्थान खनिज संसाधनों से जुड़ा एक बड़ा डेटाबेस भी तैयार करेंगे. इसमें खनिजों की उपलब्धता और उनसे जुड़ी जरूरी जानकारी रखी जाएगी. आधुनिक तकनीक और आंकड़ों की मदद से खनिज संसाधनों का बेहतर आकलन किया जा सकेगा.

इलेक्ट्रिक वाहन और रक्षा क्षेत्र को होगा फायदा

आज इलेक्ट्रिक वाहन, मोबाइल, कंप्यूटर, ऊर्जा भंडारण और रक्षा से जुड़े उपकरण बनाने में कई महत्वपूर्ण खनिजों की जरूरत होती है. इनकी मांग लगातार बढ़ रही है. ऐसे में भारत के लिए इन खनिजों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करना जरूरी है.

अगर देश में ही इन खनिजों की खोज और प्रसंस्करण को बढ़ावा मिलता है, तो दूसरे देशों से इनकी खरीद पर निर्भरता कम हो सकती है. इससे देश के उद्योगों को भी फायदा मिलेगा.

भारत की आत्मनिर्भरता को मिलेगी मजबूती

इस साझेदारी से केंद्र और राज्य सरकारों को खनिजों से जुड़े फैसले लेने में वैज्ञानिक आंकड़ों और विशेषज्ञों की मदद मिलेगी. इससे नई नीतियां बनाने और सरकारी योजनाओं को बेहतर तरीके से लागू करने में सहायता मिल सकती है.

यह पहल राष्ट्रीय क्रिटिकल मिनरल मिशन के उद्देश्यों को भी आगे बढ़ाने में मददगार हो सकती है. इसका मुख्य उद्देश्य देश में महत्वपूर्ण खनिजों की उपलब्धता बढ़ाना और उनकी आपूर्ति को सुरक्षित बनाना है. आने वाले समय में यह समझौता भारत की खनिज सुरक्षा और आत्मनिर्भरता को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा सकता है.

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